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प्रोत्साहन राशि बंद किए जाने के विरोध में निकाली रैली
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टनकपुर में प्रदर्शन करती आशा वर्कर।
- फोटो : TANAKPUR
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अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ब्लाक भर से आई आशा कार्यकर्ता ने रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने सरकार की ओर से उनकी प्रोत्साहन राशि बंद किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने पूर्व की भांति प्रोत्साहन राशि देने और आंध्रप्रदेश सरकार की तर्ज पर आशाओं को 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने की मांग उठाई है।
सोमवार को आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम आरसी गौतम को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि आशाएं न्यूनतम वेतन के लिए संघर्ष कर रही हैं लेकिन उन्हें मासिक वेतन के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया जा रहा है। आशाओं की नियुक्ति मातृ शिशु, मृत्यु दर कम करने के लिए की गई थी और आशाएं अपने कार्य में सफल भी रहीं। अब ये आलम है कि सरकार ने उनको मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी बंद कर दी।
जबकि लोकसभा चुनाव से पहले उनकी प्रोत्साहन राशि को पांच हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपया करने की घोषणा की गई थी। आशाओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और आंध्र प्रदेश सरकार की तर्ज पर राज्य मद से दस हजार रुपये प्रतिमाह देने की मांग उठाई। जिलाध्यक्ष पुनेठा ने कहा कि संगठित रहो प्रतिरोध करो अभियान के तहत प्रदर्शन के बाद उनका आंदोलन रणनीति बनाकर आगे भी जारी रहेगा। इस मौके पर जिला सचिव पदमा प्रथोली, आयसा बानों, लीला देवी, कौशल्या पांडेय, पार्वती देवी, मंजू देवी, बबीता भट्ट, धनी मेहता, रेखा देवी, हेमा जोशी, कुसमा बोहरा, लक्ष्मी गहतोड़ी, माला देवी, ममता देवी, लक्ष्मी जोशी आदि मौजूद रहे।
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आशा वर्करों ने किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा
टनकपुर (चंपावत)। आशाओं ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने जल्द मांग पूरी नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर 6 से 26 अगस्त तक संगठित रहो प्रतिरोध करो अभियान चलाया गया जो सोमवार को प्रदर्शन और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने के साथ संपन्न हो गया है। आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष लीला ठाकुर के नेतृत्व में आशाओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और तहसील में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा विभिन्न जिलों से गत 6 अगस्त को भी ज्ञापन भेजे गए थे लेकिन उनकी मांग पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। कहा कि आशा कार्यकर्ता आज स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बन चुकी हैं। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर आशाओं को तत्काल दौड़ना पड़ता है।
अपनी कार्य कुशलता के दम पर आशाओं ने मातृ-शिशु मृत्यु दर में कम करने में अहम भूमिका निभाई है लेकिन बदले में ईनाम देने के बजाय सरकार ने प्रोत्साहन राशि भी बंद कर दी है। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार की तरह आशाओं कार्यकर्ताओं को दस हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में हीरा बोहरा, बबीता महर, मोहनी जुकरिया, मंजू गड़कोटी, प्रेमवती गड़कोटी, दीपा देवी, रीता उप्रेती, भुवनेश्वरी, आशा जोशी, चंद्रप्रभा शर्मा आदि आशा वर्कर शामिल थीं। ब्यूरो
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सोमवार को आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम आरसी गौतम को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि आशाएं न्यूनतम वेतन के लिए संघर्ष कर रही हैं लेकिन उन्हें मासिक वेतन के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया जा रहा है। आशाओं की नियुक्ति मातृ शिशु, मृत्यु दर कम करने के लिए की गई थी और आशाएं अपने कार्य में सफल भी रहीं। अब ये आलम है कि सरकार ने उनको मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी बंद कर दी।
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जबकि लोकसभा चुनाव से पहले उनकी प्रोत्साहन राशि को पांच हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपया करने की घोषणा की गई थी। आशाओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और आंध्र प्रदेश सरकार की तर्ज पर राज्य मद से दस हजार रुपये प्रतिमाह देने की मांग उठाई। जिलाध्यक्ष पुनेठा ने कहा कि संगठित रहो प्रतिरोध करो अभियान के तहत प्रदर्शन के बाद उनका आंदोलन रणनीति बनाकर आगे भी जारी रहेगा। इस मौके पर जिला सचिव पदमा प्रथोली, आयसा बानों, लीला देवी, कौशल्या पांडेय, पार्वती देवी, मंजू देवी, बबीता भट्ट, धनी मेहता, रेखा देवी, हेमा जोशी, कुसमा बोहरा, लक्ष्मी गहतोड़ी, माला देवी, ममता देवी, लक्ष्मी जोशी आदि मौजूद रहे।
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आशा वर्करों ने किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा
टनकपुर (चंपावत)। आशाओं ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने जल्द मांग पूरी नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर 6 से 26 अगस्त तक संगठित रहो प्रतिरोध करो अभियान चलाया गया जो सोमवार को प्रदर्शन और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने के साथ संपन्न हो गया है। आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष लीला ठाकुर के नेतृत्व में आशाओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और तहसील में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा विभिन्न जिलों से गत 6 अगस्त को भी ज्ञापन भेजे गए थे लेकिन उनकी मांग पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। कहा कि आशा कार्यकर्ता आज स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बन चुकी हैं। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर आशाओं को तत्काल दौड़ना पड़ता है।
अपनी कार्य कुशलता के दम पर आशाओं ने मातृ-शिशु मृत्यु दर में कम करने में अहम भूमिका निभाई है लेकिन बदले में ईनाम देने के बजाय सरकार ने प्रोत्साहन राशि भी बंद कर दी है। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार की तरह आशाओं कार्यकर्ताओं को दस हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में हीरा बोहरा, बबीता महर, मोहनी जुकरिया, मंजू गड़कोटी, प्रेमवती गड़कोटी, दीपा देवी, रीता उप्रेती, भुवनेश्वरी, आशा जोशी, चंद्रप्रभा शर्मा आदि आशा वर्कर शामिल थीं। ब्यूरो

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम आरसी गौतम को ज्ञापन सौंपते आशा वर्कर्स।- फोटो : LOHAGHAT