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हरतालिका पर्व पर सामवेदी तिवारियों ने मनाया रक्षा बंधन
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टनकपुर में सामवेदी तिवारी समुदाय के रक्षा बंधन पर्व पर भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध कर मुंह मी?
- फोटो : TANAKPUR
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सामवेदी तिवारी समाज के लोगों ने हरतालिका पर भाई-बहन के प्यार के प्रतिक रक्षा बंधन का पर्व रविवार को मनाया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर रक्षा का वचन लिया वहीं भाइयों ने भी बहनों को रक्षा का वचन देकर उपहार भेंट किए। पुरुषों ने विधि-विधान से नया यज्ञोपवित धारण किया।
मां पूर्णागिरि धाम से जुड़े सामवेदी और कोसमनि शाखा के तिवारी समुदाय का एक वर्ग रक्षा बंधन पर्व के पंद्रह दिन बाद हरतालिका के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाता है। इसके पीछे मान्यताएं है कि ब्रह्मा द्वारा यज्ञोपवित बांटे जाते वक्त इस समुदाय के लोग नहीं पहुंच पाए थे और श्रावणी पूर्णमासी हस्त नक्षत्र का समय समाप्त हो गया।
बाद में हस्त नक्षत्र भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानि हरतालिका के दिन पड़ी तो उन्होंने इसी दिन उपाक्रम कर यज्ञोपवित बदले और रक्षा बंधन पर्व मनाया। तभी से इस समुदाय के लोग हरतालिका के दिन रक्षा बंधन मनाते आ रहे हैं। रविवार को सामवेदी तिवारी समुदाय के लोगों ने हर्षोल्लास से रक्षा बंधन मनाया। सुबह से ही उनके घरों रक्षा बंधन को खासा उत्साह बना रहा।
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पूर्णागिरि बिहारी में राजू तिवारी के आवास पर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ऋषितर्पण में पुरुषों ने नए यज्ञोपवित धारण किए और बहनों ने भाईयों की कलाईयों पर रक्षा सूत्र बांधे।
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मां पूर्णागिरि धाम से जुड़े सामवेदी और कोसमनि शाखा के तिवारी समुदाय का एक वर्ग रक्षा बंधन पर्व के पंद्रह दिन बाद हरतालिका के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाता है। इसके पीछे मान्यताएं है कि ब्रह्मा द्वारा यज्ञोपवित बांटे जाते वक्त इस समुदाय के लोग नहीं पहुंच पाए थे और श्रावणी पूर्णमासी हस्त नक्षत्र का समय समाप्त हो गया।
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बाद में हस्त नक्षत्र भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानि हरतालिका के दिन पड़ी तो उन्होंने इसी दिन उपाक्रम कर यज्ञोपवित बदले और रक्षा बंधन पर्व मनाया। तभी से इस समुदाय के लोग हरतालिका के दिन रक्षा बंधन मनाते आ रहे हैं। रविवार को सामवेदी तिवारी समुदाय के लोगों ने हर्षोल्लास से रक्षा बंधन मनाया। सुबह से ही उनके घरों रक्षा बंधन को खासा उत्साह बना रहा।
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