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मां बाराही से की कोरोना से दुनिया को बचाने की प्रार्थना
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देवीधुरा में पूजा करते पुरोहित।
- फोटो : CHAMPAWAT
पाटी (चंपावत)। देवीधुरा में शुक्रवार को मां बाराही धाम में वीराचार पूजन किया गया। पूजन के साथ ही मां बाराही से कोरोना से दुनिया को बचाने की प्रार्थना की गई। मुख्य पुजारी गुरना धर्मानंद पुजारी, पंडित भुवन जोशी, पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने कराई।
पूजन का आगाज खोलीखांण दुबचौड़ की परिक्रमा के साथ शुरू हुआ। पीठाचार्य भुवन चंद्र जोशी ने मंत्रोच्चार के साथ वीरों का आह्वान किया। पुजारी बच्चीदत्त व बिशन दत्त ने पूजन कराया। मां बाराही धाम में दिगंबरा शक्तिपीठ की गुफा (गव्योरी) के प्रवेशद्वार में स्थित कलुवा बेताल संग चौसठ योगिनी और बावन वीरों का आह्वान किया गया।
प्रधान पुजारी धर्मानंद, प्रधान सेवक चतुर सिंह, चारों खामों के मुखिया चारों खामों के मुखिया बद्री सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह लमगड़िया, गंगा सिंह, त्रिलोक सिंह बिष्ट, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह, दीपक बिष्ट, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, विनोद गड़कोटी, रोशन सिंह, जगदीश सिंगवाल लमगड़िया, मदन सिंह बोरा, नारायण बिष्ट, हयात सिंह बिष्ट, जीत सिंह चम्याल, रमेश राणा, बिशन सिंह चम्याल, ईश्वर बिष्ट, नवीन राणा, राजू बिष्ट, दिनेश चम्याल, मोहन बिष्ट, दीपक चम्याल, राम सिंह अधिकारी, अमित लमगड़िया, तारा चम्याल आदि ने विश्व कल्याण व कोरोना से बचाव की मां बाराही देवी से कामना की। मंदिर कमेटी का कहना है कि बगवाल के बजाय इस बार तीन अगस्त को सिर्फ पूजा-अर्चना और फर्रे के साथ चारों खाम मंदिर की परिक्रमा करेंगे।
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अब भी नजर आते हैं शिला में भीम के निशान
देवीधुरा (चंपावत)। इस बार मां बाराही धाम देवीधुरा की भीम शिला सूनी-सूनी है। और बगवाल के दिन भी आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व की इस शिला के आसपास ज्यादातर वक्त खामोशी रहेगी। मगर इसे लेकर कई मान्यताएं हैं।
मां बाराही धाम के पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ शास्त्री का मानना है कि इसका संबंध पांडवों से है। कहते हैं कि पांडवों के यहां आने से पूर्व मां बाराही की स्थापना इस स्थान पर हो चुकी होगी। अन्यथा वो यहां अन्य देवी-देवता की स्थापना कर सकते थे। प्राचीनकाल से मान्यता रही है कि किसी क्षेत्र में कोई एक देवी-देवता स्थापित है, तो वहां उसी की प्रधानता रहती है। भीम शिला एक विशालकाय शिला है। इस शिला पर प्रमाण चिन्हित है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वास किया तथा वह इस शिला के ऊपर चौपड़ खेला करते थे। शिला पर चौपड़ के लिए चौकियां बनी हुई हैं।
किवदंतियों के अनुसार जब पांडव इस शिला के उपर चौपड़ खेल रहे थे, तब उनके साथ शक्ति स्वरूपी मां बाराही एक ग्वालन के रूप मे बैठी हुई थी। इसी बीच किसी बात पर भीम को क्रोध आया और ग्वालन इस शिला के भीतर समां गई। आज भी इस शिला के एक भाग को थपथपाने पर ऐसा लगता है कि यह खोखली है। भीम ने ग्वालन की तलाश में इस शिला के दो हिस्से कर दिए। लेकिन वह भूल गए कि उनके सभी भाई शिला के ऊपर बैठे चौपड़ खेल रहे हैं। उसी समय शिला दो भागों मे विभक्त होकर गिरने लगी थी भीम ने पास में पड़ी एक छोटी शिला को विभक्त करने वाले जोड़ पर रख दिया जिसके शिला गिरने से बच गई। बताते है कि आज भी शिला पर भीम के हाथ, पंजों और तलवार से विभक्त किए गए निशान दिखते हैं।
डुंराबोरा मेला टला, सिर्फ मंदिर की परिक्रमा की रस्म होगी
लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना के चलते नेपाल सीमा से लगे डुंगराबोरा गांव में रक्षाबंधन को होने वाले मेले को स्थगित कर दिया गया है। ग्राम प्रधान गंगा देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सुरक्षा के मद्देनजर ये निर्णय लिया गया। अलबत्ता कहा गया कि पुरातन परंपरा को बनाए रखने के लिए मेले के दिन पूजा-अर्चना के बाद देव डांगर मंदिर की परिक्रमा करेंगे। मेले में किसी तरह की कारोबारी गतिविधियां नहीं होंगी। बैठक में दशरथ बोरा, चंचल सिंह, गंगा सिंह, महेंद्र सिंह, संतोष सिंह, राजेंद्र राम, त्रिलोक सिंह आदि मौजूद थेे।
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पूजन का आगाज खोलीखांण दुबचौड़ की परिक्रमा के साथ शुरू हुआ। पीठाचार्य भुवन चंद्र जोशी ने मंत्रोच्चार के साथ वीरों का आह्वान किया। पुजारी बच्चीदत्त व बिशन दत्त ने पूजन कराया। मां बाराही धाम में दिगंबरा शक्तिपीठ की गुफा (गव्योरी) के प्रवेशद्वार में स्थित कलुवा बेताल संग चौसठ योगिनी और बावन वीरों का आह्वान किया गया।
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प्रधान पुजारी धर्मानंद, प्रधान सेवक चतुर सिंह, चारों खामों के मुखिया चारों खामों के मुखिया बद्री सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह लमगड़िया, गंगा सिंह, त्रिलोक सिंह बिष्ट, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह, दीपक बिष्ट, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, विनोद गड़कोटी, रोशन सिंह, जगदीश सिंगवाल लमगड़िया, मदन सिंह बोरा, नारायण बिष्ट, हयात सिंह बिष्ट, जीत सिंह चम्याल, रमेश राणा, बिशन सिंह चम्याल, ईश्वर बिष्ट, नवीन राणा, राजू बिष्ट, दिनेश चम्याल, मोहन बिष्ट, दीपक चम्याल, राम सिंह अधिकारी, अमित लमगड़िया, तारा चम्याल आदि ने विश्व कल्याण व कोरोना से बचाव की मां बाराही देवी से कामना की। मंदिर कमेटी का कहना है कि बगवाल के बजाय इस बार तीन अगस्त को सिर्फ पूजा-अर्चना और फर्रे के साथ चारों खाम मंदिर की परिक्रमा करेंगे।
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अब भी नजर आते हैं शिला में भीम के निशान
देवीधुरा (चंपावत)। इस बार मां बाराही धाम देवीधुरा की भीम शिला सूनी-सूनी है। और बगवाल के दिन भी आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व की इस शिला के आसपास ज्यादातर वक्त खामोशी रहेगी। मगर इसे लेकर कई मान्यताएं हैं।
मां बाराही धाम के पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ शास्त्री का मानना है कि इसका संबंध पांडवों से है। कहते हैं कि पांडवों के यहां आने से पूर्व मां बाराही की स्थापना इस स्थान पर हो चुकी होगी। अन्यथा वो यहां अन्य देवी-देवता की स्थापना कर सकते थे। प्राचीनकाल से मान्यता रही है कि किसी क्षेत्र में कोई एक देवी-देवता स्थापित है, तो वहां उसी की प्रधानता रहती है। भीम शिला एक विशालकाय शिला है। इस शिला पर प्रमाण चिन्हित है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वास किया तथा वह इस शिला के ऊपर चौपड़ खेला करते थे। शिला पर चौपड़ के लिए चौकियां बनी हुई हैं।
किवदंतियों के अनुसार जब पांडव इस शिला के उपर चौपड़ खेल रहे थे, तब उनके साथ शक्ति स्वरूपी मां बाराही एक ग्वालन के रूप मे बैठी हुई थी। इसी बीच किसी बात पर भीम को क्रोध आया और ग्वालन इस शिला के भीतर समां गई। आज भी इस शिला के एक भाग को थपथपाने पर ऐसा लगता है कि यह खोखली है। भीम ने ग्वालन की तलाश में इस शिला के दो हिस्से कर दिए। लेकिन वह भूल गए कि उनके सभी भाई शिला के ऊपर बैठे चौपड़ खेल रहे हैं। उसी समय शिला दो भागों मे विभक्त होकर गिरने लगी थी भीम ने पास में पड़ी एक छोटी शिला को विभक्त करने वाले जोड़ पर रख दिया जिसके शिला गिरने से बच गई। बताते है कि आज भी शिला पर भीम के हाथ, पंजों और तलवार से विभक्त किए गए निशान दिखते हैं।
डुंराबोरा मेला टला, सिर्फ मंदिर की परिक्रमा की रस्म होगी
लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना के चलते नेपाल सीमा से लगे डुंगराबोरा गांव में रक्षाबंधन को होने वाले मेले को स्थगित कर दिया गया है। ग्राम प्रधान गंगा देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सुरक्षा के मद्देनजर ये निर्णय लिया गया। अलबत्ता कहा गया कि पुरातन परंपरा को बनाए रखने के लिए मेले के दिन पूजा-अर्चना के बाद देव डांगर मंदिर की परिक्रमा करेंगे। मेले में किसी तरह की कारोबारी गतिविधियां नहीं होंगी। बैठक में दशरथ बोरा, चंचल सिंह, गंगा सिंह, महेंद्र सिंह, संतोष सिंह, राजेंद्र राम, त्रिलोक सिंह आदि मौजूद थेे।