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आवाज सुनने के लिए मोहताज लोगों की व्यथा... सुनने वालों ने कान बंद कर दिए
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बाराकोट में आयोजित दिव्यांग शिविर में प्रमाणपत्र बनवाते दिव्यांग।
- फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। वे सुन नहीं सकते। समझने और समझाने में भी दिक्कत होती है। अपना दर्द बांटना चाहते हैं। अपना हक पाना चाहते हैं। जहां आशा की किरण दिखाई देनी थी वहां के लिए कोई 10 से 12 किमी जीप में किराया देकर पहुंचा तो किसी ने पैदल ही यह दूरी नाप ली। इसके बावजूद उनकी न सुनी गई न ही उनकी भावनाओं को समझा गया।
यह दर्द है दिव्यांगों का, जो बृहस्पतिवार को एल्मिको कानपुर के सहयोग से समाज कल्याण विभाग की ओर से बाराकोट में आयोजित दिव्यांग शिविर में पहुुंचे थे। शिविर में ईएनटी (नाक, कान गला) सर्जन और मानसिक रोग विशेषज्ञ के न पहुंचने से उनके प्रमाणपत्र ही नहीं बन पाए। करीब पांच घंटे तक इंतजार करने के बाद उन्हें घर लौटना पड़ा।
लोगों में इसे लेकर नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि बुधवार को लोहाघाट में आयोजित शिविर में पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने का हवाला देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों के न आने की बात कही गई थी। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग खुलने के बावजूद उनका न पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। संवाद
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कुछ के बने प्रमाणपत्र
जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत ने बताया कि शिविर में स्वास्थ्य विभाग ने 10 दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए। समाज कल्याण विभाग ने 10 यूडीआईडी फार्म भरे। एल्मिको संस्था ने 69 दिव्यांगों और वरिष्ठजनों को सहायक उपकरण के लिए चयनित किया।
पिथौरागढ़ के सीएमओ को पत्र लिखकर लोहाघाट और बाराकोट में आयोजित होने वाले शिविरों में ईएनटी सर्जन और मानसिक रोग विशेषज्ञ को भेजने का आग्रह किया था। समाज कल्याण विभाग को इनके नंबर भी दिए थे लेकिन लोहाघाट और बाराकोट में डॉक्टर नहीं पहुंच पाए।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ चंपावत।
ये रहे मौजूद
शिविर का शुभारंभ पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुर फर्त्याल ने किया। इस मौके पर बीडीओ बसंत बल्लभ जोशी, बाल कल्याण समिति सदस्य राजू गड़कोटी, ग्राम प्रधान राजू अधिकारी, एडीओ समाज कल्याण एमडी भट्ट, एसीएमओ डॉ. इंद्रजीत पांडेय, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.एचएस ऐरी, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विराज राठी, चिकित्साधीक्षक डॉ. मंजीत सिंह, आदि मौजूद रहे।
ग्राम प्रधान संगठन ने जताई नाराजगी
लोहाघाट (चंपावत)। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष राजू अधिकारी ने कहा कि जिले में ईएनटी और मानसिक रोग चिकित्सक न होने से दिव्यांगों को प्रमाणपत्र बनाने के लिए हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद
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यह दर्द है दिव्यांगों का, जो बृहस्पतिवार को एल्मिको कानपुर के सहयोग से समाज कल्याण विभाग की ओर से बाराकोट में आयोजित दिव्यांग शिविर में पहुुंचे थे। शिविर में ईएनटी (नाक, कान गला) सर्जन और मानसिक रोग विशेषज्ञ के न पहुंचने से उनके प्रमाणपत्र ही नहीं बन पाए। करीब पांच घंटे तक इंतजार करने के बाद उन्हें घर लौटना पड़ा।
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लोगों में इसे लेकर नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि बुधवार को लोहाघाट में आयोजित शिविर में पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने का हवाला देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों के न आने की बात कही गई थी। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग खुलने के बावजूद उनका न पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। संवाद
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कुछ के बने प्रमाणपत्र
जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत ने बताया कि शिविर में स्वास्थ्य विभाग ने 10 दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए। समाज कल्याण विभाग ने 10 यूडीआईडी फार्म भरे। एल्मिको संस्था ने 69 दिव्यांगों और वरिष्ठजनों को सहायक उपकरण के लिए चयनित किया।
पिथौरागढ़ के सीएमओ को पत्र लिखकर लोहाघाट और बाराकोट में आयोजित होने वाले शिविरों में ईएनटी सर्जन और मानसिक रोग विशेषज्ञ को भेजने का आग्रह किया था। समाज कल्याण विभाग को इनके नंबर भी दिए थे लेकिन लोहाघाट और बाराकोट में डॉक्टर नहीं पहुंच पाए।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ चंपावत।
ये रहे मौजूद
शिविर का शुभारंभ पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुर फर्त्याल ने किया। इस मौके पर बीडीओ बसंत बल्लभ जोशी, बाल कल्याण समिति सदस्य राजू गड़कोटी, ग्राम प्रधान राजू अधिकारी, एडीओ समाज कल्याण एमडी भट्ट, एसीएमओ डॉ. इंद्रजीत पांडेय, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.एचएस ऐरी, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विराज राठी, चिकित्साधीक्षक डॉ. मंजीत सिंह, आदि मौजूद रहे।
ग्राम प्रधान संगठन ने जताई नाराजगी
लोहाघाट (चंपावत)। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष राजू अधिकारी ने कहा कि जिले में ईएनटी और मानसिक रोग चिकित्सक न होने से दिव्यांगों को प्रमाणपत्र बनाने के लिए हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद