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Champawat News: चंपावत में 30 दिन से नहीं बरसी एक बूंद, सूखे का अंदेशा

Tue, 02 Jan 2024 10:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 02 Jan 2024 10:22 PM IST
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Not a drop of rain in Champawat for 30 days, fear of drought
चंपावत। चंपावत जिले में पिछले साल चार दिसंबर के बाद एक बूंद बारिश नहीं हुई है। मौसम के इस मिजाज का असर खेत-खलिहानों पर पड़ रहा है। सूखे खेतों से परेशान हाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। बारिश न होने से न फसलें जम पाई है और न ही फसलों की वृद्धि ठीक से हो पा रही है। नमी की कमी से खेतों में खुरदुरा पना होने के अलावा सब्जियां बर्बाद होने का खतरा होने लगा है। मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी का कहना है कि 15 जनवरी तक बारिश नहीं होने पर फसल को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है।
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बारिश नहीं होने से पहाड़ के काफी हिस्सों में गेहूं, मसूर, सरसों, जई, जौं आदि की फसलों को नहीं बो सके हैं। 30 प्रतिशत किसानों ने बुआई ही नहीं की है। और जिन्होंने बुआई की भी है, तो उनमें से अधिकांश जगह नमी की कमी मुश्किल बन रही है। फसलों की वृद्धि पर इसका असर पड़ा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंपावत में आखिरी बार चार दिसंबर 2023 को दो मिलीमीटर बारिश हुई। सूखे के इस हाल से खेतों में नमी कम हो गई है। गेहूं, जौ, लहसुन, प्याज के पौधों में पीलेपन का खतरा बढ़ गया है।
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सूखे के कारण बरबाद होने की कगार पर रबी की फसल, किसानों की चिंता बढ़ी

संवाद न्यूज एजेंसी

पिथौरागढ़। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसल बरबाद होने की कगार पर है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
पिथौरागढ़ जिले में 73744 किसान हैं, जो लगभग 42 हजार हेक्टेयर में खेती करते हैं। खेती किसानी की स्थिति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र 3200 हेक्टेयर भूमि में ही सिंचाई की सुविधा है। शेष कृषि भूमि असिंचित है। यह असिंचित क्षेत्र की खेती पूरी तरह से मौसम पर निर्भर रहती है। इस समय जिले में किसानों ने लगभग 27 हजार हेक्टेयर में रवि की फसल की बुआई की है। तीन महीने पहले गेहूं, चना, जौ, मसूर आदि की बुआई के समय बारिश हुई थी। उसके बाद से क्षेत्र में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई है। इससे असिंचित क्षेत्रों में खेतों में बोया गया बीज ही अंकुरित नहीं हुआ। जो बीज अंकुरित हुआ उसकी पौध बढ़ नहीं रही है। इससे किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है। कनालीछीना निवासी किसान राम सिंह ने बताया कि गेहूं और मसूर की पौध बारिश नहीं होने के कारण सूखने की कगार पर है। सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। मौसम पर ही निर्भर रहता होता है। कभी सूखे के कारण तो कभी अतिवृष्टि के कारण फसलें खराब हो जाती हैं। इस संबंध में पिथौरागढ़ की मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा का कहना है कि 15 जनवरी तक यदि बारिश हुई तो खेतों को नमी मिलने से फसलों में सुधार होगा।
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