{"_id":"616480068ebc3ed32a7b75b1","slug":"ramleela-in-lohaghat-champawat-news-hld441089915","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज ऐसा में वेष बनाऊंगी, छर छंद फर फंद ऐसो रचूंगी...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज ऐसा में वेष बनाऊंगी, छर छंद फर फंद ऐसो रचूंगी...
विज्ञापन
लोहाघाट की रामलीला में कोप भवन में रूठी केकई को मनाते राजा दशरथ।
- फोटो : LOHAGHAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोहाघाट। इन दिनों कुमाऊं में कई जगह रामलीला हो रही है। एक साल के इंतजार के बाद हो रही रामलीला में काफी संख्या में श्रद्धालु मंचन देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
रामलीला के तीसरे दिन जहां कैकेयी-मंथरा संवाद, दशरथ-कैकेयी संवाद ने जहां दर्शकों को बांधे रखा, वहीं पिता के वचनों का मान रखने के लिए राम के वनवास को निसंकोच होकर स्वीकार करने से जनता भावुक हो गई।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के ‘उतारूं राज के कपड़े बनाऊं वेश मुनियों का, जो है माता तेरे मन में रमाऊं खाक तन में, पिता ने दुख वृथा माना, यही चिंता रही मन में...’ कहते हुए मुनियों का वेश धारण करने पर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
विज्ञापन
श्रीराम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी की पहल पर लोहाघाट में हो रही 121वें वर्ष की रामलीला में सीता स्वयंवर के बाद सीता को लेकर राम, लक्ष्मण का अयोध्या आगमन हुआ। मंथरा के कैकेयी को भड़काने, दशरथ के कैकेयी को मनाने, कैकेयी का भरत को राजगद्दी और राम को वन जाने का वरदान मांगने की लीला दिखाई गई।
आज ऐसा मैं वेश बनाऊंगी...
चंपावत जिले के कोट अमोड़ी और स्वांला में रविवार को राम विवाह से लेकर दशरथ कैकेयी संवाद तक की लीला दिखाई गई। मंथरा के भड़काने पर कैकेयी कहती है ‘आज ऐसा मैं वेश बनाऊंगी, छर छंद फर फंद ऐसो रचूंगी, राजा को कोप चढ़ाऊंगी।’ कमेटी अध्यक्ष लालमणी भट्ट ने बताया कि सोनू ने राम, मोनू ने लक्ष्मण और राहुल ने सीता का पात्र निभाया। सुरेश चंद्र उद्घोषक रहे। स्वांला में हो रही लीला के व्यवस्थापक जगदीश चंद्र ने बताया कि रामलीला देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
रामलीला के तीसरे दिन जहां कैकेयी-मंथरा संवाद, दशरथ-कैकेयी संवाद ने जहां दर्शकों को बांधे रखा, वहीं पिता के वचनों का मान रखने के लिए राम के वनवास को निसंकोच होकर स्वीकार करने से जनता भावुक हो गई।
विज्ञापन
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के ‘उतारूं राज के कपड़े बनाऊं वेश मुनियों का, जो है माता तेरे मन में रमाऊं खाक तन में, पिता ने दुख वृथा माना, यही चिंता रही मन में...’ कहते हुए मुनियों का वेश धारण करने पर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
विज्ञापन
श्रीराम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी की पहल पर लोहाघाट में हो रही 121वें वर्ष की रामलीला में सीता स्वयंवर के बाद सीता को लेकर राम, लक्ष्मण का अयोध्या आगमन हुआ। मंथरा के कैकेयी को भड़काने, दशरथ के कैकेयी को मनाने, कैकेयी का भरत को राजगद्दी और राम को वन जाने का वरदान मांगने की लीला दिखाई गई।
आज ऐसा मैं वेश बनाऊंगी...
चंपावत जिले के कोट अमोड़ी और स्वांला में रविवार को राम विवाह से लेकर दशरथ कैकेयी संवाद तक की लीला दिखाई गई। मंथरा के भड़काने पर कैकेयी कहती है ‘आज ऐसा मैं वेश बनाऊंगी, छर छंद फर फंद ऐसो रचूंगी, राजा को कोप चढ़ाऊंगी।’ कमेटी अध्यक्ष लालमणी भट्ट ने बताया कि सोनू ने राम, मोनू ने लक्ष्मण और राहुल ने सीता का पात्र निभाया। सुरेश चंद्र उद्घोषक रहे। स्वांला में हो रही लीला के व्यवस्थापक जगदीश चंद्र ने बताया कि रामलीला देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।