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पढ़ाने को प्रवक्ता नहीं, नाम आदर्श स्कूल

Thu, 12 Apr 2018 10:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत। Updated Thu, 12 Apr 2018 10:28 PM IST
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Not to be a spokesman, Name Adarsh School
चंपावत जीआईसी में कक्षा 12 की क्लास में अध्ययनरत बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
 जिला मुख्यालय का जीआईसी चार आदर्श जीआईसी में शुमार है, लेकिन यहां नाम को छोड़ कुछ भी आदर्श नहीं है। न छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रवक्ता ही पूरे हैं और न ही स्कूल के लिपिकीय काम के लिए कर्मचारी ही हैं। ऊपर से अतिथि शिक्षकों को नए शिक्षा सत्र से बाहर का रास्ता दिखाने से हालात और बदतर हो रहे हैं।  
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चंपावत के आदर्श जीआईसी में 383 छात्रों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं है। 11 के सापेक्ष महज पांच प्रवक्ताओं से काम चल रहा है। इंटरमीडिएट के जीव विज्ञान, रसायन शास्त्र, वाणिज्य, भूगोल, हिंदी व संस्कृत छात्रों को पढ़ाने के लिए एक भी प्रवक्ता नहीं है। पिछले शिक्षा सत्र तक अतिथि शिक्षकों के जरिये इन विषयों को पढ़ाया जा रहा था। लेकिन इस माह से अतिथि शिक्षकों को बाहर कर दिया गया है।
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अब इन विषयों में इंटर के छात्रों की पढ़ाई लटक गई है। अलबत्ता कभी-कभार एलटी शिक्षकों के जरिए काम चलाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि आदर्श स्कूल में भी शिक्षकों के सभी पदों का न भर पाना सरकारी स्कूलों की उपेक्षा को दर्शा रहा है। इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों ने जल्द से जल्द इन पदों को भरने की मांग की है।  
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बाबूगिरि करने को मजबूर शिक्षक  
आदर्श जीआईसी के कार्यालयी काम के लिए स्टाफ ही नहीं है। लिपिकों के दो पद हैं, लेकिन दोनों कुर्सियां पिछले साल सितंबर से खाली हैं। और कार्यालय के जरूरी कामकाज को निपटाने के लिए दो शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है। शिक्षक सुरेश आर्या व चंद्र सिंह पुजारी शिक्षण कार्य के साथ ही कार्यालय के काम को भी निपटा रहे हैं।  


कोट  
आदर्श जीआईसी में पांच विषयों के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। वैकल्पिक कदम के रूप में इन विषयों को एलटी शिक्षकों के जरिये पढ़ाया जाता है। वहीं लिपिकीय पद रिक्त होने से यह काम भी अध्यापकों के द्वारा निपटाया जा रहा है।  
सीपी गहतोड़ी,   प्रधानाचार्य,  जीआईसी, चंपावत।
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