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सिलिंगटाक चाय बागान में बनेगा टी बुटीक और टी पार्लर
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चंपावत जिला मुख्यालय के सिलिंगटाक में स्थित चाय बागान।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिला मुख्यालय में चाय विकास बोर्ड की ओर से सिलिंगटाक में विकसित चाय बागान को ईको टूरिज्म को जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। जिले में 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन के तहत सिलिंगटाक चाय बागान को ईको टूरिज्म से जोड़ने की योजना को मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल कर लिया गया है। चाय विकास बोर्ड और पर्यटन विभाग की ओर से सिलिंगटाक चाय बागान में टी बुटीक और टी पार्लर का निर्माण किया जाएगा।
जिले में चाय विकास बोर्ड की पहल पर 227.98 हेक्टेयर में चाय बागान विकसित किए जा चुके हैं, जबकि बापरू और कठनौली में क्षेत्र में प्लांटेशन किया जा रहा है। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड वर्क ने बताया कि चाय बागान को ईको टूरिज्म से जोड़ने की योजना को मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल कर लिया गया है। ग्रामीण निर्माण विभाग की ओर से इसकी डीपीआर बनाकर शासन को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि सिलिंगटाक चाय बागान में टी बुटीक में जिले में उत्पादित जैविक सामान बिकेगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए टी पार्लर खोलने के साथ ही सेल्फी प्वाइंट और व्यू प्वाइंट बनाए जाएंगे। बागान के चारों तरफ फेंसिंग की जाएगी। इसमें पर्यटकों के चलने के लिए अलग से मार्ग का निर्माण किया जाएगा, ताकि बागान में आने वाले पर्यटक चाय के पौधों को नुकसान न पहुंचा सकें।
चाय बागानों में 454 श्रमिकों को मिल रही है मजदूरी
चंपावत। जिले के सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मंच दुबड़ जैनल, नरसिंह डांडा, चौकी, सिमल्टा, फुलारागांव, लमाई आदि स्थानों में विकसित किए गए चाय बागानों में 454 श्रमिकों को मजदूरी मिल रही है। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड के अनुसार चाय बागानों में श्रमिकों को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से जोड़ा गया है। संवाद
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जिले में चाय विकास बोर्ड की पहल पर 227.98 हेक्टेयर में चाय बागान विकसित किए जा चुके हैं, जबकि बापरू और कठनौली में क्षेत्र में प्लांटेशन किया जा रहा है। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड वर्क ने बताया कि चाय बागान को ईको टूरिज्म से जोड़ने की योजना को मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल कर लिया गया है। ग्रामीण निर्माण विभाग की ओर से इसकी डीपीआर बनाकर शासन को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि सिलिंगटाक चाय बागान में टी बुटीक में जिले में उत्पादित जैविक सामान बिकेगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए टी पार्लर खोलने के साथ ही सेल्फी प्वाइंट और व्यू प्वाइंट बनाए जाएंगे। बागान के चारों तरफ फेंसिंग की जाएगी। इसमें पर्यटकों के चलने के लिए अलग से मार्ग का निर्माण किया जाएगा, ताकि बागान में आने वाले पर्यटक चाय के पौधों को नुकसान न पहुंचा सकें।
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चाय बागानों में 454 श्रमिकों को मिल रही है मजदूरी
चंपावत। जिले के सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मंच दुबड़ जैनल, नरसिंह डांडा, चौकी, सिमल्टा, फुलारागांव, लमाई आदि स्थानों में विकसित किए गए चाय बागानों में 454 श्रमिकों को मजदूरी मिल रही है। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड के अनुसार चाय बागानों में श्रमिकों को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से जोड़ा गया है। संवाद
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