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Champawat News: बुक स्टाल पर कापी, पेन और पेंसिल के बढ़े रेट
Mon, 01 Apr 2024 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 01 Apr 2024 11:18 PM IST
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चंपावत। नए सत्र में अभिभावकों की जेब पर अधिक भार पड़ने वाला है। किताबों के दाम 30 से फीसदी से अधिक तो कापियों के दाम 20 से 25 फीसदी बढ़ गए हैं। इससे नए सत्र की शिक्षा महंगी होगी।
नया सत्र शुरू होते ही कापी किताबों की दुकान पर अभिभावकों और बच्चों की भीड़ लगनी शुरू हो गई है। इस बार कापियों के दामों में वृद्धि से अभिभावक चिंतित हैं। जो कापियां विगत वर्ष 50 रुपये की मिल रही थी वह अब 60 और 65 रुपये की हो गई हैं। रजिस्टर 150 से बढ़कर 180 से 200 के बीच और पेन, पेंसिल के दाम भी बढ़ गए हैं। इस बार अभिभावकों को पिछले वर्ष की तुलना में 30 फीसदी से अधिक धनराशि अपने पाल्यों की शिक्षा पर खर्च करनी होगी। हालांकि बुकसेलर इस पर खुलकर बात नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि इस बार कापी और किताबें काफी महंगी मिल रही हैं। 2024 में बच्चों के शिक्षा बजट पर अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ सकती है।
कोट
हर बार शिक्षा महंगी होती जा रही है। आने वाला भविष्य सोचकर काफी डर लगता है। कापी, पेन और पेंसिल में मूल्य वृद्धि से तो घर का बजट डगमाग जाएगा। - गीता, अभिभावक, चंपावत
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कोट
कापी के साथ ही किताबों के दाम काफी अधिक हो गए हैं। बेहतर शिक्षा हर एक मां बाप का सपना होता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार तो अपने बच्चों को अच्छी स्कूल में कैसे पढ़ा जाएंगे। - राजेंद्र पांडे, अभिभावक, चंपावत।
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नया सत्र शुरू होते ही कापी किताबों की दुकान पर अभिभावकों और बच्चों की भीड़ लगनी शुरू हो गई है। इस बार कापियों के दामों में वृद्धि से अभिभावक चिंतित हैं। जो कापियां विगत वर्ष 50 रुपये की मिल रही थी वह अब 60 और 65 रुपये की हो गई हैं। रजिस्टर 150 से बढ़कर 180 से 200 के बीच और पेन, पेंसिल के दाम भी बढ़ गए हैं। इस बार अभिभावकों को पिछले वर्ष की तुलना में 30 फीसदी से अधिक धनराशि अपने पाल्यों की शिक्षा पर खर्च करनी होगी। हालांकि बुकसेलर इस पर खुलकर बात नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि इस बार कापी और किताबें काफी महंगी मिल रही हैं। 2024 में बच्चों के शिक्षा बजट पर अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ सकती है।
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हर बार शिक्षा महंगी होती जा रही है। आने वाला भविष्य सोचकर काफी डर लगता है। कापी, पेन और पेंसिल में मूल्य वृद्धि से तो घर का बजट डगमाग जाएगा। - गीता, अभिभावक, चंपावत
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कापी के साथ ही किताबों के दाम काफी अधिक हो गए हैं। बेहतर शिक्षा हर एक मां बाप का सपना होता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार तो अपने बच्चों को अच्छी स्कूल में कैसे पढ़ा जाएंगे। - राजेंद्र पांडे, अभिभावक, चंपावत।