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नंदा गौरा योजना में भेदभाव पर भड़कीं छात्राएं
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चंपावत में नंदा गौरा योजना को लेकर प्रदर्शन करती छात्राएं।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। 2018 में इंटर पास कर चुकीं छात्राओं ने नंदा गौरा योजना में भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई है। इन छात्राओं को इंटर पास करने पर महज पांच हजार रुपया मिला। जबकि इस साल से ये रकम बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दी गई है और 2016 तक भी ये राशि 50 हजार रुपये थी। इस विसंगति को लेकर छात्राओं ने सांकेतिक प्रदर्शन किया और डीएम को ज्ञापन भेजा।
चंपावत जीजीआईसी के अभिभावक-शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष शेखर चंद्र भट्ट और छात्राओं का कहना है कि 2018 में इंटर पास करने वाली छात्राओं को नंदा गौरा योजना के अंतर्गत सिर्फ पांच हजार रुपये दिए गए। अब 2019 में इंटर करने वाली छात्राओं को 51 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने इस भेदभाव को दूर करने की मांग की है। ज्ञापन में प्रभा भट्ट, विमला गिरि, मनीषा बोहरा, अनीता बोहरा, कविता जोशी, योगेश महर, रेणु, बद्रीदत्त जोशी, रेवाधर पालीवाल, हेमा साह आदि के हस्ताक्षर हैं। इधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी पीएस बृजवाल का कहना है कि शासनादेश में बदलाव के चलते योजना की रकम में अंतर आया है।
बाक्स
एक ही योजना में कई बार बदलाव से हो रही नाइंसाफी
चंपावत। बीते तीन वर्षों में इंटर पास कर चुकीं छात्राओं को मिलने वाली नंदा गौरा योजना की रकम एक जैसी नहीं है। ढेरों छात्राओं को योजना के तहत मिलने वाली राशि में असमानता है, तो वहीं 2017 में इंटर पास कर चुकी 1505 छात्राओं को एक भी रुपया नहीं मिला है।
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2016 तक गौरा देवी कन्या धन के नाम से संचालित योजना से इंटर पास करने वाली छात्राओं को 50 हजार रुपये मिलते थे। मगर 15 जून 2017 से योजना का नाम बदलकर नंदा गौरा योजना कर दिया गया और इसके संचालन की जिम्मेदारी कार्यक्रम विभाग को दे दी गई। योजना की राशि को सात चरणों में बांट कुल 51 हजार रुपये कर दिया गया। इसमें इंटर पास करने पर पांच हजार रुपये दिए जाने थे। मगर 2017 में इंटर पास करनी वालीं 1505 छात्राओं को एक भी रुपया नहीं मिला। 2018 में इंटर करने वाली 1319 छात्राओं को पांच हजार रुपया मिला। और अब इस साल 21 फरवरी 2019 को जारी शासनादेश के तहत जन्म के समय 11 हजार के अलावा इंटर करने वाली छात्राओं को 51 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान कर दिया गया है। छात्राओं का कहना है कि कई बार बदल चुके कायदे-कानूनों से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। योजनाओं का लाभ सभी को समान रूप से मिलना चाहिए।
2017 में इंटर पास करने वाली छात्राओं को गौरा देवी योजना का लाभ नहीं मिलने के मामले को कई बार उठाया जा चुका है। अब इसे फिर से शासन को भेजा जाएगा। जहां तक अलग-अलग राशि मिलने का मामला है, जीओ में बदलाव के चलते ऐसा हो रहा है।
सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
2017 में ये थी नंदा गौरा योजना में कन्याओं को मिलने वाली रकम का विवरण:
चरण धनराशि (रुपये में)
जन्म के समय: 5000
1 वर्ष होने पर: 5000
8वीं करने पर: 5000
10वीं करने पर: 5000
12वीं करने पर: 5000
डिप्लोमा/स्नातक करने पर: 10000
विवाह के समय: 16000
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चंपावत जीजीआईसी के अभिभावक-शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष शेखर चंद्र भट्ट और छात्राओं का कहना है कि 2018 में इंटर पास करने वाली छात्राओं को नंदा गौरा योजना के अंतर्गत सिर्फ पांच हजार रुपये दिए गए। अब 2019 में इंटर करने वाली छात्राओं को 51 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने इस भेदभाव को दूर करने की मांग की है। ज्ञापन में प्रभा भट्ट, विमला गिरि, मनीषा बोहरा, अनीता बोहरा, कविता जोशी, योगेश महर, रेणु, बद्रीदत्त जोशी, रेवाधर पालीवाल, हेमा साह आदि के हस्ताक्षर हैं। इधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी पीएस बृजवाल का कहना है कि शासनादेश में बदलाव के चलते योजना की रकम में अंतर आया है।
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बाक्स
एक ही योजना में कई बार बदलाव से हो रही नाइंसाफी
चंपावत। बीते तीन वर्षों में इंटर पास कर चुकीं छात्राओं को मिलने वाली नंदा गौरा योजना की रकम एक जैसी नहीं है। ढेरों छात्राओं को योजना के तहत मिलने वाली राशि में असमानता है, तो वहीं 2017 में इंटर पास कर चुकी 1505 छात्राओं को एक भी रुपया नहीं मिला है।
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2016 तक गौरा देवी कन्या धन के नाम से संचालित योजना से इंटर पास करने वाली छात्राओं को 50 हजार रुपये मिलते थे। मगर 15 जून 2017 से योजना का नाम बदलकर नंदा गौरा योजना कर दिया गया और इसके संचालन की जिम्मेदारी कार्यक्रम विभाग को दे दी गई। योजना की राशि को सात चरणों में बांट कुल 51 हजार रुपये कर दिया गया। इसमें इंटर पास करने पर पांच हजार रुपये दिए जाने थे। मगर 2017 में इंटर पास करनी वालीं 1505 छात्राओं को एक भी रुपया नहीं मिला। 2018 में इंटर करने वाली 1319 छात्राओं को पांच हजार रुपया मिला। और अब इस साल 21 फरवरी 2019 को जारी शासनादेश के तहत जन्म के समय 11 हजार के अलावा इंटर करने वाली छात्राओं को 51 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान कर दिया गया है। छात्राओं का कहना है कि कई बार बदल चुके कायदे-कानूनों से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। योजनाओं का लाभ सभी को समान रूप से मिलना चाहिए।
2017 में इंटर पास करने वाली छात्राओं को गौरा देवी योजना का लाभ नहीं मिलने के मामले को कई बार उठाया जा चुका है। अब इसे फिर से शासन को भेजा जाएगा। जहां तक अलग-अलग राशि मिलने का मामला है, जीओ में बदलाव के चलते ऐसा हो रहा है।
सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
2017 में ये थी नंदा गौरा योजना में कन्याओं को मिलने वाली रकम का विवरण:
चरण धनराशि (रुपये में)
जन्म के समय: 5000
1 वर्ष होने पर: 5000
8वीं करने पर: 5000
10वीं करने पर: 5000
12वीं करने पर: 5000
डिप्लोमा/स्नातक करने पर: 10000
विवाह के समय: 16000