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तीन भाई बहिनों के साथ बूढ़ी मां का सहारा बनी शांति
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चंपावत जिले के पाटी व्लाक में ब्यूटी पार्लर का संचालन करती शांति देवी।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चुनौतियों से निपटने और जिंदगी को हर हाल में खुशी से जीने की कला में बेटियां काफी माहिर होती हैं। ऐसी ही एक बेटी है चंपावत जिले के पाटी ब्लॉक के चौड़ाकोट की रहने वाली शांति बिष्ट, जिसने जिंदगी के किसी भी हालात में हार नहीं मानी और तीन भाई बहनों के साथ ही बूढ़ी मां का सहारा बन कर औरों के लिए आदर्श उदाहरण पेश कर रही हैं।
शांति के पिता जब वह 15 साल की थी तभी ही स्वर्गवासी हो गए थे। मां बेनी देवी ने जैसे-तैसे शादी कराई तो कुछ ही समय बाद पति से तलाक हो गया। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी शांति ने हिम्मत नहीं हारी। उसने ब्यूटी पार्लर का काम सीखा तथा अपने छोटे तीनों भाई बहनों की और बूढ़ी मां की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उसने अपनी दोनों बहनों को पढ़ा-लिखा कर उनकी शादी की तथा भाई को पढ़ाया। भाई वर्तमान में हल्द्वानी में सरकारी नौकरी में तैनात है।
शांति वर्तमान में अपनी बूढ़ी मां के साथ रहकर उनकी सेवा कर रही है। शांति चाहती तो तलाक के बाद दूसरी शादी कर सकती थी, पर उसने अपनी बूढ़ी मां और तीनों भाई बहनों पर अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। वर्तमान में शांति पाटी ब्लॉक में मकान लगाकर ब्यूटी पार्लर से से होने वाली आय से अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसलों से अपने परिवार को खड़ा कर एक बेटी होने का फर्ज अदा किया है। शांति की मां बेनी देवी कहती हैं शांति उनकी बड़ी बेटी नहीं बल्कि बड़ा बेटा है, जिसने पिता के जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
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शांति के पिता जब वह 15 साल की थी तभी ही स्वर्गवासी हो गए थे। मां बेनी देवी ने जैसे-तैसे शादी कराई तो कुछ ही समय बाद पति से तलाक हो गया। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी शांति ने हिम्मत नहीं हारी। उसने ब्यूटी पार्लर का काम सीखा तथा अपने छोटे तीनों भाई बहनों की और बूढ़ी मां की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उसने अपनी दोनों बहनों को पढ़ा-लिखा कर उनकी शादी की तथा भाई को पढ़ाया। भाई वर्तमान में हल्द्वानी में सरकारी नौकरी में तैनात है।
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शांति वर्तमान में अपनी बूढ़ी मां के साथ रहकर उनकी सेवा कर रही है। शांति चाहती तो तलाक के बाद दूसरी शादी कर सकती थी, पर उसने अपनी बूढ़ी मां और तीनों भाई बहनों पर अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। वर्तमान में शांति पाटी ब्लॉक में मकान लगाकर ब्यूटी पार्लर से से होने वाली आय से अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसलों से अपने परिवार को खड़ा कर एक बेटी होने का फर्ज अदा किया है। शांति की मां बेनी देवी कहती हैं शांति उनकी बड़ी बेटी नहीं बल्कि बड़ा बेटा है, जिसने पिता के जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
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