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प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी की मेहनत लाई रंग
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Sat, 26 May 2018 12:11 AM IST
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पाटी के तोली गांव में पालीहाउस में उगाई जा रही सब्जी।
- फोटो : अमर उजाला
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पाटी तहसील के तोली गांव की पहचान राज्य में बेहतर मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन के लिए जानी जाती है। गांव को अलग पहचान दिलाने के लिए प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी ने हाड़तोड़ मेहनत की है, जो अब रंग लाने लगी है। उनकी ओर से स्वयं के बूते मत्स्य पालन को नए आयाम देकर सफलता की इबारत लिखी जा रही है। वह मत्स्य पालन के बाद बचे शेष पानी का उपयोग पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जियों की सिंचाई में करते हैं।
गहतोड़ी ने अपने खेतों में पानी के पक्के टैंकों का निर्माण किया है। इसके अलावा उनके बगीचे में सेव, अखरोट, आडू और पुलम आदि के 150 से अधिक पेड़ हैं। उनकी ओर से एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के सहयोग से मत्स्य पालन के साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन और फूलों की खेती भी की जा रही है। जिसको देखकर क्षेत्र के अन्य काश्तकार भी मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का जरिया बना रहे हैं।
कई बार सम्मानित हो चुके हैं गहतोड़ी
चंपावत। प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 2010 में जिला किसान पुरस्कार, गरीब महिलाओं के उत्थान के लिए राज्यपाल माग्रेट अल्वा पुरस्कार, मत्स्य पालन के लिए तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार की ओर से सम्मानित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वर्ष 2008 में सम्मानित, राष्ट्रीय शीत जल मत्स्य निदेशालय भीमताल और लखनऊ मत्स्य संस्थान की ओर से वर्ष 2006 में मत्स्य श्री पुरस्कार शामिल हैं। इसके अलावा समय- समय पर जिला प्रशासन द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
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प्रतिवर्ष करते हैं दो लाख रुपये की आमदनी
चंपावत। प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी बताते हैं कि मत्स्य पालन और बागवानी में आधुनिक तकनीकें अपनाने से काश्तकारों की आमदनी बढ़ सकती है। पहले उनकी वार्षिक बचत एक लाख 25 हजार रुपये तक होती थी। पिछले कुछ सालों से नई तकनीक अपनाने के बाद उनकी दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है।
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गहतोड़ी ने अपने खेतों में पानी के पक्के टैंकों का निर्माण किया है। इसके अलावा उनके बगीचे में सेव, अखरोट, आडू और पुलम आदि के 150 से अधिक पेड़ हैं। उनकी ओर से एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के सहयोग से मत्स्य पालन के साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन और फूलों की खेती भी की जा रही है। जिसको देखकर क्षेत्र के अन्य काश्तकार भी मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का जरिया बना रहे हैं।
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कई बार सम्मानित हो चुके हैं गहतोड़ी
चंपावत। प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 2010 में जिला किसान पुरस्कार, गरीब महिलाओं के उत्थान के लिए राज्यपाल माग्रेट अल्वा पुरस्कार, मत्स्य पालन के लिए तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार की ओर से सम्मानित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वर्ष 2008 में सम्मानित, राष्ट्रीय शीत जल मत्स्य निदेशालय भीमताल और लखनऊ मत्स्य संस्थान की ओर से वर्ष 2006 में मत्स्य श्री पुरस्कार शामिल हैं। इसके अलावा समय- समय पर जिला प्रशासन द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
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प्रतिवर्ष करते हैं दो लाख रुपये की आमदनी
चंपावत। प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी बताते हैं कि मत्स्य पालन और बागवानी में आधुनिक तकनीकें अपनाने से काश्तकारों की आमदनी बढ़ सकती है। पहले उनकी वार्षिक बचत एक लाख 25 हजार रुपये तक होती थी। पिछले कुछ सालों से नई तकनीक अपनाने के बाद उनकी दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है।