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सड़क पर बोरे बिछाकर बेचे जा रहे सिटरस फल
उजाला ब्यूरो चंपावत।
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:33 PM IST
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चंपावत जिला मुख्यालय में बोरे में रख कर बेचे जा रहे सिटरस फल।
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भले ही काश्तकारों की आय दोगुनी करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित किए जाने का दावा किया जाता रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। सिटरस फलोत्पादन में क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखने वाले जिले के काश्तकारों को अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) के लिए समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। आलम ये है कि काश्तकारों को सड़क पर बोरे बिछाकर सिटरस फलों को बेचना पड़ रहा है।
उद्यान विभाग की ओर से बीते तीन सालों से सिटरस फलों की खरीद के लिए एक भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं खोला गया है। हालात यह है कि उत्पादकों को जिले में बहुतायत से पैदा होने वाले संतरा और माल्टा के फल कौड़ियों के भाव बेचने पड़ रहे हैं।
सिटरस फलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर की सुविधा न होने, उचित बाजार भाव नहीं मिलने से काश्तकारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। चार-पांच वर्ष पूर्व में जिले में कुछ स्थानों पर मदर डेयरी जैसी संस्थाओं ने क्षेत्र के मौसमी फलों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला शुरू किया था लेकिन यह पहल भी परवान नहीं चढ़ सकी।
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उधर, चंपावत के जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या का कहना है कि जिले में सिटरस फलों की खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस बार ओलावृष्टि के कारण जिले के अधिकांश स्थानों पर सिटरस फलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। काश्तकारों को खुले बाजार में सिटरस फल बेचने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिल रहे हैं।
चंपावत जिले में सिटरस फलों का एरिया और उत्पादन
सिटरस फल एरिया उत्पादन
माल्टा 1025 हेक्टेयर 2110 एमटी
गलगल 406 हेक्टेयर 1041 एमटी
संतरा 535 हेक्टेयर 920 एमटी
कागजी नींबू 260 हेक्टेयर 380 एमटी
सीमांत क्षेत्र में होता है सिटरस फलों का उत्पादन
जिले की नेपाल सीमा से लगे तामली, पोलप, नग्छूयला, चामी, रायल, बचकोट, नाग, कंडोला, रियासी बमनगांव, कारी, तरकुली, सिमियाउरी, दुबड़ जैनल, मंच, नीड़, गुरखोलीगूंठ, सौराई, भनार, हरतोला के अलावा लोहाघाट के डुमडाई, खेतसारी, पुल्ला, लेटी जमरसौं, बगौटी, कोटला, मौड़ा, मडलक, गजीना, बिल्दे, बमनकूड़ा, डूंगरी, रौल, धौन, दिगालीचौड़ आदि क्षेेत्रों में संतरा और माल्टा आदि सिटरस फलों की व्यापक पैदावार होती है।
काश्तकार पुष्कर दत्त, भुवन चंद्र, कैलाश चंद्र आदि के अनुसार वह दूरदराज क्षेत्रों से सिटरस फलों को चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर, बनबसा के नगरीय क्षेत्रों में पहुंचाते हैं।
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उद्यान विभाग की ओर से बीते तीन सालों से सिटरस फलों की खरीद के लिए एक भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं खोला गया है। हालात यह है कि उत्पादकों को जिले में बहुतायत से पैदा होने वाले संतरा और माल्टा के फल कौड़ियों के भाव बेचने पड़ रहे हैं।
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सिटरस फलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर की सुविधा न होने, उचित बाजार भाव नहीं मिलने से काश्तकारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। चार-पांच वर्ष पूर्व में जिले में कुछ स्थानों पर मदर डेयरी जैसी संस्थाओं ने क्षेत्र के मौसमी फलों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला शुरू किया था लेकिन यह पहल भी परवान नहीं चढ़ सकी।
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उधर, चंपावत के जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या का कहना है कि जिले में सिटरस फलों की खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस बार ओलावृष्टि के कारण जिले के अधिकांश स्थानों पर सिटरस फलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। काश्तकारों को खुले बाजार में सिटरस फल बेचने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिल रहे हैं।
चंपावत जिले में सिटरस फलों का एरिया और उत्पादन
सिटरस फल एरिया उत्पादन
माल्टा 1025 हेक्टेयर 2110 एमटी
गलगल 406 हेक्टेयर 1041 एमटी
संतरा 535 हेक्टेयर 920 एमटी
कागजी नींबू 260 हेक्टेयर 380 एमटी
सीमांत क्षेत्र में होता है सिटरस फलों का उत्पादन
जिले की नेपाल सीमा से लगे तामली, पोलप, नग्छूयला, चामी, रायल, बचकोट, नाग, कंडोला, रियासी बमनगांव, कारी, तरकुली, सिमियाउरी, दुबड़ जैनल, मंच, नीड़, गुरखोलीगूंठ, सौराई, भनार, हरतोला के अलावा लोहाघाट के डुमडाई, खेतसारी, पुल्ला, लेटी जमरसौं, बगौटी, कोटला, मौड़ा, मडलक, गजीना, बिल्दे, बमनकूड़ा, डूंगरी, रौल, धौन, दिगालीचौड़ आदि क्षेेत्रों में संतरा और माल्टा आदि सिटरस फलों की व्यापक पैदावार होती है।
काश्तकार पुष्कर दत्त, भुवन चंद्र, कैलाश चंद्र आदि के अनुसार वह दूरदराज क्षेत्रों से सिटरस फलों को चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर, बनबसा के नगरीय क्षेत्रों में पहुंचाते हैं।