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हास्य नाटक ‘चाला हो गया’ का बेहतरीन मंचन हुआ
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Fri, 09 Jun 2017 10:56 PM IST
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लोहाघाट में नाटक प्रस्तुत करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद की ओर से युवा भवन में पांच दिनी हिमाद्री नाट्य महोत्सव शुरू हो गया है। चंडीगढ़ के कलाकारों ने दिलकश नाटक प्रस्तुत किए। जिला प्रशासन और कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला दर्पण लोहाघाट के तत्वावधान में हो रहे महोत्सव का मुख्य अतिथि जिलाधिकारी डा.अहमद इकबाल ने शुभारंभ किया।
अलंकार थियेटर चंडीगढ़ के कलाकारों ने बोधज्ञाना द्वारा लिखित और नीरेश कुमार द्वारा निर्देशित हास्य नाटक ‘चाला हो गया’ का बेहतरीन मंचन किया गया। इस नाटक में दो आत्माओं के परगमन की कथा दिखाई गई। नाटक में दिखाया गया कि गुरु परिवार अपने शिष्य शांडिल्य के साथ एक बगीचे में ध्यानमग्न होते हैं। उसी बगीचे में बसंत सेना अपनी सखी परिभ्रष्किा के साथ आती है। बसंत सेना जो रामलिक से प्यार करती है वह रामलिक के प्यार में शृंगार रस का गीत गाती है।
उसी समय एक काला सांप बसंत सेना को डंस लेता है और बसंत सेना मर जाती है। उसकी सखी का विलाप सुनकर शिष्य शांडिल्य वहां आता है और मृत बसंत सेना को देख बहुत दुखी होता है। अपने गुरु से शांडिल्य आत्मा परगमन की क्रिया के जरिए बसंत सेना को जिंदा करने की जिद करता है। गुरु अपने प्राण बसंत सेना के शरीर में डाल देता है। बसंत सेना जिंदा हो जाती है। यह देख यमदूत बसंत सेना के प्राण को गुरु के शरीर में डाल देते हैं। नाटक में कलाकारों द्वारा आत्मा की इस अदला-बदली के दृश्य को दर्शकों ने खूब सराहा।
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शांडिल्य की भूमिका ज्योति, यमदूत का अभिनय रजत शर्मा, रामलिक का हरजीत सिंह, बसंतसेना का अभिनय वंदना ने किया। विशिष्ट अतिथि सीडीओ एचजी भट्ट, कला दर्पण के अध्यक्ष भैरव राय, राम सेवा समिति के अध्यक्ष जीवन मेहता, मानवाधिकार संरक्षण समिति के जिलाध्यक्ष डीडी पांडेय, पीएस मेहता, नरेश राय, एसके वर्मा मौजूद थे। स्वागत केंद्र के अमर जीत सिंह, नाटय प्रभारी कृष्ण मोहन द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन समारोह के प्रभारी मधुकांक मिश्रा ने किया।
अलंकार थियेटर चंडीगढ़ के कलाकारों ने बोधज्ञाना द्वारा लिखित और नीरेश कुमार द्वारा निर्देशित हास्य नाटक ‘चाला हो गया’ का बेहतरीन मंचन किया गया। इस नाटक में दो आत्माओं के परगमन की कथा दिखाई गई। नाटक में दिखाया गया कि गुरु परिवार अपने शिष्य शांडिल्य के साथ एक बगीचे में ध्यानमग्न होते हैं। उसी बगीचे में बसंत सेना अपनी सखी परिभ्रष्किा के साथ आती है। बसंत सेना जो रामलिक से प्यार करती है वह रामलिक के प्यार में शृंगार रस का गीत गाती है।
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उसी समय एक काला सांप बसंत सेना को डंस लेता है और बसंत सेना मर जाती है। उसकी सखी का विलाप सुनकर शिष्य शांडिल्य वहां आता है और मृत बसंत सेना को देख बहुत दुखी होता है। अपने गुरु से शांडिल्य आत्मा परगमन की क्रिया के जरिए बसंत सेना को जिंदा करने की जिद करता है। गुरु अपने प्राण बसंत सेना के शरीर में डाल देता है। बसंत सेना जिंदा हो जाती है। यह देख यमदूत बसंत सेना के प्राण को गुरु के शरीर में डाल देते हैं। नाटक में कलाकारों द्वारा आत्मा की इस अदला-बदली के दृश्य को दर्शकों ने खूब सराहा।
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शांडिल्य की भूमिका ज्योति, यमदूत का अभिनय रजत शर्मा, रामलिक का हरजीत सिंह, बसंतसेना का अभिनय वंदना ने किया। विशिष्ट अतिथि सीडीओ एचजी भट्ट, कला दर्पण के अध्यक्ष भैरव राय, राम सेवा समिति के अध्यक्ष जीवन मेहता, मानवाधिकार संरक्षण समिति के जिलाध्यक्ष डीडी पांडेय, पीएस मेहता, नरेश राय, एसके वर्मा मौजूद थे। स्वागत केंद्र के अमर जीत सिंह, नाटय प्रभारी कृष्ण मोहन द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन समारोह के प्रभारी मधुकांक मिश्रा ने किया।