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कृषि सुधार के नाम पर जारी अध्यादेशों से खुश नहीं काश्तकार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2020 10:45 PM IST
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Tenants not happy with the ordinances issued in the name of agricultural reform
चंपावत के सूखीढांग क्षेत्र में अदरक की खेती। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना काल में कारोबार में मचे कोहराम के बीच खेती ने उम्मीद जगाई है। 2020-21 के वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में सिर्फ कृषि की विकास दर तीन फीसदी से बढ़कर 3.40 प्रतिशत रही है। पर जून में केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन अध्यादेशों से किसान आशंकित हैं। इन अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने के लिए बृहस्पतिवार को लोकसभा ने विधेयक पास भी कर दिया। इस अध्यादेश और विधेयक की ज्यादातर काश्तकारों को जानकारी तक नहीं है, जो गिनेचुने खेतिहर इसे समझ रहे हैं, वे इसे लागू करने के हिमायती नहीं हैं। कहते हैं कि ऐसे कृषि सुधारों से तो बेहतर है कि मौजूदा व्यवस्था ही बनी रहे।
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चंपावत जिले के 39,347 किसान परिवार करीब 28 हजार हेक्टेयर में खेती करते हैं। इनमें से 36,399 (92.50 प्रतिशत) दो हेक्टेयर या इससे कम कृषि जोत वाले काश्तकार हैं। मैदानी क्षेत्र में गेहूं, धान और पहाड़ में मडुवा, गहत, मक्का, दलहन, सिटरस फल आदि की बहुतायत में खेती होती है। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती का कहना है कि इन फसलों की विपणन व्यवस्था मुख्य रूप से टनकपुर मंडी समिति के जरिये होती है। गेहूं और धान की किसानों से खरीद के लिए विपणन केंद्र खोले जाते हैं ताकि किसानों को बिचौलियों से निजात मिलने के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी मिल जाता है। पर वर्तमान अध्यादेशों के कानून में बदलने से किसान चिंतित है और भविष्य के लिए खतरनाक भी मान रहे हैं।
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तीन अध्यादेशों के मुख्य प्रावधान:
1. कृषि उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य संशोधन: मंडी के अलावा मंडी से बाहर कहीं भी फसल को बेचने-खरीदने की छूट मिलेगी। मंडी परिसर में फसल खरीदने पर व्यापारी या आढ़ती को मंडी शुल्क देना पड़ता है। लेकिन मंडी से बाहर खरीदने पर इस शुल्क को नहीं देना होगा।
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2. मूल्य आश्वासन पर किसान समझौता कृषि संघ: कांट्रेक्ट फार्मिंग की राह खुलेगी। इससे बड़े कारोबारी खेती वाली जमीन को ले सकेंगे।
3. आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन: व्यापारी के संग्रहण की लिमिट खत्म हो जाएगी।
लोगों की राय
तीन अध्यादेश में से किसी में भी मंडी के बाहर बेचे जाने पर एमएसपी की स्पष्टता नहीं है। अध्यादेश से किसान को झटका लगेगा ही, मंडी समितियों का भविष्य भी खतरे में पड़ेगा। - पुष्कर कापड़ी, किसान व जिला पंचायत सदस्य, बनबसा।
इन अध्यादेशों के कानून बनने से बिचौलियों का बोलबाला बढ़ जाएगा। कालाबाजारी और जमाखोरी को भी बढ़ावा मिलेगा। एमएसपी से कम दाम न मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं है। - सेवानिवृत्त कैप्टन वीरेंद्र रजवार, किसान, बनबसा।
अगर सच में ये अध्यादेश किसानों के लिए हितकारी है, तो इन्हें गुपचुप तरीके से लाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्यों एनडीए की सहयोगी अकाली दल की कैबिनेट मंत्री ने इसके विरोध में इस्तीफा दिया? दाल में जरूर कुछ काला लगता है। - पूरन रावत, किसान, सल्ली, चंपावत।

कृषि सुधार के नाम पर लाए गए अध्यादेशों में खेती किसानों के हाथ से निकलकर पूंजीपतियों के कब्जे में चले जाएगी। इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का भी संकट आ जाएगा। - रघुवर मुरारी, प्रगतिशील काश्तकार, भेटी, लोहाघाट।
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