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पेपर लीक मामला: एसटीएफ ने लोहाघाट से एक शिक्षक को हिरासत में लिया
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चंपावत। उत्तराखंड राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) के पेपर लीक मामले में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने लोहाघाट क्षेत्र से एक शिक्षक को हिरासत में लिया है। पकड़ा गया शिक्षक पाटी ब्लॉक के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। इस शिक्षक के पेपर लीक करने वाले गिरोह से तार जुड़े बताए जा रहे हैं। फिलहाल एसटीएफ की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है। एसपी देवेंद्र पींचा ने फिलहाल इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार किया है।
सूत्रों के मुताबिक शनिवार शाम एसटीएफ कुमाऊं ने लोहाघाट क्षेत्र में दस्तक दी। एसटीएफ ने सीधे आरोपी के घर जाकर मूल नैनीताल जिले के ओखलकांडा निवासी शिक्षक को उठा लिया। बताया कि एसटीएफ की टीम आरोपी को पूछताछ के लिए अज्ञात जगह ले गई है। शिक्षक पेपर लीक करने वाले गिरोह के संपर्क में कैसे आया? क्या क्षेत्र के और भी लोग इस मामले में शामिल हैं? कितने लोगों को पेपर लीक कराया? जैसे कई सवालों के जवाब की तलाश एसटीएफ कर रही है। सूत्र बताते हैं कि हिरासत में लिए गए आरोपी के मोबाइल फोन की तलाश की जा रही है। गायब मोबाइल फोन को इस मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है।
दस साल पहले भी पेपर लीक मामले में दबोचा जा चुका है आरोपी
चंपावत। एसटीएफ ने जिस आरोपी अध्यापक को शनिवार को यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में दबोचा है, उस पर पहले भी इस तरह की करतूतों में लिप्तता का आरोप लगा है। वर्ष 2012-2013 में भी इस शिक्षक को नैनीताल पुलिस ने हल्द्वानी के एक होटल से पेपर लीक मामले में संदिग्ध भूमिका के चलते दबोचा था। बाद में सबूत नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया था।
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मौखिक होता था पेपर लीक करने का काम!
चंपावत। पेपर लीक कराने में आरोपी बेहद शातिराना ढंग से काम को अंजाम देता था। सूत्र बताते हैं कि पेपर लीक करने के बावजूद सबूत नहीं छोड़ा जाता था। प्रश्नपत्र की जानकारी देने में किसी भी तरह की हार्ड कॉपी या साक्ष्य का उपयोग नहीं किया जाता था। पेपर लीक करने के सारे काम को मौखिक अंजाम दिया गया। सूत्रों के मुताबिक परीक्षा के अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से संपर्क साधा जाता था जो अभ्यर्थी इसके लिए तैयार होते थे, उन्हें एजेंट के जरिए वाहन से ले जाया जाता। कई बार बीच में वाहन और एजेंट भी बदल दिए जाते थे। पेपर होने से कुछ घंटे पहले अभ्यर्थियों को होटल ले जाया जाता जहां फोन से प्रश्न और उत्तर बताए जाते। इसके बाद ऐसे अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता था।
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सूत्रों के मुताबिक शनिवार शाम एसटीएफ कुमाऊं ने लोहाघाट क्षेत्र में दस्तक दी। एसटीएफ ने सीधे आरोपी के घर जाकर मूल नैनीताल जिले के ओखलकांडा निवासी शिक्षक को उठा लिया। बताया कि एसटीएफ की टीम आरोपी को पूछताछ के लिए अज्ञात जगह ले गई है। शिक्षक पेपर लीक करने वाले गिरोह के संपर्क में कैसे आया? क्या क्षेत्र के और भी लोग इस मामले में शामिल हैं? कितने लोगों को पेपर लीक कराया? जैसे कई सवालों के जवाब की तलाश एसटीएफ कर रही है। सूत्र बताते हैं कि हिरासत में लिए गए आरोपी के मोबाइल फोन की तलाश की जा रही है। गायब मोबाइल फोन को इस मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है।
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दस साल पहले भी पेपर लीक मामले में दबोचा जा चुका है आरोपी
चंपावत। एसटीएफ ने जिस आरोपी अध्यापक को शनिवार को यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में दबोचा है, उस पर पहले भी इस तरह की करतूतों में लिप्तता का आरोप लगा है। वर्ष 2012-2013 में भी इस शिक्षक को नैनीताल पुलिस ने हल्द्वानी के एक होटल से पेपर लीक मामले में संदिग्ध भूमिका के चलते दबोचा था। बाद में सबूत नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया था।
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मौखिक होता था पेपर लीक करने का काम!
चंपावत। पेपर लीक कराने में आरोपी बेहद शातिराना ढंग से काम को अंजाम देता था। सूत्र बताते हैं कि पेपर लीक करने के बावजूद सबूत नहीं छोड़ा जाता था। प्रश्नपत्र की जानकारी देने में किसी भी तरह की हार्ड कॉपी या साक्ष्य का उपयोग नहीं किया जाता था। पेपर लीक करने के सारे काम को मौखिक अंजाम दिया गया। सूत्रों के मुताबिक परीक्षा के अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से संपर्क साधा जाता था जो अभ्यर्थी इसके लिए तैयार होते थे, उन्हें एजेंट के जरिए वाहन से ले जाया जाता। कई बार बीच में वाहन और एजेंट भी बदल दिए जाते थे। पेपर होने से कुछ घंटे पहले अभ्यर्थियों को होटल ले जाया जाता जहां फोन से प्रश्न और उत्तर बताए जाते। इसके बाद ऐसे अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता था।