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उफ ये सिस्टम : पहाड़ के चार जिलों में 761 मेडिकल स्टोर, औषधि निरीक्षक एक भी नहीं
Sun, 24 Sep 2023 11:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 24 Sep 2023 11:01 PM IST
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चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्वाचन क्षेत्र वाले चंपावत जिले में दवाओं का निगरानी तंत्र ढीलाढाला है। यहां तक कि चंपावत का जिम्मा 167 किलोमीटर दूर ऊधमसिंह नगर के औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) के पास है। यही स्थिति पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले की भी है। इन तीन जिलों का दायित्व नैनीताल के निरीक्षक के पास है।
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि जिले के मेडिकल स्टोर के निरीक्षण या निगरानी के लिए एक भी ड्रग इंस्पेक्टर नहीं है। ऊधमसिंह नगर के औषधि निरीक्षक चंपावत जिले का भी काम देख रहे हैं। जिले में पद खाली होने से क्षेत्र के दवा विक्रेताओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ये हाल सिर्फ चंपावत ही नहीं, कुमाऊं के अन्य पहाड़ी जिलों के भी हैं। चंपावत का जिम्मा यूएस नगर तो वहीं पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले का दायित्व नैनीताल के निरीक्षक के पास है। अधिक दूरी और भौगोलिक कारणों से निगरानी में दिक्कत आती है। पर्वतीय जिलों में 761 मेडिकल स्टोर हैं। ड्रग इंस्पेक्टर की कमी होने से दवा की दुकानों की निगरानी और निरीक्षण पर असर पड़ता है।
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अतिरिक्त जिम्मेदारी के बावजूद समय-समय पर निगरानी और निरीक्षण किया जाता है। सभी मेडिकल स्टोर में नारकोटिक्स दवाओं से लेकर एक्सपाइरी (निर्धारित समय पूरी करने वाली) दवाओं के निस्तारण की व्यवस्था का अवलोकन किया जाता है। सभी मेडिकल स्टोर में सीसीटीवी लगवाए जा रहे हैं। - नीरज कुमार, औषधि निरीक्षक, ऊधमसिंह नगर।
किस जिले में कितने मेडिकल स्टोर
चंपावत 166
पिथौरागढ़ 259
बागेश्वर 85
अल्मोड़ा 251
डॉक्टरविहीन नहीं कोई अस्पताल, दो में फार्मासिस्ट नहीं
चंपावत। चंपावत जिले के 24 सरकारी अस्पतालों में कोई भी अस्पताल डॉक्टरविहीन नहीं है लेकिन दो (तामली और टांण) स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। वैसे जिले के 24 सरकारी अस्पताल और 27 उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के 51 पद हैं लेकिन तैनाती 49 में ही है। वहीं जिले में प्रभारी अधिकारी फार्मेसी और मुख्य फार्मासिस्ट की कुर्सी भी खाली हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि खाली पदों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर कार्य किया जा रहा है। खाली पदों को भरने के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा गया है। संवाद
दो दूरस्थ अस्पतालों की जिम्मेदारी निभा रहे फार्मासिस्ट वर्मा
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र में दो अस्पताल हैं लेकिन फार्मासिस्ट एक। तामली और मंच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर हैं लेकिन दुर्गम श्रेणी के इन दोनों अस्पतालों में फार्मेसी की जिम्मेदारी अकेले फार्मासिस्ट की है। फार्मासिस्ट संजू वर्मा तीन दिन तामली और तीन दिन मंच में सेवा दे रहे हैं। 21 किमी दूर इन दोनों अस्पतालों में वे बखूबी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पूर्व प्रधान विपिन जोशी, शेर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि फार्मासिस्ट वर्मा अपनी सेवा के बल पर मरीजों के लिए मददगार बने हैं। चिकित्सकों के न होने पर भी मरीजों की नब्ज टटोलने के साथ दवा दे रहे हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि उनकी सेवा मरीजों के लिए उपयोगी होने के साथ दूसरों के लिए भी प्रेरणाप्रद है। संवाद
आईपीएचएस मानक लागू होने से उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद समाप्त
पिथौरागढ़। जिले के अस्पतालों में भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) लागू होने से सभी उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद रिक्त हो गए हैं। जबकि उपकेंद्रों में मरीजों की जांच से लेकर दवा वितरण का दायित्व फार्मासिस्ट के ऊपर ही था। ऐसे में वहां पर बिना फार्मासिस्ट के लोगों का इलाज होना संभव नहीं है। जिले के आठ बलॉकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के 84 पदों में से 38 पद रिक्त चल रहे हैं।
आईपीएचएस लागू होने के बाद जिला और महिला अस्पताल एक हो गया है। इसके बाद पूरे अस्पताल में फार्मासिस्ट के पांच ही रह गए हैं। पांच लोगों को ही पुरुष और महिला अस्पताल में काम करना होगा। पूर्व में जिला अस्पताल में मुख्य फार्मासिस्ट समेत 11 फार्मासिस्ट के पद थे।
धारचूला उप जिला चिकित्सालय में मुख्य फार्मासिस्ट समेत तीन, सीएचसी में मुख्य और एक फार्मासिस्ट, पीएचसी में फार्मासिस्ट का एक-एक पद रह गया है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों में फार्मासिस्ट के पद हटा दिए गए हैं। वहां पर सीएचओ की तैनाती कर दी गई है जबकि धारचूला, डीडीहाट सीएचसी में फार्मासिस्ट के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन कार्यरत एक ही है।
आईपीएचएस लागू होने के बाद फार्मासिस्ट के पदों की संख्या कम हो गई है। महिला और जिला अस्पताल एक हो गए हैं। ऐसे में पांच फार्मासिस्ट कितना काम कर पाएंगे। - प्रकाश वर्मा, जिला मंत्री, फार्मासिस्ट एसोसिएशन।
चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दवा वितरण का काम भी करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के हिसाब से पदों की संख्या सृजित की जानी चाहिए। - केएस अधिकारी, वरिष्ठ फार्मासिस्ट।
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सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि जिले के मेडिकल स्टोर के निरीक्षण या निगरानी के लिए एक भी ड्रग इंस्पेक्टर नहीं है। ऊधमसिंह नगर के औषधि निरीक्षक चंपावत जिले का भी काम देख रहे हैं। जिले में पद खाली होने से क्षेत्र के दवा विक्रेताओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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ये हाल सिर्फ चंपावत ही नहीं, कुमाऊं के अन्य पहाड़ी जिलों के भी हैं। चंपावत का जिम्मा यूएस नगर तो वहीं पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले का दायित्व नैनीताल के निरीक्षक के पास है। अधिक दूरी और भौगोलिक कारणों से निगरानी में दिक्कत आती है। पर्वतीय जिलों में 761 मेडिकल स्टोर हैं। ड्रग इंस्पेक्टर की कमी होने से दवा की दुकानों की निगरानी और निरीक्षण पर असर पड़ता है।
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अतिरिक्त जिम्मेदारी के बावजूद समय-समय पर निगरानी और निरीक्षण किया जाता है। सभी मेडिकल स्टोर में नारकोटिक्स दवाओं से लेकर एक्सपाइरी (निर्धारित समय पूरी करने वाली) दवाओं के निस्तारण की व्यवस्था का अवलोकन किया जाता है। सभी मेडिकल स्टोर में सीसीटीवी लगवाए जा रहे हैं। - नीरज कुमार, औषधि निरीक्षक, ऊधमसिंह नगर।
किस जिले में कितने मेडिकल स्टोर
चंपावत 166
पिथौरागढ़ 259
बागेश्वर 85
अल्मोड़ा 251
डॉक्टरविहीन नहीं कोई अस्पताल, दो में फार्मासिस्ट नहीं
चंपावत। चंपावत जिले के 24 सरकारी अस्पतालों में कोई भी अस्पताल डॉक्टरविहीन नहीं है लेकिन दो (तामली और टांण) स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। वैसे जिले के 24 सरकारी अस्पताल और 27 उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के 51 पद हैं लेकिन तैनाती 49 में ही है। वहीं जिले में प्रभारी अधिकारी फार्मेसी और मुख्य फार्मासिस्ट की कुर्सी भी खाली हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि खाली पदों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर कार्य किया जा रहा है। खाली पदों को भरने के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा गया है। संवाद
दो दूरस्थ अस्पतालों की जिम्मेदारी निभा रहे फार्मासिस्ट वर्मा
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र में दो अस्पताल हैं लेकिन फार्मासिस्ट एक। तामली और मंच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर हैं लेकिन दुर्गम श्रेणी के इन दोनों अस्पतालों में फार्मेसी की जिम्मेदारी अकेले फार्मासिस्ट की है। फार्मासिस्ट संजू वर्मा तीन दिन तामली और तीन दिन मंच में सेवा दे रहे हैं। 21 किमी दूर इन दोनों अस्पतालों में वे बखूबी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पूर्व प्रधान विपिन जोशी, शेर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि फार्मासिस्ट वर्मा अपनी सेवा के बल पर मरीजों के लिए मददगार बने हैं। चिकित्सकों के न होने पर भी मरीजों की नब्ज टटोलने के साथ दवा दे रहे हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि उनकी सेवा मरीजों के लिए उपयोगी होने के साथ दूसरों के लिए भी प्रेरणाप्रद है। संवाद
आईपीएचएस मानक लागू होने से उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद समाप्त
पिथौरागढ़। जिले के अस्पतालों में भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) लागू होने से सभी उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद रिक्त हो गए हैं। जबकि उपकेंद्रों में मरीजों की जांच से लेकर दवा वितरण का दायित्व फार्मासिस्ट के ऊपर ही था। ऐसे में वहां पर बिना फार्मासिस्ट के लोगों का इलाज होना संभव नहीं है। जिले के आठ बलॉकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के 84 पदों में से 38 पद रिक्त चल रहे हैं।
आईपीएचएस लागू होने के बाद जिला और महिला अस्पताल एक हो गया है। इसके बाद पूरे अस्पताल में फार्मासिस्ट के पांच ही रह गए हैं। पांच लोगों को ही पुरुष और महिला अस्पताल में काम करना होगा। पूर्व में जिला अस्पताल में मुख्य फार्मासिस्ट समेत 11 फार्मासिस्ट के पद थे।
धारचूला उप जिला चिकित्सालय में मुख्य फार्मासिस्ट समेत तीन, सीएचसी में मुख्य और एक फार्मासिस्ट, पीएचसी में फार्मासिस्ट का एक-एक पद रह गया है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों में फार्मासिस्ट के पद हटा दिए गए हैं। वहां पर सीएचओ की तैनाती कर दी गई है जबकि धारचूला, डीडीहाट सीएचसी में फार्मासिस्ट के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन कार्यरत एक ही है।
आईपीएचएस लागू होने के बाद फार्मासिस्ट के पदों की संख्या कम हो गई है। महिला और जिला अस्पताल एक हो गए हैं। ऐसे में पांच फार्मासिस्ट कितना काम कर पाएंगे। - प्रकाश वर्मा, जिला मंत्री, फार्मासिस्ट एसोसिएशन।
चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दवा वितरण का काम भी करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के हिसाब से पदों की संख्या सृजित की जानी चाहिए। - केएस अधिकारी, वरिष्ठ फार्मासिस्ट।