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पहली बार नहीं होगी रामलीला
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लोहाघाट की रामलीला का एक दृश्य, फाइल फोटो
- फोटो : LOHAGHAT
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चंपावत/लोहाघाट। धार्मिक मेलों के बाद अब रामलीला भी कोरोना महामारी की चपेट में है। जिले की दो सबसे पुरानी और नामी रामलीलाओं का आयोजन इस बार नहीं होगा। दोनों रामलीला आयोजन कमेटी ने यह निर्णय लिया है। चंपावत और लोहाघाट की रामलीला कलात्मकता, मंचीय शैली और अदाकारी के लिए मशहूर थी, लेकिन इस बार दर्शक इन लीलाओं का दीदार नहीं कर सकेंगे। उत्तराखंड बनने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब पहाड़ में रामलीला नहीं होगी। लोहाघाट की लीला के मंचन को आजादी से पहले अंग्रेज भी देखते थे। बताते हैं कि तब स्वतंत्रता सेनानी स्व. पंडित हर्षदेव ओली लीला के संवादों का अंग्रेजी में अनुवाद करते थे।
कोरोना की वजह से इस बार चंपावत की ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन न करने का निर्णय लिया गया है। इसकी सूचना संबंधित लोगों को दी जा रही है।
- भगवत राय, अध्यक्ष, रामलीला कमेटी, चंपावत।
सवा सौ साल पुरानी लोहाघाट की रामलीला का आयोजन इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गया है। इससे पहले सिर्फ एक बार लीला का आयोजन स्थगित किया गया था।
- जीवन मेहता, अध्यक्ष, रामलीला कमेटी, लोहाघाट।
लोहाघाट की लीला काली कुमाऊं की प्रमुख सांस्कृतिक थाती है। इसने सांस्कृतिक वैभव को नई ऊंचाई दी है। लीला न हो पाने से इस बार किरदार भी मायूस हैं।
- प्रह्लाद सिंह मेहता, निदेशक, रामलीला, लोहाघाट।
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कोरोना की वजह से इस बार चंपावत की ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन न करने का निर्णय लिया गया है। इसकी सूचना संबंधित लोगों को दी जा रही है।
- भगवत राय, अध्यक्ष, रामलीला कमेटी, चंपावत।
सवा सौ साल पुरानी लोहाघाट की रामलीला का आयोजन इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गया है। इससे पहले सिर्फ एक बार लीला का आयोजन स्थगित किया गया था।
- जीवन मेहता, अध्यक्ष, रामलीला कमेटी, लोहाघाट।
लोहाघाट की लीला काली कुमाऊं की प्रमुख सांस्कृतिक थाती है। इसने सांस्कृतिक वैभव को नई ऊंचाई दी है। लीला न हो पाने से इस बार किरदार भी मायूस हैं।
- प्रह्लाद सिंह मेहता, निदेशक, रामलीला, लोहाघाट।