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भिंगराड़ा जीआईसी के छात्रों के बालों पर चला दी कैंची
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भिंगराड़ा जीआईसी में बुधवार को कुछ शिक्षकों के हाथ में बुधवार को किताब-कलम के बजाय कैंची थी। स्कूल में 30 से 40 छात्रों के बाल काट दिए गए। इन छात्रों के बाल लंबे होने की दलील दे उन्होंने यह कदम उठाया। इससे अभिभावकों में गुस्सा है। उन्होंने मामले को उच्चाधिकारियों के सम्मुख उठाने की बात कही है।
अभिभावकों का कहना है कि बुधवार को जीआईसी के एक शिक्षक ने छात्रों के लंबे बाल होने की दलील दे आनन-फानन में बाल काट डाले। बताया गया कि बाल कटने के दौरान कई छात्र डरे-सहमे भी थे। स्कूल के अवकाश के बाद घर पहुंचकर कुछ छात्रों ने परिजनों को इस घटनाक्रम की जानकारी दी तो अभिभावकों ने इस पर नाराजगी जताई।
उनका कहना था कि ज्यादातर छात्रों के बाल लंबे नहीं थे। अगर ऐसा करना जरूरी भी था तो शिक्षकों को खुद बाल काटने के बजाय अभिभावकों से छात्रों के बाल कटवाने के लिए कहना चाहिए था, जबकि दूसरी तरफ बाल काटने वाले शिक्षक का कहना है कि उन्होंने गलत मंशा से कार्य नहीं किया है। उन्होंने अनुशासन बनाने और छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने लिए प्रेरित करने के लिए ये कदम उठाया है।
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वहीं प्रधानाचार्य अभिषेक श्रीवास्तव का कहना है कि वह अवकाश पर थे। उन्होंने माना कि स्कूल परिसर में बाल काटे गए हैं। कहा कि पूर्व में अभिभावक संघ की बैठक में लंबे बाल के लिए छात्रों को मना किया गया था।
मैं धूरा के बहुउद्देश्यीय शिविर में गया था। अभी यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। प्रधानाचार्य से पूरे प्रकरण की जानकारी लेने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
छात्रों का अनुरोध भी ठुकराया
चंपावत। जीआईसी भिंगराड़ा के कई छात्रों ने शिक्षक से बाल नहीं काटने का अनुरोध करते हुए अगले दिन बाल कटवाकर आने की बात कही। कुछ अभिभावकों ने बताया कि छात्रों ने यहां तक कहा कि अगर स्कूल में ही बाल काटना जरूरी है तो वे आपस में ही एक-दूसरे के बाल काट लेंगे। मगर इस आग्रह को भी नहीं माना गया।
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अभिभावकों का कहना है कि बुधवार को जीआईसी के एक शिक्षक ने छात्रों के लंबे बाल होने की दलील दे आनन-फानन में बाल काट डाले। बताया गया कि बाल कटने के दौरान कई छात्र डरे-सहमे भी थे। स्कूल के अवकाश के बाद घर पहुंचकर कुछ छात्रों ने परिजनों को इस घटनाक्रम की जानकारी दी तो अभिभावकों ने इस पर नाराजगी जताई।
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उनका कहना था कि ज्यादातर छात्रों के बाल लंबे नहीं थे। अगर ऐसा करना जरूरी भी था तो शिक्षकों को खुद बाल काटने के बजाय अभिभावकों से छात्रों के बाल कटवाने के लिए कहना चाहिए था, जबकि दूसरी तरफ बाल काटने वाले शिक्षक का कहना है कि उन्होंने गलत मंशा से कार्य नहीं किया है। उन्होंने अनुशासन बनाने और छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने लिए प्रेरित करने के लिए ये कदम उठाया है।
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वहीं प्रधानाचार्य अभिषेक श्रीवास्तव का कहना है कि वह अवकाश पर थे। उन्होंने माना कि स्कूल परिसर में बाल काटे गए हैं। कहा कि पूर्व में अभिभावक संघ की बैठक में लंबे बाल के लिए छात्रों को मना किया गया था।
मैं धूरा के बहुउद्देश्यीय शिविर में गया था। अभी यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। प्रधानाचार्य से पूरे प्रकरण की जानकारी लेने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
छात्रों का अनुरोध भी ठुकराया
चंपावत। जीआईसी भिंगराड़ा के कई छात्रों ने शिक्षक से बाल नहीं काटने का अनुरोध करते हुए अगले दिन बाल कटवाकर आने की बात कही। कुछ अभिभावकों ने बताया कि छात्रों ने यहां तक कहा कि अगर स्कूल में ही बाल काटना जरूरी है तो वे आपस में ही एक-दूसरे के बाल काट लेंगे। मगर इस आग्रह को भी नहीं माना गया।