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तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने के बाद प्रदीप ने बढ़ाए स्वरोजगार की ओर कदम
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लोहाघाट पाटन पाटनी निवासी प्रदीप कुमार मुर्गी व बकरी पालन के जरिए स्वरोजगार की ओर बढाता कदम।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। यदि कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो रास्ते निकल ही आते हैं। ऐसा ही लोहाघाट ब्लॉक के पाटन पाटनी गांव निवासी प्रदीप कुमार ने तकनीकी और उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी मुर्गी पालन, बकरी पालन, पशुपालन का कार्य कर बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार की राह दिखाई है।
वर्ष 2014 में पॉलीटेक्निक एवं वर्ष 2018 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रदीप नौकरी की तलाश में कुछ समय शहरों की ओर गए। जहां उन्हें नौकरी रास नहीं आई, उन्होंने घर लौटकर खेती को आजीविका बनाया। प्रदीप ने धीरे-धीरे मुर्गी पालन, बकरी पालन, पशुपालन का कार्य शुरू कर जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। प्रदीप का कहना है कि शहरों की चकाचौंध की ओर आकर्षित होकर पहाड़ के युवा गांवों से पलायन कर रहे हैं, लेकिन जितनी मेहनत वह बाहर करते हैं, यदि उतनी मेहनत अपने घर में करते तो वह सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। प्रदीप ने बताया कि बकरी, मुर्गी, अंडे, दूध बेचकर वह साल में करीब ढाई लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
पानी की कमी के कारण रोपे बांज के पौधे
लोहाघाट (चंपावत)। प्रदीप का कहना है कि क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या पानी की है। पर्याप्त पानी न होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदीप ने गांव की जमीन के आसपास बांज के हजारों पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ समय बाद बांज के पौधे बड़े होंगे तो उस क्षेत्र में पानी की कमी नहीं रहेगी। इसका सीधा लाभ सभी को मिलेगा। प्रदीप का कहना है कि उनके पास भूमि की कमी है। इसलिए उन्होंने गांव के लोगों से भूमि लीज पर लेकर मॉडल तरीके से खेती कर पशुपालन, मुर्गी, बकरी पालन की योजना बनाई है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो वह अपने कार्य को और अधिक बढ़ाएंगे।
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वर्ष 2014 में पॉलीटेक्निक एवं वर्ष 2018 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रदीप नौकरी की तलाश में कुछ समय शहरों की ओर गए। जहां उन्हें नौकरी रास नहीं आई, उन्होंने घर लौटकर खेती को आजीविका बनाया। प्रदीप ने धीरे-धीरे मुर्गी पालन, बकरी पालन, पशुपालन का कार्य शुरू कर जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। प्रदीप का कहना है कि शहरों की चकाचौंध की ओर आकर्षित होकर पहाड़ के युवा गांवों से पलायन कर रहे हैं, लेकिन जितनी मेहनत वह बाहर करते हैं, यदि उतनी मेहनत अपने घर में करते तो वह सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। प्रदीप ने बताया कि बकरी, मुर्गी, अंडे, दूध बेचकर वह साल में करीब ढाई लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
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पानी की कमी के कारण रोपे बांज के पौधे
लोहाघाट (चंपावत)। प्रदीप का कहना है कि क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या पानी की है। पर्याप्त पानी न होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदीप ने गांव की जमीन के आसपास बांज के हजारों पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ समय बाद बांज के पौधे बड़े होंगे तो उस क्षेत्र में पानी की कमी नहीं रहेगी। इसका सीधा लाभ सभी को मिलेगा। प्रदीप का कहना है कि उनके पास भूमि की कमी है। इसलिए उन्होंने गांव के लोगों से भूमि लीज पर लेकर मॉडल तरीके से खेती कर पशुपालन, मुर्गी, बकरी पालन की योजना बनाई है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो वह अपने कार्य को और अधिक बढ़ाएंगे।
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