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Champawat News: अमोड़ी सबस्टेशन बनने में जमीन न मिलने की बाधा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Jan 2023 11:24 PM IST
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Obstacles of non-availability of land in construction of Amodi substation
चंपावत। जिला मुख्यालय से 29 किमी दूर अमोड़ी में स्वीकृत विद्युत सबस्टेशन के लिए जमीन मिलना चुनौती बन गया है। जमीन नहीं मिलने से सबस्टेशन नहीं बन पा रहा है। एक ही फीडर पर लोड पड़ने से क्षेत्र के 75 गांवों के करीब 17 हजार लोगों की अबाध बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
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नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के तामली से लेकर नैनीताल सीमा से लगे तल्लापाल के ककनई आदि क्षेत्र के करीब 200 किलोमीटर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति का जिम्मा चंपावत सबस्टेशन के चल्थी फीडर पर है। फीडर वितरण सब स्टेशन से बिजली ट्रांसफार्मर तक बिजली स्थानांतरित करने वाली वोल्टेज पावर लाइन है। इस पूरे इलाके में न केवल लंबा क्षेत्र है, बल्कि जंगल और विषम भौगोलिक हालात भी हैं। एक जगह मामूली खामी होने पर भी समूचे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोग अंधेरे में रहते हैं।
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इस दिक्कत को दूर करने के लिए यहां से 29 किलोमीटर दूर अमोड़ी क्षेत्र में पिछले साल बिजली सबस्टेशन स्वीकृत हुआ। लेकिन सबस्टेशन की राह में जमीन का नहीं मिलना सबसे बड़ी अड़चन बन गया है। ऊर्जा निगम के जेई आरसी पंत का कहना है कि कई जगह तलाश करने के बाद भी अमोड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सब स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल पा रही है। जबकि जमीन के लिए निगम सरकारी दर पर भुगतान भी करेगा। संवाद
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मुख्य रूप से प्रभावित क्षेत्र:
नेपाल सीमा से लगा तल्लादेश के तामली, मंच क्षेत्र, नैनीताल सीमा से लगा डांडा, ककनई, बुड़म, सूखीढांग, अमोड़ी, वैला, खटोली, स्वांला, चल्थी, धौन, दियूरी आदि।
अमोड़ी सबस्टेशन से होंगे ये लाभ
चंपावत। जिले में वर्तमान में ऊर्जा निगम के टनकपुर, बनबसा, चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान, बाराकोट और देवीधुरा सबस्टेशन हैं। जिले के सबसे बड़े ब्लॉक चंपावत के पहाड़ी हिस्से का अकेला सबस्टेशन चंपावत में है। अमोड़ी सब स्टेशन होने से एक जगह खामी होने से पूरे ग्रामीण क्षेत्र की बिजली गुल नहीं होगी, बार-बार शट डाउन नहीं लेना पड़ेगा। लंबी लाइन की वजह से होने वाली लो-वोल्टेज से भी निजात मिलेगी।
अमोड़ी में सबस्टेशन पिछले साल स्वीकृत हुआ था। इसके निर्माण के लिए निगम को दस नाली जमीन चाहिए। लेकिन भूमि नहीं मिलने से आगे की प्रक्रिया लटकी है। सरकारी या निजी जमीन मिलने पर काम शुरू हो सकेगा।

- एसके गुप्ता, ईई, ऊर्जा निगम, चंपावत खंड।
चंपावत में है चार हजार किलोमीटर लंबी लाइन
चंपावत। चंपावत जिले के सभी 653 गांवों में बिजली का उजाला है, लेकिन खामी होने पर दूरदराज के गांवों में इसे ठीक करना कई बार चुनौती रहता है। इसकी वजह यहां के भौगोलिक हालात से लेकर लाइनमैन और फील्ड स्टाफ की कमी है। चंपावत खंड में 4282 किलोमीटर (11 केवी, 33 केवी और एलटी लाइन) लंबी लाइन की मरम्मत और देखरेख के लिए महज 90 लाइनमैन और तकनीकी कर्मी हैं।
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