{"_id":"689b7c85a7adb9dac803af22","slug":"the-burden-of-the-systems-failures-on-the-mountains-is-on-the-shoulders-of-the-youth-champawat-news-c-229-1-shld1026-127837-2025-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Champawat News: पहाड़ पर सिस्टम की नाकामियों का भार युवाओं के कंधों पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Champawat News: पहाड़ पर सिस्टम की नाकामियों का भार युवाओं के कंधों पर
Tue, 12 Aug 2025 11:10 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Tue, 12 Aug 2025 11:10 PM IST
विज्ञापन
बीमार महिला को डंडे में चादर लपेट कर लाते युवा। स्रोत : ग्रामीण।
चंपावत। जिले की सड़क विहीन ग्राम पंचायत बकोड़ा की बीमार बुजुर्ग महिला को युवा डंडे में चादर बांधकर मुख्य सड़क तक लेकर आए। वहां से फिर वाहन से जिला मुख्यालय ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया। आजादी के 75 साल बाद से बकोड़ा के लोगों को सड़क का इंतजार है। कई सरकारें आईं और गईं लेकिन गांव तक सड़क नहीं पहुंच सकी।
मंगलवार सुबह गांव की 65 वर्षीय कलावती देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें बुखार और खांसी की समस्या थी। गांव में कोई स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें जिला मुख्यालय ले जाने का फैसला लिया। गांव के युवाओं ने एक डंडे पर कपड़ा बांधकर डोली तैयार की और बुजुर्ग महिला 15 किमी दूर मंच तक पैदल लेकर आए। ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे रास्तों से गुजरते हुए युवाओं ने चार घंटे से ज्यादा समय मंच पहुंचने में लगा। फिर वाहन से 32 किमी का सफर कर चंपावत में निजी अस्पताल में महिला को दिखाया।
--
सड़क नहीं होने से मूलभूत सुविधाओं की कमी
विकास के वादों के बीच भी बकोड़ा गांव अब तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। डोली वाले मनीष बोहरा, प्रकाश बोहरा, राहुल बोहरा, मनोज, विनोद, नरेंद्र, दयाल और विकास ने कहा कि सीएम को समस्या का संज्ञान लेना चाहिए। सड़क का न होना ग्राम पंचायत की करीब 400 की आबादी के लिए मुसीबत बना हुआ है।
विज्ञापन
-- --
हमारी सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। अगर सड़क होती तो कलावती देवी को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। चार घंटे तक ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर डोली उठाना आसान नहीं थालेकिन मजबूरी में हमें ऐसा करना पड़ा। - महेंद्र रावत, पूर्व ग्राम प्रधान बकोड़ा
--
बकोड़ा गांव सड़क से जुड़ने का सपना आज भी देख रहा है। हमने कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों को लिखा लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। उम्मीद है कि इस घटना के बाद सरकार जल्द से जल्द सड़क का निर्माण करेगी। - रवींद्र रावत, बकोड़ा, नव निर्वाचित, ग्राम प्रधान
-- -- -
मंच बकोड़ा सड़क का निर्माण कार्य पीएमजीएसवाई करेगी। पूर्व में भूमि मिली थी लेकिन भारत सरकार की आपत्ति के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया। सड़क का सर्वे पूर्व में किया जा चुका है। - मोहन पलड़िया, ईई, लोनिवि, चंपावत
--
मंच बकोड़ा सड़क का लोनिवि और पीएमजीएसवाई के अधिकारी संयुक्त निरीक्षण किया जाना है। वर्तमान में सड़क लोनिवि के पास ही है। चुनाव की वजह से निरीक्षण नहीं हो पाया था। निरीक्षण के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। - त्रिभुवन सिंह बिष्ट, ईई, पीएमजीएसवाई, चंपावत
-- -- -
बीमार पूरन सिंह को कुर्सी की डोली से उपचार के लिए लाए
चंपावत। ग्राम पंचायत भंडार बोरा रौकुंवर के बीमार को डोली से लोग सड़क तक लाए। रविवार को 65 वर्षीय पूरन सिंह को सांस लेने में समस्या हो रही थी। सोमवार 11 अगस्त को ग्रामीण उन्हें इलाज के लिए डोली से बारिश के बीच सड़क तक लाए। गांव में सड़क नहीं होने के कारण मरीज को कुर्सी से बनाई डोली के सहारे छह किमी पैदल सड़क तक लाए। इसके बाद टैक्सी से सितारगंज ले गए। संवाद
विज्ञापन
मंगलवार सुबह गांव की 65 वर्षीय कलावती देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें बुखार और खांसी की समस्या थी। गांव में कोई स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें जिला मुख्यालय ले जाने का फैसला लिया। गांव के युवाओं ने एक डंडे पर कपड़ा बांधकर डोली तैयार की और बुजुर्ग महिला 15 किमी दूर मंच तक पैदल लेकर आए। ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे रास्तों से गुजरते हुए युवाओं ने चार घंटे से ज्यादा समय मंच पहुंचने में लगा। फिर वाहन से 32 किमी का सफर कर चंपावत में निजी अस्पताल में महिला को दिखाया।
विज्ञापन
सड़क नहीं होने से मूलभूत सुविधाओं की कमी
विकास के वादों के बीच भी बकोड़ा गांव अब तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। डोली वाले मनीष बोहरा, प्रकाश बोहरा, राहुल बोहरा, मनोज, विनोद, नरेंद्र, दयाल और विकास ने कहा कि सीएम को समस्या का संज्ञान लेना चाहिए। सड़क का न होना ग्राम पंचायत की करीब 400 की आबादी के लिए मुसीबत बना हुआ है।
विज्ञापन
हमारी सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। अगर सड़क होती तो कलावती देवी को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। चार घंटे तक ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर डोली उठाना आसान नहीं थालेकिन मजबूरी में हमें ऐसा करना पड़ा। - महेंद्र रावत, पूर्व ग्राम प्रधान बकोड़ा
बकोड़ा गांव सड़क से जुड़ने का सपना आज भी देख रहा है। हमने कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों को लिखा लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। उम्मीद है कि इस घटना के बाद सरकार जल्द से जल्द सड़क का निर्माण करेगी। - रवींद्र रावत, बकोड़ा, नव निर्वाचित, ग्राम प्रधान
मंच बकोड़ा सड़क का निर्माण कार्य पीएमजीएसवाई करेगी। पूर्व में भूमि मिली थी लेकिन भारत सरकार की आपत्ति के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया। सड़क का सर्वे पूर्व में किया जा चुका है। - मोहन पलड़िया, ईई, लोनिवि, चंपावत
मंच बकोड़ा सड़क का लोनिवि और पीएमजीएसवाई के अधिकारी संयुक्त निरीक्षण किया जाना है। वर्तमान में सड़क लोनिवि के पास ही है। चुनाव की वजह से निरीक्षण नहीं हो पाया था। निरीक्षण के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। - त्रिभुवन सिंह बिष्ट, ईई, पीएमजीएसवाई, चंपावत
बीमार पूरन सिंह को कुर्सी की डोली से उपचार के लिए लाए
चंपावत। ग्राम पंचायत भंडार बोरा रौकुंवर के बीमार को डोली से लोग सड़क तक लाए। रविवार को 65 वर्षीय पूरन सिंह को सांस लेने में समस्या हो रही थी। सोमवार 11 अगस्त को ग्रामीण उन्हें इलाज के लिए डोली से बारिश के बीच सड़क तक लाए। गांव में सड़क नहीं होने के कारण मरीज को कुर्सी से बनाई डोली के सहारे छह किमी पैदल सड़क तक लाए। इसके बाद टैक्सी से सितारगंज ले गए। संवाद