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Uttarakhand: गुलाब और लिलियम के फूलों की खुशबू से महक रहा हमारा चंपावत, इनकी खेती बदल रही किसानों की तकदीर
Tue, 13 Aug 2024 01:25 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत
अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत
Updated Tue, 13 Aug 2024 01:25 PM IST
सार
चंपावत जिले में उद्यान विभाग के सहयोग से हर साल फूलों की खेती का उत्पादन बढ़ रहा है। काश्तकार अब फूलों की मांग पर गुलाब, कारनेशन, लीलियम, ग्लाइडोलिया समेत अन्य फूलों की खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
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चंपावत के लोहाघाट में लिलियम के लहलहाते फूल। संवाद
विस्तार
चंपावत जिले में उद्यान विभाग के सहयोग से हर साल फूलों की खेती का उत्पादन बढ़ रहा है। काश्तकार अब फूलों की मांग पर गुलाब, कारनेशन, लीलियम, ग्लाइडोलिया समेत अन्य फूलों की खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। जिले में सबसे अधिक 2.75 हेक्टेयर में लिलियम की खेती की जा रही है।
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तीन साल पहले जिले में कही भी फूलों की खेती नहीं की जाती थी। अब जैसे ही शादी समारोह, जन्मदिन, धार्मिक अनुष्ठान में सजावट के लिए फूलों की मांग बढ़ी तो उद्यान विभाग ने नर्सरी में पौधे उगाए और किसानों को फूलों की खेती के प्रति जागरूक किया। अब चंपावत जिले में फूलों का काफी मात्रा में उत्पादन हो रहा है।
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इतने हेक्टेयर में हो रही खेती
जिले में लिलियम की खेती 2.75 हेक्टेयर, ग्लेडियोलस की खेती 0.2 हेक्टेयर, स्टोमा गुलाब की 0.20 हेक्टेयर, कारनेशन की खेती 0.15 और अन्य फूलों की खेती 2.20 हेक्टेयर में की जा रही है। मांग के हिसाब से सबसे पहले लिलियम फूल की खेती की गई। लिलियम की खेती की एक बार ग्राफ (खेती) हो चुकी है। अब दूसरा ग्राफ चल रहा है।
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शादी के सीजन में फूलों की अधिक मांग
जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि शादी के सीजन में फूलों के दाम अच्छे मिलते है। लिलियम की एक स्टीक 40 से 50 रुपये में बिकती है। वर्तमान में पाटन पाटनी में एक नए दर्शिका पुष्प का उत्पादन नर्सरी में कर रहे हैं। नर्सरी में चार किसानों की मांग के अनुसार पौध तैयार की जा रही है। बताया कि तीन महीने में तैयार हो जाएगा और एक फूल 25 से 30 रुपये में बिकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रदेश में पुष्प उत्पादन में चंपावत जिले को पहला, दूसरा और तीसरा स्थान मिला था।
उद्यान विभाग की मदद से लिलियम की खेती का काम अच्छा चल रहा है। सालाना 40 लाख से अधिक की आय हो रही है। इससे आर्थिक स्थिति में सुधारा आया है।
- घनश्याम जोशी, देवीधुरा।
फूलों की खेती जब से शुरू की है, तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा है। लिलियम के साथ ही अन्य फूलों की खेती कर अच्छी आय हो रही है। अन्य लोगों को भी उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।
- डॉ. राजीव, चंपावत।
जिले में लगभग पांच हेक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है। तीन साल पहले चंपावत में फूलों की खेती नहीं होती थी। फूलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए काश्तकारों को भी प्रेरित किया जा रहा है।
- टीएन पांडे जिला, उद्यान अधिकारी, चंपावत