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पारंपरिक खेती की बढ़ी चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Wed, 25 Nov 2015 12:25 AM IST
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रासायनिक खादों का प्रयोग करने, समय से वर्षा न होने, जंगली जानवरों के खेती को नुकसान पहुंचाने से यहां की पारंपरिक मंडुवे की खेती घट गई है। यह खुलासा जीआईसी दिगालीचौड़ रसायन विज्ञान प्रवक्ता डॉ. सुधाकर जोशी के मार्गदर्शन में बाल वैज्ञानिक रवीश ने अपने शोध में किया है।
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उनके लघु शोध प्रबंध को प्रांतीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयन किया गया है। शोध में कहा गया है कि मानाढुंगा, बांकू, चौंडला, फांफर, बलाना आदि गांवों में व्यापक स्तर पर मंडुवे की खेती होती थी। इन गांवों में प्रतिवर्ष मंडुवे के उत्पादन में कमी आती जा रही है। पांच सदस्यीय दल में पुनीत सिंह, तारा सिंह, देवशीष, भुवन कोहली भी शामिल हैं।
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जिन्हें प्रधानाचार्य गोपाल राम की अध्यक्षता, ब्रजेश ढेक के संचालन में हुए समारोह में सम्मानित किया गया। एचडी राम, आरएस राम, एपी सिंह, रमेश रावल, अश्विनी मौर्य, धर्मेंद्र राणा, पीडी मुरारी, अनिल पचौली, गणेश पंत, कमलेश जोशी, जगदीश जोशी, नवीन भट्ट, आशा पंत, ललिता वर्मा, नवीन उप्रेती, एनडी जोशी ने बाल वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दी।
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