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सड़क का रखरखाव न होने से दिक्कतें
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गलचौड़ा से चौड़ाढेक तक के मोटर मार्ग की दुर्दशा।
- फोटो : CHAMPAWAT
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राज्य बनने के बाद चंपावत जिले में पहला स्टेडियम छमनियांचौड़ में निर्माणाधीन है। इसी स्टेडियम के पास से गुजरने वाली गलचौड़ा- चौड़ाढेक सड़क के हाल खराब हैं। करीब 7.50 किलोमीटर की यह सड़क दो एजेंसियों के जिम्मे होने से सड़क के रखरखाव में दिक्कत हो रही है। सड़क के एकीकरण को लेकर चार साल पूर्व बना प्रस्ताव ठंडे बस्ते में जाने से हालात जस के तस हैं।
सड़क के वन विभाग के हिस्से में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राजीव नवोदय स्कूल, कृषि विज्ञान केंद्र सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों के अलावा एक हजार से अधिक की आबादी वाले खैसकांडे और चौबेगांव गांव भी हैं। सड़क का स्वामित्व दो एजेंसियों के पास होने से रखरखाव में आने वाली अड़चन का असर यहां के लोगों पर पड़ता है। कुछ साल पूर्व कांग्रेस नेता भुवन चौबे सहित कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग वाले हिस्से को लोनिवि को हस्तांतरित करने का पत्र भेजा था। इस पर 2015-16 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए लोनिवि को 17.50 लाख रुपये एनवीए (नेट वैल्यू एमाउंट) के रूप में जमा करने का निर्देश दिया था।
मार्च 2017 में सरकार बदलने के बाद से यह प्रस्ताव एक कदम आगे भी नहीं बढ़ सका है। इसके चलते 7.50 किमी की एक सड़क दो एजेंसियों के पास होने से सड़क के रखरखाव, गुणवत्ता के साथ लोगों को समस्या झेलनी पड़ रही है। इसे ठीक करने की लोगों की मांग पर वन विभाग को 35 लाख रुपये मंजूर किए गए। विभाग ने टेंडर के जरिए इस मार्ग का निर्माण कार्य कराया लेकिन कमतर गुणवत्ता से नाराज लोग एक बार फिर वन विभाग वाले सड़क का स्वामित्व लोनिवि को देने की मांग कर रहे हैं।
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यह है मामला
गलचौड़ा से स्टेडियम तक का हिस्सा आरक्षित वन क्षेत्र में आता है। इसके चलते इस सड़क के निर्माण से लेकर रखरखाव तक का जिम्मा उसी के पास है लेकिन सड़क निर्माण में विशेषज्ञता नहीं होने से वन विभाग के स्वामित्व वाली यह सड़क खस्ताहाल है। वन क्षेत्राधिकारी दीप जोशी का कहना है कि विभाग भी इस सड़क को लोनिवि के हस्तांतरण के पक्ष में है। विभाग के पास सड़क निर्माण की विशेषज्ञता से लेकर संसाधन तक का अभाव है। जबकि स्टेडियम से चौड़ाढेक तक की सड़क का जिम्मा लोनिवि के पास है।
फिलहाल पुराने प्रस्ताव पर अमल नहीं होने से सड़क के वन विभाग वाले हिस्से का स्वामित्व लोनिवि के पास नहीं है जिससे रखरखाव में अड़चन आ रही है। बीसी पंत, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, लोहाघाट खंड।
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सड़क के वन विभाग के हिस्से में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राजीव नवोदय स्कूल, कृषि विज्ञान केंद्र सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों के अलावा एक हजार से अधिक की आबादी वाले खैसकांडे और चौबेगांव गांव भी हैं। सड़क का स्वामित्व दो एजेंसियों के पास होने से रखरखाव में आने वाली अड़चन का असर यहां के लोगों पर पड़ता है। कुछ साल पूर्व कांग्रेस नेता भुवन चौबे सहित कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग वाले हिस्से को लोनिवि को हस्तांतरित करने का पत्र भेजा था। इस पर 2015-16 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए लोनिवि को 17.50 लाख रुपये एनवीए (नेट वैल्यू एमाउंट) के रूप में जमा करने का निर्देश दिया था।
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मार्च 2017 में सरकार बदलने के बाद से यह प्रस्ताव एक कदम आगे भी नहीं बढ़ सका है। इसके चलते 7.50 किमी की एक सड़क दो एजेंसियों के पास होने से सड़क के रखरखाव, गुणवत्ता के साथ लोगों को समस्या झेलनी पड़ रही है। इसे ठीक करने की लोगों की मांग पर वन विभाग को 35 लाख रुपये मंजूर किए गए। विभाग ने टेंडर के जरिए इस मार्ग का निर्माण कार्य कराया लेकिन कमतर गुणवत्ता से नाराज लोग एक बार फिर वन विभाग वाले सड़क का स्वामित्व लोनिवि को देने की मांग कर रहे हैं।
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यह है मामला
गलचौड़ा से स्टेडियम तक का हिस्सा आरक्षित वन क्षेत्र में आता है। इसके चलते इस सड़क के निर्माण से लेकर रखरखाव तक का जिम्मा उसी के पास है लेकिन सड़क निर्माण में विशेषज्ञता नहीं होने से वन विभाग के स्वामित्व वाली यह सड़क खस्ताहाल है। वन क्षेत्राधिकारी दीप जोशी का कहना है कि विभाग भी इस सड़क को लोनिवि के हस्तांतरण के पक्ष में है। विभाग के पास सड़क निर्माण की विशेषज्ञता से लेकर संसाधन तक का अभाव है। जबकि स्टेडियम से चौड़ाढेक तक की सड़क का जिम्मा लोनिवि के पास है।
फिलहाल पुराने प्रस्ताव पर अमल नहीं होने से सड़क के वन विभाग वाले हिस्से का स्वामित्व लोनिवि के पास नहीं है जिससे रखरखाव में अड़चन आ रही है। बीसी पंत, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, लोहाघाट खंड।