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अधूरे हैलीपैड को पूरा करने के लिए रुपये नहीं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 12:06 AM IST
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No money to complete incomplete helipad
दो साल से लटका चंपावत का हैलीपैड। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। दो पड़ोसी जिले ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में हवाई सफर की सुविधा है, लेकिन नेपाल सीमा से लगे तीसरे जिले चंपावत में हवाई सफर तो दूर एक सामान्य सा हेलीपैड भी नहीं है। चंपावत का निर्माणाधीन हेलीपैड का काम बजट न मिलने से दो साल से बंद है।
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सितंबर 1997 में बने चंपावत जिले में हवाई पट्टी तो दूर, हेलीपैड भी पूरा नहीं हो सका है। उत्तराखंड इमरजेंसी एसिस्टेंस प्रोजेक्ट (यूईएपी) के तहत चंपावत में सर्किट हाउस के पास 0.20 हेक्टेयर जमीन पर शुरू इस हेलीपैड परियोजना को नवंबर 2018 तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन काम पूरा होना तो दूर, दो साल से काम ही बंद है। 99 लाख रुपये खर्च होने के बाद जमीन के समतलीकरण के बाद बस इसमेें प्लेटफार्म का काम ही पूरा हो सका है। अभी हेलीपैड में बहुउद्देश्यीय हॉल, सुरक्षा दीवार, घास और सजावट का काम होना बाकी है। जिला आपदा नियंत्रण अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि इस हेलीपैड में दो चौपर और 1 एम-17 जहाज तीनों एक साथ उतर सकेंगे। इसका उपयोग आपदा में राहत समेत वीआईपी मूवमेंट और अन्य गतिविधियों के लिए भी किया जाना था।
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बजट की कमी से हेलीपैड का काम लंबे समय से बंद है। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से संशोधित आगणन बनाकर शासन से बजट की मांग की गई है। धन मिलने के बाद बचा काम पूरा हो सकेगा।
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- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि इस बार मानसूनी बारिश बेहतर होगी। कम बारिश में सूखे का खतरा तो अधिक बारिश कई बार आफत की बारिश में तब्दील हो जाती है। इसके चलते जिले के पहाड़ी हिस्सों में भूस्खलन और मैदान में बाढ़ का खतरा बना रहता है। ऐसे में सड़क संपर्क पर ब्रेक लगने से हवाई राहत मददगार होता, लेकिन इसके लिए जिले में एक भी हेलीपैड नहीं है।

फिलहाल खेल मैदान है अस्थायी हेलीपैड
चंपावत जिले में इस वक्त किसी भी अति महत्वपूर्ण अतिथियों के आने पर गोरलचौड़ मैदान को अस्थायी रूप से हेलीपैड बनाया जाता है। इससे न केवल खेल मैदान की हालत बिगड़ती है, बल्कि प्रतिकूल असर भी पड़ता है। एसएसएबी के हेलीपैड का भी यदाकदा उपयोग किया जाता है।
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