{"_id":"5df2771d8ebc3e87eb43c6d1","slug":"students-reached-to-hostel-champawat-news-hld365318954","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढाई साल बाद खुले छात्रावासों के ताले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ढाई साल बाद खुले छात्रावासों के ताले
विज्ञापन
राजकीय पॉलीटेक्निक का हॉस्टल।
- फोटो : LOHAGHAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेयजल किल्लत के चलते जून 2017 से बंद राजकीय पॉलीटेक्निक के छात्रावास के ताले खुल गए हैं। जाड़ों में पानी की समस्या में कुछ कमी आने से छात्रावास खोल दिया गया है। अभी सिर्फ आठ छात्रों ने छात्रावास में प्रवेश लिया है।
पॉलीटेक्निक में पेयजल किल्लत के चलते ढाई साल से यहां के दोनों छात्रावासों (बालक व बालिका छात्रावास) का संचालन बंद कर दिया गया था। तब से छात्र-छात्राएं छात्रावास के बजाय आसपास में कमरे किराए पर लेकर रहने को मजबूर थे।
यह नौबत अगस्त 2016 की बारिश में शंखपाल गधेरे से यहां के लिए बनी पेयजल योजना को हुए नुकसान के कारण आई थी। योजना तो अब भी ठीक नहीं हो सकी लेकिन जाड़ों में पानी की कम जरूरत के चलते इस बार छात्रों ने हॉस्टल में प्रवेश ले लिया है। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में आठ छात्रों ने ही प्रवेश लिया है।
विज्ञापन
फिलहाल पेयजल योजना से छिटपुट पानी और परिसर में लगे हैंडपंप से जरूरत के सापेक्ष 35 प्रतिशत पानी मिल रहा है। पीने के लिए छात्र और कॉलेज स्टाफ के परिवार गधेरे से पानी ला रहे हैं। पॉलीटेक्निक में प्रस्तावित नलकूप के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं होने से पेयजल योजना नहीं बन सकी है।
लंबे अंतराल बाद राजकीय पॉलीटेक्निक का छात्रावास शुरू हो गया है। अभी बालकों के छात्रावास में ही छात्र आना शुरू हुए हैं। बालिकाओं के छात्रावास के लिए अभी आवेदन नहीं आए हैं। पेयजल किल्लत के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन से आग्रह किया जा रहा है। गोविंद बल्लभ थ्वाल, प्रभारी प्राचार्य
विज्ञापन
पॉलीटेक्निक में पेयजल किल्लत के चलते ढाई साल से यहां के दोनों छात्रावासों (बालक व बालिका छात्रावास) का संचालन बंद कर दिया गया था। तब से छात्र-छात्राएं छात्रावास के बजाय आसपास में कमरे किराए पर लेकर रहने को मजबूर थे।
विज्ञापन
यह नौबत अगस्त 2016 की बारिश में शंखपाल गधेरे से यहां के लिए बनी पेयजल योजना को हुए नुकसान के कारण आई थी। योजना तो अब भी ठीक नहीं हो सकी लेकिन जाड़ों में पानी की कम जरूरत के चलते इस बार छात्रों ने हॉस्टल में प्रवेश ले लिया है। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में आठ छात्रों ने ही प्रवेश लिया है।
विज्ञापन
फिलहाल पेयजल योजना से छिटपुट पानी और परिसर में लगे हैंडपंप से जरूरत के सापेक्ष 35 प्रतिशत पानी मिल रहा है। पीने के लिए छात्र और कॉलेज स्टाफ के परिवार गधेरे से पानी ला रहे हैं। पॉलीटेक्निक में प्रस्तावित नलकूप के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं होने से पेयजल योजना नहीं बन सकी है।
लंबे अंतराल बाद राजकीय पॉलीटेक्निक का छात्रावास शुरू हो गया है। अभी बालकों के छात्रावास में ही छात्र आना शुरू हुए हैं। बालिकाओं के छात्रावास के लिए अभी आवेदन नहीं आए हैं। पेयजल किल्लत के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन से आग्रह किया जा रहा है। गोविंद बल्लभ थ्वाल, प्रभारी प्राचार्य