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लखनऊ से दबोचा गया 9.87 करोड़ रुपये डकारने वाला घोटालेबाज, जेल भेजा
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चंपावत। कुमाऊं मंडल के गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपये के गबन के मामले का मुख्य सरगना पुलिस के हत्थे चढ़ गया। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि यूपी का रहने वाले आरोपी प्रदीप कुमार अस्थाना को लखनऊ से दबोचा गया। वह पिछले काफी समय से फरार था। आरोपी के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज हैं। उस पर 3285 निवेशकों से 9.87 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है।
एसपी ने बताया कि आरोपी कैमुना क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी का कर्ताधर्ता है। उसे दबोचने के लिए चंपावत जिले की दो पुलिस टीमों को लगाया गया था। इस मामले में गठित दो टीमों ने सर्विलांस और अन्य जानकारी के आधार पर आरोपी के ठिकाने पर छापा मारा। रीठा साहिब के थानाध्यक्ष दीवान सिंह जलाल और टनकपुर के दरोगा तेज कुमार के नेतृत्व में गई पुलिस टीमों ने आरोपी प्रदीप कुमार अस्थाना (निवासी नईगंज, सदर कोतवाली जौनपुर हाल निवासी शाही सदन बी-17 सेक्टर जे थाना अलीगंज लखनऊ) को शनिवार को लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र से गिरफ्तार किया। रविवार को आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लोहाघाट जेल भेज दिया गया।
आरोपी प्रदीप कुमार पर दर्ज हैं चार जिलों में सात मुकदमे
चंपावत जिला
1. लोहाघाट में 1381 निवेशकों के 2.90 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप।
2. टनकपुर में 800 निवेशकों के 3 करोड़ रुपये वापस न करने का आरोप।
अल्मोड़ा जिला
1. सोमेश्वर में 472 निवेशकों के 90 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
2. चौखुटिया में 127 निवेशकों के 1.19 करोड़ रुपये वापस न करने का आरोप।
बागेश्वर जिला:
1. बागेश्वर में 141 निवेशको के 33.67 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
2. बैजनाथ में 275 निवेशकों के 1.44 करोड़ रुपये वापस न करने का आरोप।
पिथौरागढ़ जिला:
1. बेड़ीनाग में 89 निवेशकों से 18.82 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
घपले में नौ अन्य कंपनियां भी हैं आरोपी
चंपावत। एनबीएफसी घोटाले में कैमुना क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी अकेली नहीं है। नौ अन्य कंपनियां भी निवेशकों से ठगी की आरोपी हैं। कुल दस कंपनियों के खिलाफ कुमाऊं मंडल के चार पहाड़ी जिलों में (बागेश्वर आठ, पिथौरागढ़ छह, अल्मोड़ा चार, चंपावत तीन) 21 मुकदमे दर्ज हैं। इसी के चलते दिसंबर 2020 में डीआईजी ने इन मुकदमों में तेजी लाने के लिए चंपावत के एसपी लोकेश्वर सिंह को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया था। आरोप है कि 2013 के बाद पहाड़ के चार जिलों में इन तमाम कंपनियों के कर्ताधर्ता निवेशकों के करीब 40 करोड़ रुपये डकार कर चंपत हो चुके हैं। एनबीएफसी किसी योजना के तहत जमाकर्ता से धन एकत्र करती है। बाद में जमाकर्ता को मुनाफे से लेकर कर्ज तक देती है। (ब्यूरो)
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एसपी ने बताया कि आरोपी कैमुना क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी का कर्ताधर्ता है। उसे दबोचने के लिए चंपावत जिले की दो पुलिस टीमों को लगाया गया था। इस मामले में गठित दो टीमों ने सर्विलांस और अन्य जानकारी के आधार पर आरोपी के ठिकाने पर छापा मारा। रीठा साहिब के थानाध्यक्ष दीवान सिंह जलाल और टनकपुर के दरोगा तेज कुमार के नेतृत्व में गई पुलिस टीमों ने आरोपी प्रदीप कुमार अस्थाना (निवासी नईगंज, सदर कोतवाली जौनपुर हाल निवासी शाही सदन बी-17 सेक्टर जे थाना अलीगंज लखनऊ) को शनिवार को लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र से गिरफ्तार किया। रविवार को आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लोहाघाट जेल भेज दिया गया।
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आरोपी प्रदीप कुमार पर दर्ज हैं चार जिलों में सात मुकदमे
चंपावत जिला
1. लोहाघाट में 1381 निवेशकों के 2.90 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप।
2. टनकपुर में 800 निवेशकों के 3 करोड़ रुपये वापस न करने का आरोप।
अल्मोड़ा जिला
1. सोमेश्वर में 472 निवेशकों के 90 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
2. चौखुटिया में 127 निवेशकों के 1.19 करोड़ रुपये वापस न करने का आरोप।
बागेश्वर जिला:
1. बागेश्वर में 141 निवेशको के 33.67 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
2. बैजनाथ में 275 निवेशकों के 1.44 करोड़ रुपये वापस न करने का आरोप।
पिथौरागढ़ जिला:
1. बेड़ीनाग में 89 निवेशकों से 18.82 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
घपले में नौ अन्य कंपनियां भी हैं आरोपी
चंपावत। एनबीएफसी घोटाले में कैमुना क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी अकेली नहीं है। नौ अन्य कंपनियां भी निवेशकों से ठगी की आरोपी हैं। कुल दस कंपनियों के खिलाफ कुमाऊं मंडल के चार पहाड़ी जिलों में (बागेश्वर आठ, पिथौरागढ़ छह, अल्मोड़ा चार, चंपावत तीन) 21 मुकदमे दर्ज हैं। इसी के चलते दिसंबर 2020 में डीआईजी ने इन मुकदमों में तेजी लाने के लिए चंपावत के एसपी लोकेश्वर सिंह को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया था। आरोप है कि 2013 के बाद पहाड़ के चार जिलों में इन तमाम कंपनियों के कर्ताधर्ता निवेशकों के करीब 40 करोड़ रुपये डकार कर चंपत हो चुके हैं। एनबीएफसी किसी योजना के तहत जमाकर्ता से धन एकत्र करती है। बाद में जमाकर्ता को मुनाफे से लेकर कर्ज तक देती है। (ब्यूरो)
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