{"_id":"631cd177140a80718f5b6776","slug":"patients-admitted-to-district-hospital-have-food-cravings-champawat-news-hld475291882","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन के लाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन के लाले
विज्ञापन
चंपावत जिला अस्पताल का बंद आईसीयू। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन के लाले पड़ गए हैं। इसके अलावा तीन आईसीयू और दो ट्रामा सेंटर होने के बावजूद एक का भी संचालन नहीं हो पा रहा है।
उत्तराखंड के 13 जिला अस्पतालों में से चंपावत को छोड़ अन्य सभी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था है। चंपावत में पिछले दो साल से यह सुविधा नहीं मिल रही है। सिर्फ गर्भवती महिलाओं को ही जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत खाना दिया जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार हेमा छह दिन से अस्पताल में भर्ती है। कई दवाएं अस्पताल तो दूर मेडिकल स्टोर में भी नहीं मिल रही हैं। परिजन कहते हैं कि ऐसी दवाओं को रुद्रपुर और दिल्ली से मंगा रहे हैं। साथ ही बीमार हेमा के लिए भोजन की व्यवस्था भी बाहर से करनी पड़ रही है।
कमोबेश ऐसे ही हाल तीन दिन से भर्ती बड़ोली गांव की ममता के हैं। भर्ती मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था परिजन बाहर से करते हैं। तीमारदारों का कहना है कि भोजन के लिए बाहर जाने से समय और धन खर्च होने के साथ ही मरीज को भी अकेला छोड़ना पड़ता है। वहीं पीएमएच डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि भर्ती मरीजों की भोजन व्यवस्था दो साल से नहीं हो पा रही है। जीएसटी से संबंधित विवाद की वजह से भोजन की आपूर्तिकर्ता का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
चंपावत जिले की बीमार स्वास्थ्य सेवा
-जिला अस्पताल सहित चंपावत जिले के तीनों आईसीयू में ताला।
-जिले के दोनों ट्रामा सेंटरों में से एक का भी संचालन नहीं।
-जिला अस्पताल सहित जिले में कहीं भी ऑपरेशन के जरिये प्रसव की सुविधा 19 अगस्त से बंद है।
-नवंबर 2021 को लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल से एमओयू होने के बाद जिला अस्पताल में टेलीमेडिसिन सेवा शुरू नहीं हो सकी।
-हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित निशुल्क डायलिसिस सेवा भी पेयजल व्यवस्था न होने से 24 अगस्त को बंद रही।
-रीठा साहिब की 108 एंबुलेंस सेवा दो माह में तीन बार खराब हो चुकी है।
-जिले के किसी भी अस्पताल में फिजिशियन, ईएनटी, यूरोलॉजिस्ट, चर्म रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन नहीं है।
भोजन आपूर्तिकर्ता का जीएसटी से संबंधित विवाद होने से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन नहीं मिल रहा है। पुराना आपूर्तिकर्ता भोजन व्यवस्था में सक्षम न होने पर नए आपूर्तिकर्ता के जरिये भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था तुरंत कराने के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था है। ये व्यवस्था जिला अस्पताल की चिकित्सा प्रबंधन समिति करती है। चंपावत में इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है प्रबंधन समिति से पता किया जाएगा।
-शैलजा भट्ट, स्वास्थ्य महानिदेशक, उत्तराखंड।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। चंपावत जिले में गायनाकोलॉजिस्ट के संबद्धीकरण के आदेश हुए हैं। आईसीयू और ट्रामा सेंटर के संचालन के लिए स्टाफ का आग्रह किया गया है। -डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
विज्ञापन
उत्तराखंड के 13 जिला अस्पतालों में से चंपावत को छोड़ अन्य सभी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था है। चंपावत में पिछले दो साल से यह सुविधा नहीं मिल रही है। सिर्फ गर्भवती महिलाओं को ही जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत खाना दिया जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार हेमा छह दिन से अस्पताल में भर्ती है। कई दवाएं अस्पताल तो दूर मेडिकल स्टोर में भी नहीं मिल रही हैं। परिजन कहते हैं कि ऐसी दवाओं को रुद्रपुर और दिल्ली से मंगा रहे हैं। साथ ही बीमार हेमा के लिए भोजन की व्यवस्था भी बाहर से करनी पड़ रही है।
विज्ञापन
कमोबेश ऐसे ही हाल तीन दिन से भर्ती बड़ोली गांव की ममता के हैं। भर्ती मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था परिजन बाहर से करते हैं। तीमारदारों का कहना है कि भोजन के लिए बाहर जाने से समय और धन खर्च होने के साथ ही मरीज को भी अकेला छोड़ना पड़ता है। वहीं पीएमएच डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि भर्ती मरीजों की भोजन व्यवस्था दो साल से नहीं हो पा रही है। जीएसटी से संबंधित विवाद की वजह से भोजन की आपूर्तिकर्ता का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
चंपावत जिले की बीमार स्वास्थ्य सेवा
-जिला अस्पताल सहित चंपावत जिले के तीनों आईसीयू में ताला।
-जिले के दोनों ट्रामा सेंटरों में से एक का भी संचालन नहीं।
-जिला अस्पताल सहित जिले में कहीं भी ऑपरेशन के जरिये प्रसव की सुविधा 19 अगस्त से बंद है।
-नवंबर 2021 को लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल से एमओयू होने के बाद जिला अस्पताल में टेलीमेडिसिन सेवा शुरू नहीं हो सकी।
-हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित निशुल्क डायलिसिस सेवा भी पेयजल व्यवस्था न होने से 24 अगस्त को बंद रही।
-रीठा साहिब की 108 एंबुलेंस सेवा दो माह में तीन बार खराब हो चुकी है।
-जिले के किसी भी अस्पताल में फिजिशियन, ईएनटी, यूरोलॉजिस्ट, चर्म रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन नहीं है।
भोजन आपूर्तिकर्ता का जीएसटी से संबंधित विवाद होने से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन नहीं मिल रहा है। पुराना आपूर्तिकर्ता भोजन व्यवस्था में सक्षम न होने पर नए आपूर्तिकर्ता के जरिये भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था तुरंत कराने के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था है। ये व्यवस्था जिला अस्पताल की चिकित्सा प्रबंधन समिति करती है। चंपावत में इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है प्रबंधन समिति से पता किया जाएगा।
-शैलजा भट्ट, स्वास्थ्य महानिदेशक, उत्तराखंड।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। चंपावत जिले में गायनाकोलॉजिस्ट के संबद्धीकरण के आदेश हुए हैं। आईसीयू और ट्रामा सेंटर के संचालन के लिए स्टाफ का आग्रह किया गया है। -डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।