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कामयाब क्रियान्वयन को हुई कसरत
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Sun, 10 Jun 2018 11:03 PM IST
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लोहाघाट रेंज में जायका परियोजना की बैठक में मौजूद वन अधिकारी व ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड वन संसाधन (जायका) परियोजना के अंतर्गत लोहाघाट रेंज में जायका परियोजना को जमीन पर क्रियान्वित करने का प्रशिक्षण दिया गया। वन क्षेत्राधिकारी दीप जोशी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में प्रशिक्षण को परियोजना की कामयाबी के लिए जरूरी बताया गया। कहा कि इससे परियोजना के सचिव, सरपंच व समन्वयकों की क्षमता बढ़ेगी और बेहतर नतीजे आएंगे। प्रशिक्षण के जरिये कार्यों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के तरीके बताए गए।
वन पंचायतों के सचिवों को परियोजना के निर्माण की बारीकियां बताईं। परियोजना के विपणन विशेषज्ञ चतुर सिंह व प्रदीप तिवारी ने वन पंचायतों को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) का प्रशिक्षण दिया। वन पंचायतों को आय संवर्द्धन समूहों के अलावा आजीविका विकास के कार्यों की जानकारी दी गई। जायका परियोजना के तहत जल संरक्षण सहित विभिन्न वानिकी कार्य कराए जाएंगे। ताकि वन पंचायतें आत्मनिर्भर हो सकें। प्रशिक्षण में गोविंद सिंह, बृजेश सिंह, जनार्दन जोशी, चंद्रशेखर, शेखरानंद सहित सरपंच व सचिव मौजूद थे।
डीएफओ केएस बिष्ट ने बताया कि वनों को समृद्ध करने, चुगान रोकने, पेड़ों का छटान करने, चाल-खाल और चेकडैम व वनों को संरक्षित करने के मकसद से शुरू इस परियोजना के तहत जिले की 52 वन पंचायतों का चयन किया गया है। परियोजना के अंतर्गत एक वन पंचायत में अधिकतम 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाएं जाएंगेे। इसके लिए वन विभाग वन पंचायतों को नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा।
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वन पंचायतों के सचिवों को परियोजना के निर्माण की बारीकियां बताईं। परियोजना के विपणन विशेषज्ञ चतुर सिंह व प्रदीप तिवारी ने वन पंचायतों को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) का प्रशिक्षण दिया। वन पंचायतों को आय संवर्द्धन समूहों के अलावा आजीविका विकास के कार्यों की जानकारी दी गई। जायका परियोजना के तहत जल संरक्षण सहित विभिन्न वानिकी कार्य कराए जाएंगे। ताकि वन पंचायतें आत्मनिर्भर हो सकें। प्रशिक्षण में गोविंद सिंह, बृजेश सिंह, जनार्दन जोशी, चंद्रशेखर, शेखरानंद सहित सरपंच व सचिव मौजूद थे।
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डीएफओ केएस बिष्ट ने बताया कि वनों को समृद्ध करने, चुगान रोकने, पेड़ों का छटान करने, चाल-खाल और चेकडैम व वनों को संरक्षित करने के मकसद से शुरू इस परियोजना के तहत जिले की 52 वन पंचायतों का चयन किया गया है। परियोजना के अंतर्गत एक वन पंचायत में अधिकतम 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाएं जाएंगेे। इसके लिए वन विभाग वन पंचायतों को नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा।
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