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ओवरलोड खनन करने वाले वाहनों ने बर्बाद कर डाली निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी सड़क
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दियूरी में अवैध खनन में दबोचा गया टिपर।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगी टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) सड़क सीमांत की सुरक्षा और एसएसबी की बीओपी को आधारभूत सुविधा मुहैय्या करने के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन इस सड़क का पहला पैकेज (ठुलीगाड़-चूका) पूरा होने से पहले ही टूटने के कगार पर है। सड़क की इस दुर्दशा के लिए निर्माणदायी संस्था की कमी नहीं, बल्कि यहां से गुजरने वाले खनन के ओवरलोड वाहन जिम्मेदार हैं। पीआईयू और सड़क बना रही कंपनी ने प्रशासन से यह शिकायत की है।
टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि टीजे मार्ग का पहला पैकेज इस साल मार्च तक पूरा करना है। इस अवधि में तीन नालों में से भवानी नाले (90 मीटर) को छोड़ लादीगाड़ और गौजी नाले (24-24 मीटर) के पुल भी पूरे होने हैं। 67 करोड़ रुपये की लागत से बन रही ठुलीगाड़ से चूका तक 17.875 किमी सड़क में 13 किमी काम पूरा हो चुका है। लेकिन इस सड़क पर चामीगाड़ से कलढुंगा के बीच 11 जगह सड़क धंस चुकी है, साथ ही तारकोल भी टूट चुका है। काम करा रही कंपनी आरजीबीएल के प्रतिनिधि कौशल चौहान ने पत्र के साथ बाकायदा वीडियो और तस्वीरें भी पीआईयू को भेजी है। पीआईयू के अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत रियासीबमन और मोस्टा क्षेत्र से हो रहे खनन में जबर्दस्त ओवरलोडिंग की वजह से सड़क टूट रही है। प्रशासन को भेजे पत्र में ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का आग्रह किया गया है।
अधिकांश वाहनों में क्षमता से 70 प्रतिशत ज्यादा हो रहा ढुलान
चंपावत। खनन उप निदेशक राजपाल लेघा ने बताया कि उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत रियासी बमनगांव और मोस्टा में नदी के किनारे से आरबीएम (कच्चा उप खनिज) और मलबे के निस्तारण की अनुमति दी गई है। इसके तहत ढाई लाख मीट्रिक टन का खनन होना है। इससे राजकोष को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की आमदनी हुई है।
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यहां से होने वाले खनन को शक्तिमान और डंपर निर्माणाधीन चूका सड़क से ले जाया जाता है। हर दिन इस सड़क पर 750 से अधिक वाहन खनन सामग्री की निकासी रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर वाहन रवन्ना में दर्ज मात्रा से 50 से 70 प्रतिशत अधिक सामग्री ढो रहे हैं। इससे सड़क को नुकसान होने के साथ राजस्व को भी चूना लग रहा है। जबकि चूका से टनकपुर पहुंचने के मार्ग पर ठुलीगाड़ पुलिस चौकी के अलावा ककरालीगेट में पुलिस बैरियर और वन विभाग का बैरियर भी पड़ता है। प्रशासन के औचक मुआयने में भी ओवरलोड की तस्दीक हुई है और कई बार चालान भी किए गए। बताया जाता है कि ओवरलोड के खनन में दबंगों के शामिल होने से कार्रवाई में भी कई मुश्किलें पेश आ रही हैं। (ब्यूरो)
कोट
ओवरलोडिंग की वजह से निर्माणाधीन सड़क के टूटने की लिखित शिकायत मिली है। इसे गंभीरता से लेते हुए खनन उप निदेशक और पुलिस को प्रभावी कार्यवाही करने की हिदायत दी गई है।
सुरेंद्र नारायण पांडेय,
डीएम, चंपावत।
ओवरलोड खनिज ढुलान से निर्माणाधीन टीजे रोड को हो रहा नुकसान
टनकपुर (चंपावत)। डंपरों में ओवर लोड खनिज सामग्री ढोने से निर्माणाधीन टीजे सड़क को हो रहे नुकसान को देखते हुए बृहस्पतिवार को एसडीएम हिमांशु कफल्टिया और नायब तहसीलदार पिंकी आर्या ने पूर्णागिरि मार्ग पर चेकिंग कर पांच ओवर लोड डंपरों के चालान काटे हैं। प्रशासन की कार्रवाई से ओवरलोड खनिज ढो रहे डंपर चालकों और मालिकों में हड़कंप मचा है।
एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि चेकिंग के दौरान पांच डंपरों में ओवरलोड खनिज सामग्री मिली है। इन पांचों डंपरों के ओवरलोडिंग में चालान किए गए हैं। एसडीएम ने कहा है कि ओवरलोड खनिज निकासी के खिलाफ नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
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टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि टीजे मार्ग का पहला पैकेज इस साल मार्च तक पूरा करना है। इस अवधि में तीन नालों में से भवानी नाले (90 मीटर) को छोड़ लादीगाड़ और गौजी नाले (24-24 मीटर) के पुल भी पूरे होने हैं। 67 करोड़ रुपये की लागत से बन रही ठुलीगाड़ से चूका तक 17.875 किमी सड़क में 13 किमी काम पूरा हो चुका है। लेकिन इस सड़क पर चामीगाड़ से कलढुंगा के बीच 11 जगह सड़क धंस चुकी है, साथ ही तारकोल भी टूट चुका है। काम करा रही कंपनी आरजीबीएल के प्रतिनिधि कौशल चौहान ने पत्र के साथ बाकायदा वीडियो और तस्वीरें भी पीआईयू को भेजी है। पीआईयू के अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत रियासीबमन और मोस्टा क्षेत्र से हो रहे खनन में जबर्दस्त ओवरलोडिंग की वजह से सड़क टूट रही है। प्रशासन को भेजे पत्र में ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का आग्रह किया गया है।
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अधिकांश वाहनों में क्षमता से 70 प्रतिशत ज्यादा हो रहा ढुलान
चंपावत। खनन उप निदेशक राजपाल लेघा ने बताया कि उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत रियासी बमनगांव और मोस्टा में नदी के किनारे से आरबीएम (कच्चा उप खनिज) और मलबे के निस्तारण की अनुमति दी गई है। इसके तहत ढाई लाख मीट्रिक टन का खनन होना है। इससे राजकोष को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की आमदनी हुई है।
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यहां से होने वाले खनन को शक्तिमान और डंपर निर्माणाधीन चूका सड़क से ले जाया जाता है। हर दिन इस सड़क पर 750 से अधिक वाहन खनन सामग्री की निकासी रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर वाहन रवन्ना में दर्ज मात्रा से 50 से 70 प्रतिशत अधिक सामग्री ढो रहे हैं। इससे सड़क को नुकसान होने के साथ राजस्व को भी चूना लग रहा है। जबकि चूका से टनकपुर पहुंचने के मार्ग पर ठुलीगाड़ पुलिस चौकी के अलावा ककरालीगेट में पुलिस बैरियर और वन विभाग का बैरियर भी पड़ता है। प्रशासन के औचक मुआयने में भी ओवरलोड की तस्दीक हुई है और कई बार चालान भी किए गए। बताया जाता है कि ओवरलोड के खनन में दबंगों के शामिल होने से कार्रवाई में भी कई मुश्किलें पेश आ रही हैं। (ब्यूरो)
कोट
ओवरलोडिंग की वजह से निर्माणाधीन सड़क के टूटने की लिखित शिकायत मिली है। इसे गंभीरता से लेते हुए खनन उप निदेशक और पुलिस को प्रभावी कार्यवाही करने की हिदायत दी गई है।
सुरेंद्र नारायण पांडेय,
डीएम, चंपावत।
ओवरलोड खनिज ढुलान से निर्माणाधीन टीजे रोड को हो रहा नुकसान
टनकपुर (चंपावत)। डंपरों में ओवर लोड खनिज सामग्री ढोने से निर्माणाधीन टीजे सड़क को हो रहे नुकसान को देखते हुए बृहस्पतिवार को एसडीएम हिमांशु कफल्टिया और नायब तहसीलदार पिंकी आर्या ने पूर्णागिरि मार्ग पर चेकिंग कर पांच ओवर लोड डंपरों के चालान काटे हैं। प्रशासन की कार्रवाई से ओवरलोड खनिज ढो रहे डंपर चालकों और मालिकों में हड़कंप मचा है।
एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि चेकिंग के दौरान पांच डंपरों में ओवरलोड खनिज सामग्री मिली है। इन पांचों डंपरों के ओवरलोडिंग में चालान किए गए हैं। एसडीएम ने कहा है कि ओवरलोड खनिज निकासी के खिलाफ नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।