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महाशीर के लिए काल बनेगा प्रस्तावित बांध

Thu, 10 Aug 2017 10:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Thu, 10 Aug 2017 10:43 PM IST
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The proposed dam will be the period for Mahasheer
पंचेश्वर में इसी जगह प्रस्तावित है बांध। - फोटो : अमर उजाला

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जिले में पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर पहली पर्यावरणीय जन सुनवाई के सकुशल निपटने के बाद पंचेश्वर बांध प्राधिकरण ने बांध निर्माण की एक और बाधा को पार कर लिया है। प्रस्तावित बांध निर्माण से जहां लाखों करोड़ों रुपये मूल्य की भू संपदा, गांव, घर और अन्य चल अचल संपत्तियां जलमग्न हो जाएंगी वहीं जलीय जैव विविधता पर भी गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। प्रस्तावित बांध के निर्माण से महाकाली नदी में मछलियों की गोल्डन महाशीर (सुनहरी महाशीर) की प्रजाति के अस्तित्व पर काल की तलवार लटक जाएगी। वर्तमान में महाकाली और सरयू नदियों में मछलियों की कुल 30 प्रजातियां पाई गई हैं। 

पर्यावरण और महाशीर संरक्षण को लेकर टाइगर्स चंपावत नामक स्वयंसेवी संस्था का संचालन करने वाले राजेंद्र गड़कोटी के अनुसार प्रस्तावित बांध के निर्माण के लिए नदी के डायवर्जन से प्रवासी मत्स्य प्रजातियों को नदी के प्रति प्रवाह और अनु प्रवाह में आवागमन में बाधा आ सकती है। चूंकि डायवर्जन नहर में तेज जल बहाव होता है। बांध की डीपीआर तैयार करने वाले अधिकारियों के अनुसार नदी के डायवर्जन की अवधि एक वर्ष से अधिक हो सकती है। कुछ गर्म पानी की मत्स्य प्रजातियां गर्मी में भी प्रति प्रवाह में जाने में सक्षम नहीं हो सकती हैं। जिस कारण नदी से गर्म पानी की मछलियों की प्रजातियां नष्ट हो जाएंगी। उनका कहना है कि क्योंकि बांध का निर्माण 315 मीटर ऊंचा होना है और प्रस्तावित बांध में मछली सीढ़ी का निर्माण संभव नहीं है। प्रस्तावित बांध का निर्माण महाशीर प्रजाति की मछलियों को ऊपर से नीचे आने जाने से रोक देगा। इसी प्रकार उप नदियों से महाकाली नदी में मत्स्य प्रजातियों का प्रवास भी प्रभावित होगा। परियोजना का प्रवासी मत्स्य प्रजातियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि पंचेश्वर क्षेत्र महाशीर मछलियों के व्यापक उत्पादन के लिए जाना जाता है। कुछ सालों पहले तक यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की मत्स्य आखेट प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा चुका है।  
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मत्स्य जीवों पर पड़ सकते हैं दो प्रकार के प्रभाव 
चंपावत। पर्यावरणविद् धीरेंद्र कुमार राय के अनुसार बांध निर्माण के कारण महाकाली नदी के जलीय वनस्पतियों और जीवों पर होने वाले प्रभाव दोनों ही प्रकार के हो सकते हैं। नकारात्मक प्रभाव के तहत जहां महाशीर सहित मछलियों की अन्य प्रजातियां संकट में पड़ जाएंगी। वहीं सकारात्मक प्रभाव के रूप में यह उम्मीद की जा सकती है कि बांध के निर्माण से गहरा और व्यापक जल निकाय तैयार हो सकता है, जो ठंडे पानी के साथ-साथ गर्म पानी की मछली प्रजातियों के उपयुक्त आवास और शरण स्थली बन सकता है। जिससे जलीय जैव विविधता के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने और इलाके के सामाजिक वातावरण में सुधार के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। 
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बांध के जलाशय में आएगी 2422 हेक्टेयर वन भूमि 
चंपावत। डीपीआर के मुताबिक पंचेश्वर बांध परियोजना के कारण बनने वाले जलाशय में 2422 हेक्टेयर वन भूमि जलमग्न होगी। हालांकि परियोजना के जलमग्न क्षेत्र में वनस्पति की कोई दुर्र्लभ या अनूठी प्रजाति शामिल नहीं है। बावजूद इसके हजारों लाखों पेड़ों को पंचेश्वर बांध के लिए अपनी बलि देनी होगी। चंपावत के अलावा पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले में प्रभावित होने वाले पेड़ों की गिनती का कार्य वन विभाग की ओर से शुरू कर दिया गया है। 
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