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बकाएदारों को रखने वाली जगह को बना दिया बंदीगृह
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:30 PM IST
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अंग्रेजी शासनकाल में बना लोहाघाट का न्यायिक बंदीगृह।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत जिले में कोई जेल नहीं है। राजस्व विभाग के बकाएदारों को रखने के लिए 1925 में बने भवन को ही काम चलाने के लिए बंदीगृह बना दिया गया। जिले का अकेला न्यायिक बंदीगृह होने के चलते यहां अधिकांश समय क्षमता से ज्यादा विचाराधीन कैदी रखे जाते हैं। वर्तमान में 20 कैदियों की क्षमता वाले इस बंदीगृह में 21 विचाराधीन कैदी हैं।
बंदीगृह में न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से मुआयना किए जाने के चलते कैदियों की सुविधाएं बेहतर हुई है। साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण भी नियमित रूप से शिविर लगाकर समस्याएं सुनती है और कानूनी जानकारियां दी जाती है। कैदियों के लिए टेलीविजन भी लगाए गए हैं। वहीं नियमित अंतराल में चिकित्सा टीम स्वास्थ्य परीक्षण भी करती है।
विचाराधीन कैदियों को रखने के लिए मात्र चार कमरे हैं। तीन कमरों में पुरुष कैदियों और एक कमरे में महिला कैदियों को रखा जाता है। अलबत्ता क्षमता से ज्यादा होने या अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर विचाराधीन कैदियों को जिलाधिकारी और जिला जज के निर्देशों से अल्मोड़ा या हल्द्वानी बंदीगृह में शिफ्ट किया जाता है। कैदियों की सुरक्षा का जिम्मा पुलिस के पास है, जबकि अन्य व्यवस्थाएं राजस्व विभाग करता है। राजस्व उप निरीक्षक (न्यायिक बंदीगृह) राकेश फर्त्याल का कहना है कि इस वक्त बंदीगृह में 19 पुरुष व दो महिला कैदी हैं।
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कोट
न्यायिक बंदीगृह में कैदियों को अनुमन्य सुविधाएं दी जा रही है। बंदीगृह की व्यवस्थाओं को छोड़कर शेष काम रेगुलर पुलिस के पास है। बंदीगृह की व्यवस्थाओं को भी रेग्युलर पुलिस को सौंपने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।
नीलू चावला, प्रभारी निरीक्षक, न्यायिक बंदीगृह लोहाघाट।
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बंदीगृह में न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से मुआयना किए जाने के चलते कैदियों की सुविधाएं बेहतर हुई है। साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण भी नियमित रूप से शिविर लगाकर समस्याएं सुनती है और कानूनी जानकारियां दी जाती है। कैदियों के लिए टेलीविजन भी लगाए गए हैं। वहीं नियमित अंतराल में चिकित्सा टीम स्वास्थ्य परीक्षण भी करती है।
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विचाराधीन कैदियों को रखने के लिए मात्र चार कमरे हैं। तीन कमरों में पुरुष कैदियों और एक कमरे में महिला कैदियों को रखा जाता है। अलबत्ता क्षमता से ज्यादा होने या अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर विचाराधीन कैदियों को जिलाधिकारी और जिला जज के निर्देशों से अल्मोड़ा या हल्द्वानी बंदीगृह में शिफ्ट किया जाता है। कैदियों की सुरक्षा का जिम्मा पुलिस के पास है, जबकि अन्य व्यवस्थाएं राजस्व विभाग करता है। राजस्व उप निरीक्षक (न्यायिक बंदीगृह) राकेश फर्त्याल का कहना है कि इस वक्त बंदीगृह में 19 पुरुष व दो महिला कैदी हैं।
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न्यायिक बंदीगृह में कैदियों को अनुमन्य सुविधाएं दी जा रही है। बंदीगृह की व्यवस्थाओं को छोड़कर शेष काम रेगुलर पुलिस के पास है। बंदीगृह की व्यवस्थाओं को भी रेग्युलर पुलिस को सौंपने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।
नीलू चावला, प्रभारी निरीक्षक, न्यायिक बंदीगृह लोहाघाट।