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वनरावत की पूरी हुई 67 साल पुरानी तमन्ना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 22 Nov 2015 10:37 PM IST
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101 साल की उम्र पार कर चुके वनरावत दान सिंह रजवाड़ अब बेहद खुश हैं। 1871 से शुरू जौलजीबी मेले को देखने की उनकी 67 साल पुरानी तमन्ना पूरी हुई है। इस काम में मददगार बनी उनकी ग्राम पंचायत। इस याद को संजोने के लिए उन्होंने भारत-नेपाल को जोड़ने वाले पुल में खड़े होकर तस्वीर भी खिंचवाई।
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मूल रूप से गानागांव (जौलजीबी) निवासी बुजुर्ग दान सिंह रजवाड़ आजादी के एक साल बाद 1948 में चंपावत जिले के खिरद्वारी में आकर बस गए। हालांकि, 1947 तक वे लगातार मेले का लुत्फ उठाते रहे, मगर गानागांव छोड़ने के बाद से वे मेले में नहीं जा सके। लंबे समय से मेले में जाने की उनकी इच्छा थी, लेकिन धन की कमी सहित दूसरे कारणों से वे इसे मूर्त रूप नहीं दे सके। इस बार पोथ की प्रधान लक्ष्मी देवी की पहल से उनकी यह इच्छा पूरी हुई। उन्होंने न केवल मेले में जाने का खर्चा उठाया, बल्कि आने-जाने की व्यवस्था की।
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18 नवंबर से शुरू उनकी यह यात्रा 22 नवंबर को पूरी हुई। दान सिंह का कहना है कि 1947 से पहले जौलजीबी के मेले में मुट्ठीभर आते थे। व्यापारिक गतिविधियों में परंपरागत वस्तुओं की खूब आमद थी। हुमला और जुमला के घोड़े तब बहुतायत में बिकते थे पर अब घोड़े कम दिख रहे हैं। जौलजीबी में दान सिंह की मुलाकात दो बार विधायक रहे भांजे गगन सिंह से हुई। बुजुर्ग दान सिंह के साथ वनरावत चंदन सिंह रावत और कलावती देवी भी थी।
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