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लोहाघाट हवालात के शौचालय में कैदी ने लटक कर जान दी
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लोहाघाट बंदीगृह में आत्महत्या करने वाला कैदी जितेंद्र। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट बंदीगृह के शौचालय में एक विचाराधीन बंदी का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है। यह विचाराधीन बंदी पिछले 14 दिन से बनबसा की एक किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में बंदीगृह में बंद था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए उप जिला अस्पताल भेज दिया है। डीएम एसएन पांडेय ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के खेड़ा कश्मीर गांव निवासी जितेंद्र (22) पर एक किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा। आरोपी बनबसा में रह रहा था और रंगाई-पुताई का काम करता था। किशोरी की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद बनबसा पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन से किशोरी को जितेंद्र के बनबसा स्थित घर से बरामद किया। किशोरी की बरामदगी के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अदालत के आदेश से आरोपी 12 जनवरी से लोहाघाट बंदीगृह में था। बंदीगृह प्रभारी हरीश गहतोड़ी ने बताया कि मंगलवार सुबह जितेंद्र शौचालय गया और काफी देर तक लौटा नहीं। दरवाजे को तोड़ने पर वह बल्ली के सहारे हुड की डोरी के फंदे पर लटका मिला। जानकारी मिलने पर एसडीएम आरसी गौतम और सीओ ध्यान सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार बंदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए उप जिला अस्पताल भेज दिया है। बंदी के परिजनों के आने के बाद डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा।
दो साल पहले हृदयाघात से हो चुकी है एक कैदी की मौत
लोहाघाट बंदीगृह में दो साल पहले भी एक कैदी की मौत हो चुकी है। बंदीगृह प्रशासन के मुताबिक 20 जनवरी 2019 को बरेली निवासी एक कैदी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी।
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बंदीगृह की चार बैरकों में हैं 58 कैदी
आठ दशक पुराने इस बंदीगृह में जगह की कमी से कोरोना काल में भी सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो पा रहा है। जिला जेल न होने से यहां के सामान्य कैदियों को लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है। चार बैरक वाले लोहाघाट बंदीगृह में इस वक्त छह महिलाओं समेत कुल 58 कैदी और बंदी हैं। तीन बैरकों में 52 पुरुष कैदी रह रहे हैं।
2.22 करोड़ खर्च हुए लेकिन लटकी है जिला जेल
निर्माणाधीन जिला जेल की जगह को बदलने की हो रही मांग
विधायक भी लोगों की मांग के साथ लेकिन प्रशासन पसोपेश में
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। जिला जेल न होने से लोहाघाट के पुराने बंदीगृह में कैदियों को रखने की मजबूरी है। 2008 से शुरू हुआ चंपावत की जिला जेल का निर्माण कार्य 2.22 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी लटका है। जेल के नाम पर अब तक सिर्फ चहारदीवारी ही बन सकी है।
अब जेल स्थल को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। गोरलचौड़ मैदान के पास शुरू जेल भवन में चहारदीवारी पर 1.22 करोड़ रुपये के अलावा एक करोड़ रुपये जमीन का मुआवजा देने में खर्च हो चुके हैं। लेकिन 2012 से धन न मिलने से काम ठप है। जेल भवन के लिए 15 करोड़ रुपये बजट की शासन से मांग की गई थी, लेकिन ये रकम मिली नहीं। जेल भवन का निर्माण कार्य अधर में लटका है। इधर जेल की जगह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति का कहना है कि जेल का नगर के बीच होना उचित नहीं है। इधर, डीएम एसएन पांडेय का कहना है कि जिला जेल भवन की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन के निर्देश जैसे होंगे उसके अनुरूप कार्य कराया जाएगा।
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उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के खेड़ा कश्मीर गांव निवासी जितेंद्र (22) पर एक किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा। आरोपी बनबसा में रह रहा था और रंगाई-पुताई का काम करता था। किशोरी की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद बनबसा पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन से किशोरी को जितेंद्र के बनबसा स्थित घर से बरामद किया। किशोरी की बरामदगी के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अदालत के आदेश से आरोपी 12 जनवरी से लोहाघाट बंदीगृह में था। बंदीगृह प्रभारी हरीश गहतोड़ी ने बताया कि मंगलवार सुबह जितेंद्र शौचालय गया और काफी देर तक लौटा नहीं। दरवाजे को तोड़ने पर वह बल्ली के सहारे हुड की डोरी के फंदे पर लटका मिला। जानकारी मिलने पर एसडीएम आरसी गौतम और सीओ ध्यान सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार बंदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए उप जिला अस्पताल भेज दिया है। बंदी के परिजनों के आने के बाद डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा।
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दो साल पहले हृदयाघात से हो चुकी है एक कैदी की मौत
लोहाघाट बंदीगृह में दो साल पहले भी एक कैदी की मौत हो चुकी है। बंदीगृह प्रशासन के मुताबिक 20 जनवरी 2019 को बरेली निवासी एक कैदी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी।
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बंदीगृह की चार बैरकों में हैं 58 कैदी
आठ दशक पुराने इस बंदीगृह में जगह की कमी से कोरोना काल में भी सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो पा रहा है। जिला जेल न होने से यहां के सामान्य कैदियों को लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है। चार बैरक वाले लोहाघाट बंदीगृह में इस वक्त छह महिलाओं समेत कुल 58 कैदी और बंदी हैं। तीन बैरकों में 52 पुरुष कैदी रह रहे हैं।
2.22 करोड़ खर्च हुए लेकिन लटकी है जिला जेल
निर्माणाधीन जिला जेल की जगह को बदलने की हो रही मांग
विधायक भी लोगों की मांग के साथ लेकिन प्रशासन पसोपेश में
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। जिला जेल न होने से लोहाघाट के पुराने बंदीगृह में कैदियों को रखने की मजबूरी है। 2008 से शुरू हुआ चंपावत की जिला जेल का निर्माण कार्य 2.22 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी लटका है। जेल के नाम पर अब तक सिर्फ चहारदीवारी ही बन सकी है।
अब जेल स्थल को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। गोरलचौड़ मैदान के पास शुरू जेल भवन में चहारदीवारी पर 1.22 करोड़ रुपये के अलावा एक करोड़ रुपये जमीन का मुआवजा देने में खर्च हो चुके हैं। लेकिन 2012 से धन न मिलने से काम ठप है। जेल भवन के लिए 15 करोड़ रुपये बजट की शासन से मांग की गई थी, लेकिन ये रकम मिली नहीं। जेल भवन का निर्माण कार्य अधर में लटका है। इधर जेल की जगह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति का कहना है कि जेल का नगर के बीच होना उचित नहीं है। इधर, डीएम एसएन पांडेय का कहना है कि जिला जेल भवन की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन के निर्देश जैसे होंगे उसके अनुरूप कार्य कराया जाएगा।

लोहाघाट का न्यायिक बंदीगृह।- फोटो : CHAMPAWAT