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Champawat News: रेलवे भूमि पर काबिज कारोबारियों ने शुरू किया दुकानें हटाने का काम
Mon, 07 Apr 2025 10:32 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 07 Apr 2025 10:32 PM IST
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बनबसा (चंपावत)। बनबसा में रेलवे भूमि पर कारोबार करने वालों ने अपने प्रतिष्ठानों को हटाना शुरू कर दिया है। करीब एक पखवाड़े पूर्व रेलवे प्रशासन ने अपनी जमीन पर काबिज कारोबारियों को भूमि खाली करने के नोटिस जारी किए थे। इससे करीब 40 कारोबारियों में खलबली मची है। उधर इस मामले में राजनीति और लूटखसोट की वारदात भी होने की जानकारी मिल रही है। इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
बनबसा में रेलवे फाटक के दक्षिणी छोर पर सब्जी और मांस विक्रेताओं की पिछले तीन दशकों से दुकानें संचालित हैं। इनसे रेलवे ठेका प्रथा पर तय किराया वसूलती रही है लेकिन इधर रेलवे के बनबसा में बड़ा यार्ड बनाने और अन्य उपयोग को भूमि की आवश्यकता बता अपनी जमीन खाली कराने के नोटिस कारोबारियों को सौंपे। काफी प्रयासों के बाद जब बात नहीं बनी तो सोमवार को व्यवसायियों ने स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान हटाने का निर्णय लिया। इससे कारोबारियों के बेरोजगार होने का खतरा पैदा हो गया है। उनका कहना है कि वह अब अपने परिवार का पालन कैसे करेंगे। इसका जवाब केंद्र और राज्य सरकार के पास भी नहीं है।
लोगों को उजाड़ने का कर रही काम
बनबसा। कांग्रेस प्रदेश सचिव आनंद सिंह महरा ने कहा कि सरकार लोगों को उजाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे को जमीन की जरूरत थी तो वे कारोबारियों को हटा सकते हैं लेकिन इससे पूर्व उन्हें विस्थापित किया जाना जरूरी था। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्षा रेनू अग्रवाल ने कहा कि कारोबारियों को हटाने से पूर्व उन्हें कहीं अन्यत्र काम करने को जगह देनी चाहिए थी। पूर्व बीडीसी सदस्य जसवंत बसेड़ा ने भी कहा कि जमीन खाली कराने से पूर्व उन्हें रोजगार करने को विस्थापित किया जाना चाहिए था। संवाद
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बनबसा में रेलवे फाटक के दक्षिणी छोर पर सब्जी और मांस विक्रेताओं की पिछले तीन दशकों से दुकानें संचालित हैं। इनसे रेलवे ठेका प्रथा पर तय किराया वसूलती रही है लेकिन इधर रेलवे के बनबसा में बड़ा यार्ड बनाने और अन्य उपयोग को भूमि की आवश्यकता बता अपनी जमीन खाली कराने के नोटिस कारोबारियों को सौंपे। काफी प्रयासों के बाद जब बात नहीं बनी तो सोमवार को व्यवसायियों ने स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान हटाने का निर्णय लिया। इससे कारोबारियों के बेरोजगार होने का खतरा पैदा हो गया है। उनका कहना है कि वह अब अपने परिवार का पालन कैसे करेंगे। इसका जवाब केंद्र और राज्य सरकार के पास भी नहीं है।
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लोगों को उजाड़ने का कर रही काम
बनबसा। कांग्रेस प्रदेश सचिव आनंद सिंह महरा ने कहा कि सरकार लोगों को उजाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे को जमीन की जरूरत थी तो वे कारोबारियों को हटा सकते हैं लेकिन इससे पूर्व उन्हें विस्थापित किया जाना जरूरी था। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्षा रेनू अग्रवाल ने कहा कि कारोबारियों को हटाने से पूर्व उन्हें कहीं अन्यत्र काम करने को जगह देनी चाहिए थी। पूर्व बीडीसी सदस्य जसवंत बसेड़ा ने भी कहा कि जमीन खाली कराने से पूर्व उन्हें रोजगार करने को विस्थापित किया जाना चाहिए था। संवाद
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