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मां पूर्णागिरि धाम पहुंची जूना अखाड़ा की छड़ी यात्रा, मंदिर समिति ने किया स्वागत
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मां पूर्णागिरि धाम में जूना अखाड़े की छड़ी यात्रा में शामिल संतों का स्वागत करते मंदिर समिति अध्?
- फोटो : TANAKPUR
टनकपुर (चंपावत)। सनातन धर्म का संदेश लेकर हरिद्वार से शुरू हुई जूना अखाड़ा की छड़ी यात्रा शुक्रवार को उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन के लिए पहुंची। यात्रा में शामिल संतों का मंदिर समिति ने काली मंदिर स्थित समिति कार्यालय में जोरदार स्वागत किया। संतों ने धाम की व्यवस्थाओं की सराहना कर मंदिर समिति से श्रद्धालुओं की सेवा को सर्वोपरि सेवा मानते हुए कार्य करने की सलाह दी है।
हरिद्वार के माया मंदिर से शुरू हुई जूना अखाड़ा के अध्यक्ष प्रेम गिरी महाराज के नेतृत्व में मां पूर्णागिरि धाम पहुंची छड़ी यात्रा में शामिल करीब 60 संतों का दल शुक्रवार की दोपहर मां पूर्णागिरि धाम पहुंचा। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. किशन तिवारी, उपाध्यक्ष नीरज पांडेय, सचिव सुरेश तिवारी, कोषाध्यक्ष नवीन तिवारी समेत मोहन चंद्र पांडेय, महेश चंद्र पांडेय, भैरव पांडेय, प्रकाश पांडेय उर्फ पीपी आदि लोगों ने जोरदार स्वागत किया।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे संत प्रेम गिरी महाराज ने बताया कि यह यात्रा ऋषिकेश, देहरादून, मसूरी, लाखा मंडल, बड़कोट, यमुनोत्री, उत्तरकाशी, गंगोत्री, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, सोनप्रयाग, केदारनाथ, गुप्तकाशी, उखीमठ, चमोली, जोशीमठ, बद्रीनाथ, लक्ष्मण कुंड, कर्णप्रयाग, बैजनाथ, कौसानी, बागेश्वर, जागेश्वर से गेठिया होकर मां पूर्णागिरि धाम पहुंची। यहां पहुंचने पर प्रशासन और धाम के पुजारियों ने संतों का स्वागत किया। महंत प्रेम गिरी महराज ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म का संदेश देना है।
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हरिद्वार के माया मंदिर से शुरू हुई जूना अखाड़ा के अध्यक्ष प्रेम गिरी महाराज के नेतृत्व में मां पूर्णागिरि धाम पहुंची छड़ी यात्रा में शामिल करीब 60 संतों का दल शुक्रवार की दोपहर मां पूर्णागिरि धाम पहुंचा। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. किशन तिवारी, उपाध्यक्ष नीरज पांडेय, सचिव सुरेश तिवारी, कोषाध्यक्ष नवीन तिवारी समेत मोहन चंद्र पांडेय, महेश चंद्र पांडेय, भैरव पांडेय, प्रकाश पांडेय उर्फ पीपी आदि लोगों ने जोरदार स्वागत किया।
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यात्रा का नेतृत्व कर रहे संत प्रेम गिरी महाराज ने बताया कि यह यात्रा ऋषिकेश, देहरादून, मसूरी, लाखा मंडल, बड़कोट, यमुनोत्री, उत्तरकाशी, गंगोत्री, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, सोनप्रयाग, केदारनाथ, गुप्तकाशी, उखीमठ, चमोली, जोशीमठ, बद्रीनाथ, लक्ष्मण कुंड, कर्णप्रयाग, बैजनाथ, कौसानी, बागेश्वर, जागेश्वर से गेठिया होकर मां पूर्णागिरि धाम पहुंची। यहां पहुंचने पर प्रशासन और धाम के पुजारियों ने संतों का स्वागत किया। महंत प्रेम गिरी महराज ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म का संदेश देना है।
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