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ईओ को आचार संहिता उल्लंघन का दोषी पाया गया
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चंपावत नगर पालिका में आदर्श आचार संहिता की अवधि में निर्माण कार्यों के लिए हुए टेंडर और भुगतान के मामले की जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। एडीएम टीएस मर्तोलिया की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने अधिशासी अधिकारी को आचार संहिता उल्लंघन का दोषी पाया है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कहा अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट को शासन को भेजी जाएगी।
पिछले साल 15 अक्तूबर से 20 नवंबर तक नगर निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में आचार संहिता लागू थी। आचार संहिता से पहले पालिका के पास विकास कार्यों का करीब 3.66 करोड़ रुपये का बजट था। इसमें से ज्यादातर का उपयोग इस अवधि में हुआ है। डीएम ने इस साल मई में जांच के लिए एडीएम, मुख्य कोषाधिकारी हेमेंद्र गंगवार और राजकीय निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके जोशी की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
कमेटी ने दस्तावेजों के अलावा निर्माण कार्यों और तकनीकी पहलुओं की जांच की। एडीएम मर्तोलिया ने बताया कि ईओ को आचार संहिता के दौरान निर्माण कराने सहित कई अनियमितताओं, कई टेंडरों में अधिक दाम में सामग्री खरीदने, जीएसटी सहित रेट न देकर वित्तीय नुकसान हुआ है। इस मामले को लेकर इस माह के शुरू में पूर्व चेयरमैन प्रकाश तिवारी ने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की थी। वहीं ईओ अभिनव कुमार का कहना है कि उन्हें जो भी कहना होगा, वे लिखित रूप से अपना पक्ष रखेंगे।
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आचार संहिता के दौरान बड़े पैमाने पर हुए थे काम
चंपावत। निकाय चुनाव की आचार संहिता के दौरान पालिका में कई काम कराए गए। आरटीआई में मांगी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ था कि पालिका ने 70 कार्यों के लिए 10 अक्तूबर को निविदा आमंत्रित की।
23 अक्तूबर को टेंडर खोले और 16 नवंबर को इन निर्माण कार्यों का भुगतान भी ठेकेदारों को कर दिया गया। इसके अलावा 20 कार्यों की निविदा के विज्ञापन में भी गड़बड़ी की गई। राज्य वित्त के कई कामों को सिलेक्शन बांड से कराया गया। स्ट्रीट लाइट और वाहन भी महंगे दाम पर खरीदने के आरोप लगे।
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पिछले साल 15 अक्तूबर से 20 नवंबर तक नगर निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में आचार संहिता लागू थी। आचार संहिता से पहले पालिका के पास विकास कार्यों का करीब 3.66 करोड़ रुपये का बजट था। इसमें से ज्यादातर का उपयोग इस अवधि में हुआ है। डीएम ने इस साल मई में जांच के लिए एडीएम, मुख्य कोषाधिकारी हेमेंद्र गंगवार और राजकीय निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके जोशी की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
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कमेटी ने दस्तावेजों के अलावा निर्माण कार्यों और तकनीकी पहलुओं की जांच की। एडीएम मर्तोलिया ने बताया कि ईओ को आचार संहिता के दौरान निर्माण कराने सहित कई अनियमितताओं, कई टेंडरों में अधिक दाम में सामग्री खरीदने, जीएसटी सहित रेट न देकर वित्तीय नुकसान हुआ है। इस मामले को लेकर इस माह के शुरू में पूर्व चेयरमैन प्रकाश तिवारी ने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की थी। वहीं ईओ अभिनव कुमार का कहना है कि उन्हें जो भी कहना होगा, वे लिखित रूप से अपना पक्ष रखेंगे।
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आचार संहिता के दौरान बड़े पैमाने पर हुए थे काम
चंपावत। निकाय चुनाव की आचार संहिता के दौरान पालिका में कई काम कराए गए। आरटीआई में मांगी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ था कि पालिका ने 70 कार्यों के लिए 10 अक्तूबर को निविदा आमंत्रित की।
23 अक्तूबर को टेंडर खोले और 16 नवंबर को इन निर्माण कार्यों का भुगतान भी ठेकेदारों को कर दिया गया। इसके अलावा 20 कार्यों की निविदा के विज्ञापन में भी गड़बड़ी की गई। राज्य वित्त के कई कामों को सिलेक्शन बांड से कराया गया। स्ट्रीट लाइट और वाहन भी महंगे दाम पर खरीदने के आरोप लगे।