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यह चुनाव भी गुजर गया, देकर अपना रंग...
Sun, 30 Jun 2019 10:13 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Sun, 30 Jun 2019 10:13 PM IST
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चंपावत में साहित्यिक चेतना मंच की मासांत कवि गोष्ठी में मौजूद कविगण।
- फोटो : अमर उजाला
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माह के अंतिम रविवार को साहित्यिक चेतना मंच की ओर से मासांत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. डीडी जोशी की अध्यक्षता में हुई काव्य गोष्ठी में सर्वप्रथम डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने काव्यपाठ करते हुए कहा ‘मुझे याद आती है अपने गांव के बेतरतीब लगे पेड़ों की’, खिले अधखिले फूलों की, जहां स्वतंत्रता है जीने की।
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साहित्यकार हिमांशु जोशी ने कहा ‘यह चुनाव भी गुजर गया, देकर अपना रंग। कल तक के दुश्मन सभी आज हैं बैठे संग। भाई भाई पर करे यहां चुनावी चोट, असमंजस में मतदाता, किसको दे अब वोट’।
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इसके बाद रजिस्टार कानूनगो राम प्रसाद आर्य ने कहा ‘अरे आतंकवादी पाक, सुन, समझ ये बात अब मेरी, कलम कवि सामने आ, गर तनिक हिम्मत है जो तेरी। साहित्यकार प्रकाश जोशी शूल ने कहा ‘बनना था उसको वृक्ष, मगर बेल हो गया, कट कर जमीं से अपनी, अमरबेल हो गया’।
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सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. टीआर जोशी ने काव्य पाठ करते हुए कहा ‘दौर ए उम्र में, हैं नहीं क्या सभी से बिछुड़ते रहे, चैन पाने, न क्या हम सभी आशियाना बदलते रहे’। डॉ. सतीश पांडेय ने कहा ‘कहने को लोकतंत्र मजबूत है हमारा, पैसा जो खूब फेंके नेता वही हमारा’। कवयित्री अंजू पांडेय ने कहा ‘तोड़ के हमारे मंदिरों को बसा ली अपनी दुनिया, भूमि में जिस राम ने लिया जन्म, आज उसके आशियां को ढूंढे़ सिसकियां’।
पुष्कर सिंह बोहरा ने कहा ‘मत बहने दो इसके आंसू ये बेशकीमती मोती है, सुख शांति नहीं आ सकती जिस घर में बहुएं रोती हैं’। डॉ. अजय रस्तोगी अविरल ने कहा ‘सोचिए सोचिए सोचिए तो जरा, जो न होती मोहब्बत यहां होता क्या’। डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा ने मुक्तक का पाठ करते हुए कहा ‘हे शारदे वरदान दे दो काव्य का पथ चाहता हूं, कविकर्म में आए निपुणता शक्ति ऐसी मांगता हूं’।
साहित्यकार सुभाष जोशी ने कहा ‘शीश किरीट हिमालय दमके, ताजमहल सीने में चमके, सागर की लहरे गा गा, नित नित तेरे पांव पखारे, विंध्यांचल कर रहा प्रणाम’। इस मौके पर हर्षित राय, फाल्गुनी सक्टा, रचित सक्टा आदि ने भी काव्यपाठ किया।