चंपावत। फूल देई छम्मा देई, जतुकै दैला.. उतुकै सही.. और फूल देई छम्मा देई देली द्वार भर भकार गीत गाते हुए बच्चों ने चंपावत जिले के तमाम इलाकों में फूल देई का पर्व उल्लास से मनाया। बच्चों ने प्योली, बुरांश, आड़ू, खुमानी, पुलम के फूल और चावल से घरों की देहरी का पूजन किया। छोटे बच्चों को गुड़, चना और रुपये भी उपहार में दिए गए। वहीं पहली बार एसएसबी की पंचम वाहिनी के आवासीय परिसरों में भी फूल देई का पर्व मनाया गया।
बता दें कि फूल देई प्रकृति के प्रति आभार जताने का पर्व है। आज से ही बहन-बेटियों को भिटौली (वार्षिक उपहार) देने की रस्म भी शुरू होती है। चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान, पाटी, बाराकोट के ग्रामीण इलाकों और मैदानी क्षेत्र टनकपुर में बच्चों ने फूल और चावल से देहरी पूजन किया। पंडित दीपक कुलेठा ने बताया कि फूल देई पर्व चैत्र मास की संक्रांति को मनाया जाता है।