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कैंसर के खिलाफ संघर्ष गाथा: हड्डी कैंसर से पांव कटा, फिर भी महिला ने नहीं हारी हिम्मत
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चंपावत। कैंसर शब्द किसी को भी दहशत में डाल दे, लेकिन इस खतरनाक रोग के बावजूद कुछ लोग हिम्मत हारने के बजाय बहादुरी से मुकाबला करते हैं। कठिन हालात में भी सामान्य रूप से जिंदगी की गाड़ी को गति दे रहे हैं। बाराकोट ब्लॉक में एक महिला ने इसी जज्बे का परिचय दिया है। अस्थि कैंसर की वजह से पांव कटवाने को मजबूर हुई, लेकिन इसके बावजूद वे रोजमर्रा के काम को बखूबी अंजाम दे रही हैं। अपने इस काम से यह महिला दूसरों के लिए मिसाल बनी है।
बाराकोट ब्लॉक की एक महिला (काल्पनिक नाम रश्मि) को 2017 में पांव में मामूली फोड़ा हुआ। महिला ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और वह तमाम घरेलू काम करती रही। लेकिन कुछ ही समय में पांव के आसपास की हड्डी में असहनीय दर्द होने लगा। परिजनों ने इलाज कराया, फिर भी न घाव ठीक हुआ और नहीं हड्डी का दर्द कम हुआ। महिला को दिल्ली के एम्स ले जाया गया, तो पता चला कि पांव की हड्डी में कैंसर हो गया और पांव काटना ही इकलौता विकल्प था। इस वाकये से हतप्रभ महिला पांव कटवाने को तैयार नहीं थी। कई माह के अवसाद से उबरने के बाद महिला को पांव कटवाने के लिए राजी करवाया जा सका। फिर पांव काट कृत्रिम पांव लगा और हर साल इस पांव को दिल्ली से बदलवाना पड़ता है। इस कृत्रिम पांव से भी यह महिला घर के काम के साथ खेत और जंगल के काम को भी कर रही है।
39 साल की इस महिला का कहना है कि इलाज के अलावा खानपान में परहेज करती रही। इस कठिन हालत में पति और परिवार के दूसरे लोगों ने भावनात्मक सहयोग दिया। जिससे कैंसर से लड़ने का जज्बा पैदा हुआ। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि कैंसर रोग से लड़ने के लिए इलाज के साथ ही दृढ़ इच्छा शक्ति भी चाहिए।
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शुरुआती लक्षण मिलने पर अब तक 55 लोगों को रेफर किया
चंपावत। वक्त रहते रोग का पता चलने पर कैंस से उबरना आसान है। इसी अवधारणा पर जिला अस्पताल में गैर संक्रामक रोग निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसीपी) चल रहा है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि प्रचार-प्रसार से जागरूकता के अलावा एनसीडीसीपी कार्यक्रम से कैंसर के शुरुआती लक्षण वाले रोगी की मदद की जाती है। ऐसे लोगों को सुशीला तिवारी हल्द्वानी रेफर किया जाता है। सालभर में 25 कैंसर के मरीज रेफर किए जाते हैं। वैसे तीन साल से शुरू इस कार्यक्रम के तहत कैंसर के शुरुआती लक्षण मिलने से जिले से 55 लोगों को हल्द्वानी रेफर किया गया है।
पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सभी सुविधाएं निशुल्क मिल रही है। इसमें कैंसर के अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग से संबंधित रोगों का भी पता लगाया जा रहा है। ऐसे रोगों के अंदेशे वाले लोगों के ब्लड शुगर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की जांच की जा रही है। (ब्यूरो)
कैंसर से बचाव को उठाएं ये कदम
चंपावत। लंबे समय से किसी रोग का ठीक नहीं होना, एकाएक वजन घटना, भूख नहीं लगना, पेट और छाती में दर्द के कारणों का पता न लगने आदि पर कैंसर का परीक्षण कराया जाना चाहिए। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि शुरुआत में कैंसर का पता न चलने से इसके शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के खतरे बढ़ जाते हैं। लक्षणों को जान कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी के जरिये पता लगाया जा सकता है। पुरुष सबसे ज्यादा प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथी) और मुंह के कैंसर, वहीं महिलाएं गर्भाशय और स्तन कैंसर की जद में हैं। (ब्यूरो)
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बाराकोट ब्लॉक की एक महिला (काल्पनिक नाम रश्मि) को 2017 में पांव में मामूली फोड़ा हुआ। महिला ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और वह तमाम घरेलू काम करती रही। लेकिन कुछ ही समय में पांव के आसपास की हड्डी में असहनीय दर्द होने लगा। परिजनों ने इलाज कराया, फिर भी न घाव ठीक हुआ और नहीं हड्डी का दर्द कम हुआ। महिला को दिल्ली के एम्स ले जाया गया, तो पता चला कि पांव की हड्डी में कैंसर हो गया और पांव काटना ही इकलौता विकल्प था। इस वाकये से हतप्रभ महिला पांव कटवाने को तैयार नहीं थी। कई माह के अवसाद से उबरने के बाद महिला को पांव कटवाने के लिए राजी करवाया जा सका। फिर पांव काट कृत्रिम पांव लगा और हर साल इस पांव को दिल्ली से बदलवाना पड़ता है। इस कृत्रिम पांव से भी यह महिला घर के काम के साथ खेत और जंगल के काम को भी कर रही है।
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39 साल की इस महिला का कहना है कि इलाज के अलावा खानपान में परहेज करती रही। इस कठिन हालत में पति और परिवार के दूसरे लोगों ने भावनात्मक सहयोग दिया। जिससे कैंसर से लड़ने का जज्बा पैदा हुआ। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि कैंसर रोग से लड़ने के लिए इलाज के साथ ही दृढ़ इच्छा शक्ति भी चाहिए।
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शुरुआती लक्षण मिलने पर अब तक 55 लोगों को रेफर किया
चंपावत। वक्त रहते रोग का पता चलने पर कैंस से उबरना आसान है। इसी अवधारणा पर जिला अस्पताल में गैर संक्रामक रोग निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसीपी) चल रहा है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि प्रचार-प्रसार से जागरूकता के अलावा एनसीडीसीपी कार्यक्रम से कैंसर के शुरुआती लक्षण वाले रोगी की मदद की जाती है। ऐसे लोगों को सुशीला तिवारी हल्द्वानी रेफर किया जाता है। सालभर में 25 कैंसर के मरीज रेफर किए जाते हैं। वैसे तीन साल से शुरू इस कार्यक्रम के तहत कैंसर के शुरुआती लक्षण मिलने से जिले से 55 लोगों को हल्द्वानी रेफर किया गया है।
पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सभी सुविधाएं निशुल्क मिल रही है। इसमें कैंसर के अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग से संबंधित रोगों का भी पता लगाया जा रहा है। ऐसे रोगों के अंदेशे वाले लोगों के ब्लड शुगर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की जांच की जा रही है। (ब्यूरो)
कैंसर से बचाव को उठाएं ये कदम
चंपावत। लंबे समय से किसी रोग का ठीक नहीं होना, एकाएक वजन घटना, भूख नहीं लगना, पेट और छाती में दर्द के कारणों का पता न लगने आदि पर कैंसर का परीक्षण कराया जाना चाहिए। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि शुरुआत में कैंसर का पता न चलने से इसके शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के खतरे बढ़ जाते हैं। लक्षणों को जान कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी के जरिये पता लगाया जा सकता है। पुरुष सबसे ज्यादा प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथी) और मुंह के कैंसर, वहीं महिलाएं गर्भाशय और स्तन कैंसर की जद में हैं। (ब्यूरो)