{"_id":"5eb54e658ebc3e909943aa64","slug":"one-family-in-three-places55","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना का प्रभाव : पिता गुजरात, भाई सऊदी अरब और खुद दिल्ली में फंसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना का प्रभाव : पिता गुजरात, भाई सऊदी अरब और खुद दिल्ली में फंसे
Fri, 08 May 2020 05:49 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत
Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 05:49 PM IST
विज्ञापन
corona sample
- फोटो : PTI
शुक्रवार को चंपावत पहुंचने पर संजय बड़ेला की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गुरुग्राम से यहां पहुंचे इस युवा को इस बात की कतई दिक्कत नहीं है कि उन्हें 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया। चंपावत में पढ़ाई करते हुए गुरुग्राम में नौकरी करने वाले संजय कहते हैं कि यहां आकर दिल्ली की दुश्वारियों से उन्हें निजात मिल जाएगा।
दिल्ली सरकार के मदद के दावे जमीनी सच से मेल नहीं खाते। उनके परिवार के दो अन्य सदस्य दो और जगह फंसे हुए हैं। संजय बड़ेला इस साल के शुरू में होटल में नौकरी करने दिल्ली गए। लॉकडाउन के बाद 25 मार्च से उनकी मुसीबतें बढ़ने लगीं। होटल में ही भोजन करने के चलते उनके सम्मुख कमरे में खाना बनाने की चुनौती आई।
उन्होंने इंडेक्शन चूल्हा लेकर इस पूरी अवधि में चावल-दाल से गुजारा किया। काम बंद होने से इस दौरान जेब भी खाली हो गई। बताते हैं कि सरकार की अपील के बावजूद मकान मालिक ने किराया भी वसूल लिया। पिता गणेश बड़ेला गुजरात में एक कंपनी में काम करते हैं, लेकिन लॉकडाउन से काम बंद होने से वे भी वहां फंसे हुए हैं।
विज्ञापन
बड़ा भाई महिपाल फरवरी में ही सऊदी अरब गया और वह भी वहीं फंसा है। भारत आने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन इजाजत नहीं मिली। अलबत्ता संजय बड़ेला गुरुग्राम से चंपावत पहुंचने पर खुश हैं। कहते हैं अब पिता के भी जल्द ही आने की उम्मीद है। यहां से वह भाई को सऊदी अरब से भारत लाने के लिए सांसद व प्रशासन के जरिए पहल करेंगे।
विज्ञापन
दिल्ली सरकार के मदद के दावे जमीनी सच से मेल नहीं खाते। उनके परिवार के दो अन्य सदस्य दो और जगह फंसे हुए हैं। संजय बड़ेला इस साल के शुरू में होटल में नौकरी करने दिल्ली गए। लॉकडाउन के बाद 25 मार्च से उनकी मुसीबतें बढ़ने लगीं। होटल में ही भोजन करने के चलते उनके सम्मुख कमरे में खाना बनाने की चुनौती आई।
विज्ञापन
उन्होंने इंडेक्शन चूल्हा लेकर इस पूरी अवधि में चावल-दाल से गुजारा किया। काम बंद होने से इस दौरान जेब भी खाली हो गई। बताते हैं कि सरकार की अपील के बावजूद मकान मालिक ने किराया भी वसूल लिया। पिता गणेश बड़ेला गुजरात में एक कंपनी में काम करते हैं, लेकिन लॉकडाउन से काम बंद होने से वे भी वहां फंसे हुए हैं।
विज्ञापन
बड़ा भाई महिपाल फरवरी में ही सऊदी अरब गया और वह भी वहीं फंसा है। भारत आने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन इजाजत नहीं मिली। अलबत्ता संजय बड़ेला गुरुग्राम से चंपावत पहुंचने पर खुश हैं। कहते हैं अब पिता के भी जल्द ही आने की उम्मीद है। यहां से वह भाई को सऊदी अरब से भारत लाने के लिए सांसद व प्रशासन के जरिए पहल करेंगे।