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नेपाल सीमा से लगे पुलहिंडोला में अस्पताल की बदहाली से परेशानी
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पुलहिंडोला अस्पताल में छत की टिन की चादरें बदली जा रही हैं।
- फोटो : CHAMPAWAT
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नेपाल सीमा क्षेत्र के एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पुलहिंडोला की बदहाली से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अंग्रेजों के समय में बने पुलहिंडोला अस्पताल भवन की छलनी बनी टिन की चादरें वर्तमान में बदली जा रही हैं।
अस्पताल में केवल तीन कक्ष हैं जिसमें एलोपैथिक, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा के डाक्टर बैठते हैं। आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा में यहां के लोगों का रुझान कम देखा गया है। इसके चलते दोनों पैथियों के डॉक्टर यहां माह में फुर्सत से आते हैं। एलोपैथिक चिकित्सा पर यहां लोगों का अधिक विश्वास रहा है।
सड़क से दूर चिकित्सालय होने के कारण गुमदेश के लोग अस्पताल में जाने के बजाय लोहाघाट आना अधिक पसंद करते हैं। चिकित्सालय में आवासीय सुविधा न होने के कारण यहां कोई डाक्टर या अन्य कर्मी नहीं रह पाते हैं।
अस्पताल में बढ़ती हुई रोगियों की तादाद देखते हुए अतिरिक्त कक्षों, रोगियों के लिए टायलेट के अलावा चार बैड वाले वार्ड रूम की हालत भी ठीक की जानी है। यह वार्ड रूम काफी जीर्ण शीर्ण और असुरक्षित है। वहीं जनसेवा का भाव रखने वाले फार्मासिस्ट मनोज आर्या के आने के बाद रोगियों की तादाद में वृद्धि होने लगी है। एनआरएचएम के सर्वेक्षण में इस अस्पताल को पहली बार 50 हजार रुपये का कायाकल्प प्रोत्साहन पुरस्कार मिला है। अस्पताल में वार्ड ब्वॉय भी नहीं है और यहां का स्वच्छक भी जल्द रिटायर होने वाला है।
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चिकित्सालय में बढ़ रही है रोगियों की संख्या
लोहाघाट (चंपावत)। अस्पताल में फार्मासिस्ट मनोज आर्या के आने से पूर्व यहां 2492 रोगी पंजीकृत थे। वहीं 2017 में यह संख्या बढ़कर 3459 हो गई। वर्ष 2018 में 3544 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 2492 रोगी पंजीकृत हो चुके हैं। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के अभी चार माह शेष है। ब्यूरो
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अंग्रेजों के समय में बने पुलहिंडोला अस्पताल भवन की छलनी बनी टिन की चादरें वर्तमान में बदली जा रही हैं।
अस्पताल में केवल तीन कक्ष हैं जिसमें एलोपैथिक, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा के डाक्टर बैठते हैं। आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा में यहां के लोगों का रुझान कम देखा गया है। इसके चलते दोनों पैथियों के डॉक्टर यहां माह में फुर्सत से आते हैं। एलोपैथिक चिकित्सा पर यहां लोगों का अधिक विश्वास रहा है।
सड़क से दूर चिकित्सालय होने के कारण गुमदेश के लोग अस्पताल में जाने के बजाय लोहाघाट आना अधिक पसंद करते हैं। चिकित्सालय में आवासीय सुविधा न होने के कारण यहां कोई डाक्टर या अन्य कर्मी नहीं रह पाते हैं।
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अस्पताल में बढ़ती हुई रोगियों की तादाद देखते हुए अतिरिक्त कक्षों, रोगियों के लिए टायलेट के अलावा चार बैड वाले वार्ड रूम की हालत भी ठीक की जानी है। यह वार्ड रूम काफी जीर्ण शीर्ण और असुरक्षित है। वहीं जनसेवा का भाव रखने वाले फार्मासिस्ट मनोज आर्या के आने के बाद रोगियों की तादाद में वृद्धि होने लगी है। एनआरएचएम के सर्वेक्षण में इस अस्पताल को पहली बार 50 हजार रुपये का कायाकल्प प्रोत्साहन पुरस्कार मिला है। अस्पताल में वार्ड ब्वॉय भी नहीं है और यहां का स्वच्छक भी जल्द रिटायर होने वाला है।
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चिकित्सालय में बढ़ रही है रोगियों की संख्या
लोहाघाट (चंपावत)। अस्पताल में फार्मासिस्ट मनोज आर्या के आने से पूर्व यहां 2492 रोगी पंजीकृत थे। वहीं 2017 में यह संख्या बढ़कर 3459 हो गई। वर्ष 2018 में 3544 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 2492 रोगी पंजीकृत हो चुके हैं। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के अभी चार माह शेष है। ब्यूरो