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एक में रहने को जगह नहीं, दूसरे का नहीं खुला ताला  

Thu, 28 Dec 2017 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत Updated Thu, 28 Dec 2017 10:45 PM IST
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Not  place to live in
टनकपुर स्थित इस कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में अभी तक ताले लटके हैं।
 ये अजीब विडंबना है। एक छात्रावास में रहने को पर्याप्त जगह नहीं है, तो दूसरे नव निर्मित छात्रावास के ताले तक नहीं खुल पा रहे हैं। नतीजा यह कि कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में 50 की क्षमता होने के बावजूद इस वक्त 108 छात्राएं रहने को मजबूर हैं। यह स्थिति भी तब है, जब इस नव निर्मित छात्रावास का उद्घाटन 30 महीने पूर्व खुद तबके मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है।
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टनकपुर में जिले का इकलौता कस्तूरबा गांधी विद्यालय है। इस आवासीय विद्यालय में पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने वाली गरीब छात्राओं को नि:शुल्क पढ़ाई की सुविधा है। यहां की छात्राओं की पढ़ाई तो बाकायदा हो रही है। छठीं से आठवीं कक्षा तक की 50 छात्राओं की पढ़ाई महात्मा गांधी जूनियर हाइस्कूल और नौंवी से बारहवीं तक की 58 छात्राओं की पढ़ाई जीजीआईसी में हो रही है। लेकिन इन छात्राओं की आवासीय व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में 108 छात्राएं रहने को मजबूर हैं।
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जूनियर तक की छात्राओं के लिए महात्मा गांधी जूनियर हाइस्कूल से करीब 400 मीटर दूर छात्रावास है। मगर इस छात्रावास में आठवीं तक ही नहीं, हाइस्कूल व इंटरमीडिएट तक की छात्राएं भी रह रही है। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में 108 छात्राओं के रहने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। सोने से लेकर शौचालय तक की असुविधा इन छात्राओं को हो रही है।  ये हाल भी तब है, जबकि माध्यमिक की छात्राओं के लिए नया छात्रावास बन चुका है।
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काेट
 2.33 करोड़ रुपये से निर्मित इस छात्रावास का उद्घाटन जून 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रेमा ठाकुर का कहना है कि फिलहाल यहां दो भोजन माता, एक अनुसेवक और एक रात्रि चौकीदार है। तीन अनुदेशिकाएं व एक लेखाकार के पद खाली हैं। इसके अलावा माध्यमिक छात्राओं के लिए भोजन माताएं भी नहीं है।

आवासीय विद्यालय के छात्रावास में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा संचालित छात्रावास ठीक से चल रहा है। मगर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान द्वारा हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की छात्राओं के लिए बनाए गए छात्रावास के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। इसके लिए पदों का सृजन भी शासन से होना है।

आरसी पुरोहित,
मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
कोट
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की माध्यमिक की छात्राओं के छात्रावास के संचालन में कतिपय तकनीकी दिक्कतें आ रही है। पदों को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। इस संबंध में शासन को पत्र लिख जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
डॉ.अहमद इकबाल, जिलाधिकारी, चंपावत।

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