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पिता के अंतिम दर्शन न कर पाने का हमेशा रहेगा अफसोस
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त्रिलोक सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
पाटी (चंपावत)। धूनाघाट के 67 साल के कारोबारी त्रिलोक सिंह की रविवार को मौत हो गई। लॉकडाउन के कारण दो बेटे पिता के अंतिम दर्शन नहीं कर पाए। जहां एक बेटा लॉकडाउन के चलते गुजरात में फंसा है तो गाजियाबाद में काम करने वाला बेटा अंतिम संस्कार होने के एक दिन बाद सोमवार शाम को गांव पहुंच सका।
गांव में सबसे बड़े बेटे पूरन सिंह और उनका परिवार रहता था। पूरन सिंह ने दोनों भाइयों श्याम सिंह और मोहन सिंह को पिता के दुनिया में नहीं रहने की जानकारी दी। इस गमगीन खबर से दुखी दोनों बेटों ने लॉकडाउन के बीच घर जाने के लिए अनुमति की कवायद शुरू की। गाजियाबाद में रहने वाले श्याम सिंह को 13 अप्रैल को अनुमति मिल सकी और वे परिवार सहित देर शाम घर पहुंचे, लेकिन पिता का अंतिम संस्कार एक दिन पहले ही हो चुका था।
वहीं गुजरात में काम करने वाले मोहन सिंह को तो इस गमी के मौके पर भी घर आना नसीब नहीं हो सका। उन्हें लॉकडाउन में राज्य से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिल सकी। मोहन कहते हैं कि ऐसे वक्त घर न पहुंच पाने का अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा।
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गांव में सबसे बड़े बेटे पूरन सिंह और उनका परिवार रहता था। पूरन सिंह ने दोनों भाइयों श्याम सिंह और मोहन सिंह को पिता के दुनिया में नहीं रहने की जानकारी दी। इस गमगीन खबर से दुखी दोनों बेटों ने लॉकडाउन के बीच घर जाने के लिए अनुमति की कवायद शुरू की। गाजियाबाद में रहने वाले श्याम सिंह को 13 अप्रैल को अनुमति मिल सकी और वे परिवार सहित देर शाम घर पहुंचे, लेकिन पिता का अंतिम संस्कार एक दिन पहले ही हो चुका था।
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वहीं गुजरात में काम करने वाले मोहन सिंह को तो इस गमी के मौके पर भी घर आना नसीब नहीं हो सका। उन्हें लॉकडाउन में राज्य से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिल सकी। मोहन कहते हैं कि ऐसे वक्त घर न पहुंच पाने का अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा।
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