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Champawat News: भाईयों की कलाई पर सजेंगी पिरूल से बनीं राखियाम
Fri, 16 Aug 2024 11:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 16 Aug 2024 11:37 PM IST
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चीड़ की पत्तियों से बनी राखियां। संवाद
चंपावत। जिले में चीड़ की पत्तियों से बनी राखियां भाईयों के हाथों की कलाई की शोभा बढ़ाएंगी। जिले में तीन माह से स्वयं सहायता समूह की 70 महिलाएं राखियां बना रही हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण के तहत चीड़ की पत्तियों से कई प्रकार के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था।
जिले के खैसकांडे और पंदा की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तीन माह से चीड़ की पत्तियों की राखियां बना रही हैं। रक्षाबंधन त्योहार के लिए महिलाओं नो पिरूल की शानदार राखियां बनाई हैं। समूह की महिलाएं एक सीजन में चार हजार से अधिक आय कर लेती हैं। आरसेटी की ओर से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था।, इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और चीड़ की पत्तियों को आय का स्रोत बनाते हुए वनों को आग से बचाना है।
कोट
जिले में पिछले तीन माह से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चीड़ की पत्तियों से राखियां बना रही हैं। आरसेटी की ओर से महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया था। महिलाएं एक सीजन में चार हजार से अधिक की आय कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। - प्रांशु मैठानी, निदेशक आरसेटी, चंपावत
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जिले के खैसकांडे और पंदा की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तीन माह से चीड़ की पत्तियों की राखियां बना रही हैं। रक्षाबंधन त्योहार के लिए महिलाओं नो पिरूल की शानदार राखियां बनाई हैं। समूह की महिलाएं एक सीजन में चार हजार से अधिक आय कर लेती हैं। आरसेटी की ओर से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था।, इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और चीड़ की पत्तियों को आय का स्रोत बनाते हुए वनों को आग से बचाना है।
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कोट
जिले में पिछले तीन माह से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चीड़ की पत्तियों से राखियां बना रही हैं। आरसेटी की ओर से महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया था। महिलाएं एक सीजन में चार हजार से अधिक की आय कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। - प्रांशु मैठानी, निदेशक आरसेटी, चंपावत
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