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Champawat News: लोहाश्री तोक में तीन साल में ढह गई पेयजल टैंक की छत
Mon, 05 May 2025 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 05 May 2025 10:46 PM IST
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घटिया गुणवत्ता के चलते बाराकोट ब्लाॅक के लोहाश्री में बने पेयजल टैंक की ध्वस्त हुई छत। स्रोत: ग
लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट ब्लाॅक के ग्राम पंचायत इजड़ा के लोहाश्री तोक में जल संस्थान की ओर से बनाए गए पेयजल टैंक की छत तीन साल भी नहीं टिक पाई। घटिया गुणवत्ता के चलते टैंक की छत ध्वस्त हो गई। ग्रामीणों ने जल संस्थान की कार्य प्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। लोगों ने जल्द से जल्द खतरा बने टैंक की छत डालने की मांग उठाई है।
ग्रामीण खिलानंद पंत, प्रकाश चंद्र, जगदीश चंद्र पंत, प्रकाश चंद्र और राजेंद्र कुमार ने बताया कि बाराकोट के लोहाश्री तोक में वर्ष 2022 में करीब 22 परिवारों के लिए सलना-इजड़ा पेयजल योजना के तहत 4.57 लाख की लागत से छह हजार लीटर के पेयजल टैंक का निर्माण किया गया था। घटिया गुणवत्ता के चलते टैंक की छत तीन साल भी नहीं टिक पाई और ध्वस्त होकर छत पानी के टैंक में समा गई। ग्रामीणों ने बताया कि हर घर नल हर जल योजना के तहत पेयजल टैंक बनाया गया था।
उन्होंने बताया कि टैंक के आसपास गांव के बच्चे खेलने के लिए भी आते हैं। टैंक की ऊंचाई अधिक न होने के कारण यह बच्चों के लिए खतरा बन गया है। बताया कि टैंक के खुले होने के कारण टैंक के पानी में अब बंदर और लंगूर भी उछल-कूद कर रहे हैं। उन्होंने जल संस्थान से जल्द टैंक की छत के निर्माण की मांग उठाई है। चेतावनी दी कि यदि जल्द ही टैंक की छत नहीं बनाई गई तो लोग आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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कोट
बाराकोट ब्लाॅक के ईजड़ा ग्राम पंचायत के लोहाश्री तोक में वर्ष 2020 में जल संस्थान ने 4.57 लाख रुपये की लागत से टैंक के निर्माण का बॉन्ड बना था। मामला संज्ञान में आ गया है। जल्द ही मौके पर जाकर छत डालने का कार्य कराया जाएगा। - धीरेंद्र खर्कवाल, अवर अभियंता, जल संस्थान बाराकोट
कोट
गांव में पेयजल टैंक तो बना दिया गया लेकिन इसमें गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते टैंक की छत मात्र तीन साल में ही जमींदोज हो गई। टैंक की छत ध्वस्त होने से यहां अब खतरा पैदा हो गया है। जल्द टैंक की छत डाली जानी चाहिए। - प्रकाश चंद्र, ग्रामीण
कोट
लोहाश्री में घटिया गुणवत्ता से बने पेयजल टैंक की छत ध्वस्त होना विभाग की कार्य प्रणाली की पोल खोलता है। गांव के लिए बड़ी मुश्किल से पेयजल टैंक का निर्माण किया गया, जो विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। विभाग को मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य कराना चाहिए। - केएन पंत, ग्रामीण
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ग्रामीण खिलानंद पंत, प्रकाश चंद्र, जगदीश चंद्र पंत, प्रकाश चंद्र और राजेंद्र कुमार ने बताया कि बाराकोट के लोहाश्री तोक में वर्ष 2022 में करीब 22 परिवारों के लिए सलना-इजड़ा पेयजल योजना के तहत 4.57 लाख की लागत से छह हजार लीटर के पेयजल टैंक का निर्माण किया गया था। घटिया गुणवत्ता के चलते टैंक की छत तीन साल भी नहीं टिक पाई और ध्वस्त होकर छत पानी के टैंक में समा गई। ग्रामीणों ने बताया कि हर घर नल हर जल योजना के तहत पेयजल टैंक बनाया गया था।
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उन्होंने बताया कि टैंक के आसपास गांव के बच्चे खेलने के लिए भी आते हैं। टैंक की ऊंचाई अधिक न होने के कारण यह बच्चों के लिए खतरा बन गया है। बताया कि टैंक के खुले होने के कारण टैंक के पानी में अब बंदर और लंगूर भी उछल-कूद कर रहे हैं। उन्होंने जल संस्थान से जल्द टैंक की छत के निर्माण की मांग उठाई है। चेतावनी दी कि यदि जल्द ही टैंक की छत नहीं बनाई गई तो लोग आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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कोट
बाराकोट ब्लाॅक के ईजड़ा ग्राम पंचायत के लोहाश्री तोक में वर्ष 2020 में जल संस्थान ने 4.57 लाख रुपये की लागत से टैंक के निर्माण का बॉन्ड बना था। मामला संज्ञान में आ गया है। जल्द ही मौके पर जाकर छत डालने का कार्य कराया जाएगा। - धीरेंद्र खर्कवाल, अवर अभियंता, जल संस्थान बाराकोट
कोट
गांव में पेयजल टैंक तो बना दिया गया लेकिन इसमें गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते टैंक की छत मात्र तीन साल में ही जमींदोज हो गई। टैंक की छत ध्वस्त होने से यहां अब खतरा पैदा हो गया है। जल्द टैंक की छत डाली जानी चाहिए। - प्रकाश चंद्र, ग्रामीण
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लोहाश्री में घटिया गुणवत्ता से बने पेयजल टैंक की छत ध्वस्त होना विभाग की कार्य प्रणाली की पोल खोलता है। गांव के लिए बड़ी मुश्किल से पेयजल टैंक का निर्माण किया गया, जो विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। विभाग को मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य कराना चाहिए। - केएन पंत, ग्रामीण