{"_id":"5a91a5404f1c1bd34b8baa31","slug":"the-tears-arising-from-the-joy-of-usha-standing-in-the-legs","type":"story","status":"publish","title_hn":"पैरों में खड़ी हुई ऊषा के खुशी से निकले आंसू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पैरों में खड़ी हुई ऊषा के खुशी से निकले आंसू
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Sat, 24 Feb 2018 11:17 PM IST
विज्ञापन
मर्म चिकित्सा के बाद मुस्कराते हुए सहारे से अपने पैरों से चलकर जाती ऊषा बिष्ट।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मर्म चिकित्सा में असाध्य कहे जाने वाले कई रोगों के मर्ज दूर किए तो कई रोगियों को लाभ पहुंचना शुरू हुआ। पांस साल से बिस्तर पर पड़ी ज्ञानखेड़ा ग्रामसभा निवासी 69 वर्षीया ऊषा बिष्ट मर्म चिकित्सा के बाद जैसे ही अपने पैरा खड़ी हुई उसके आंसू छलक पड़े। वह इतनी खुश थी कि उसने प्रख्यात मर्म चिकित्सक डॉ. सुनील जोशी के गाल सहलाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। वे 25 वर्षों से पैरों में दर्द के कारण परेशान थीं।
विज्ञापन
खटीमा से पहुंचे सुनील कुमार गुप्ता भी पिछले एक साल से हाथों के दर्द से परेशान थे, लेकिन मर्म चिकित्सा के बाद उनके दोनों हाथ आसानी से ऊपर उठने लगे। बीमारी से राहत में उनकी आंखें भर आई। 60 वर्षीय ललित मोहन पार्किंगसन (हाथों में कंपन) की समस्या से ग्रसित थे। वे ठीक से लिख भी नहीं पाते थे। मर्म चिकित्सा के बाद उन्हें इस समस्या से छुटकारा मिला। करीब पांच साल से घुटनों की समस्या से पीड़ित बनबसा की मोहनी बिष्ट (65) को भी मर्म चिकित्सा से लाभ मिला है। बनबसा के 62 वर्षीय राजेश कुमार तिवारी आर्थराइटिस से परेशान थे। मर्म चिकित्सा के बाद अब वे ठीक हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वे आर्थराइटिस की समस्या से काफी परेशान है। कई जगह डॉक्टरों को दिखाया, कई दवाईयां खाई, कोई फायदा नहीं पहुंचा, लेकिन आज मर्म चिकित्सा के बाद उन्हें काफी हद तक आराम मिला है। सांस एवं सवाईकल से परेशान ऊधम सिंह नगर जिले के मझोला से आए मुकेश कुमार के हाथ पूरी तरह ऊपर नहीं उठते थे, लेकिन यहां मर्म चिकित्सा के बाद उनके दोनों हाथ ऊपर उठने लगे। टनकपुर की कलावती गड़कोटी कंधे में दर्द से परेशान थी। अब मर्म चिकित्सा के बाद उन्हें राहत मिली।
विज्ञापन
नीरज बोला गजब है मर्म चिकित्सा
मर्म चिकित्सा से मिली राहत से गदगद टनकपुर के नीरज पंत बोले कि वास्तव में मर्म चिकित्सा गजब की चिकित्सा पद्धति है। नीरज का एक हाथ बचपन से ही खराब था। वह इस हाथ से कोई वस्तु नहीं उठा पाता था, लेकिन मर्म चिकित्सा के बाद वह अपने उसी हाथ से गिलास उठाकर पानी पीने लगा है।
रमेश को मर्म चिकित्सा से सर्वाइकलपेन में मिला फायदा
विचई निवासी सैनिक रमेश चंद को सर्वाइकलपेन के कारण सेना से मेडिकल बोर्ड लेकर घर आना पड़ा था। वे पिछले पांच साल से सर्वाइकलपेन से परेशान थे, सेना में रहते उनका काफी इलाज हुआ, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई, मजबूरन उन्हें मेडिकल बोर्ड लेकर घर आना पड़ा। आज मर्म चिकित्सा शिविर में आकर उन्होंने उपचार कराया तो उन्हें काफी हद तक लाभ मिला है।