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पंचायतघरों के आड़े आ रही जमीन की कमी
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डीपीआरओ रामपाल सिंह।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। भवनहीन ग्राम पंचायतों में पंचायत घर बनाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है। पंचायत घरों के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान पर निशुल्क जमीन न मिलने से मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी नहीं हो सकी है।
जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 11 के पास अपने कार्यालय भवन नहीं हैं और 20 कार्यालय जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इसके मद्देनजर इस साल 31 अगस्त को टनकपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायत घर विहीन पंचायतों के लिए भवन बनाने की घोषणा की थी लेकिन जमीन न मिलने के कारण ये घोषणा अधूरी है। मोहनपुर और टनकपुर ग्राम पंचायत में तो कहीं भी निशुल्क जमीन उपलब्ध नहीं है जबकि अन्य पंचायतों में उपयुक्त जगह पर जमीन नहीं मिल पा रही है।
फिलहाल इन भवनविहीन पंचायतों का कार्यालय दूसरे स्थान से चल रहा है जिससे कामकाज में असुविधा हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर कार्यों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। योजनाओं के लाभ से लेकर रोजमर्रा का कामकाज तक उन पर निर्भर है। राशनकार्ड, आवास योजनाओं, मनरेगा, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण समेत ग्रामीण विकास के कई कार्य ग्राम पंचायतें ही संचालित करतीं हैं।
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इन 11 ग्राम पंचायतों में बनने हैं नए पंचायतघर
सल्ली, नायल, हरम, बिचई, मंच, पुनेठी, ढकना बडौला, कठनौली, शक्तिपुरबुंगा, टनकपुर, मोहनपुर।
यहां हैं जीर्णशीर्ण 20 पंचायत घर
बस्टिया, अमकड़िया, चैकुनीबोरा, शील, छुलापै, सुंगरखाल, कजीना, भुम्वाड़ी, सुनडुंगरा, मौनकांडा, जौलाड़ी, डुंगरी, पिनाना, ककनई, बिरगुल, बाजरीकोट, नीड़ तल्ली, लड़ाबोरा, वालिक, चौड़ाकोट।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिले में 11 भवनहीन पंचायतों के लिए उपयुक्त स्थान पर निशुल्क जमीन की तलाश करने के निर्देश दिए गए लेकिन फिलहाल कोई भी पंचायत ऐसी भूमि का चयन नहीं कर सकी है। इस कारण बजट और निर्माण संबंधी आगे की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। निशुल्क जमीन न मिलने पर निदेशालय से मार्गदर्शन लिया जाएगा। जीर्णशीर्ण 20 पंचायत घरों के नवनिर्माण के लिए भी प्रस्ताव भेजे गए हैं। - रामपाल सिंह, डीपीआरओ, चंपावत।
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जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 11 के पास अपने कार्यालय भवन नहीं हैं और 20 कार्यालय जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इसके मद्देनजर इस साल 31 अगस्त को टनकपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायत घर विहीन पंचायतों के लिए भवन बनाने की घोषणा की थी लेकिन जमीन न मिलने के कारण ये घोषणा अधूरी है। मोहनपुर और टनकपुर ग्राम पंचायत में तो कहीं भी निशुल्क जमीन उपलब्ध नहीं है जबकि अन्य पंचायतों में उपयुक्त जगह पर जमीन नहीं मिल पा रही है।
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फिलहाल इन भवनविहीन पंचायतों का कार्यालय दूसरे स्थान से चल रहा है जिससे कामकाज में असुविधा हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर कार्यों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। योजनाओं के लाभ से लेकर रोजमर्रा का कामकाज तक उन पर निर्भर है। राशनकार्ड, आवास योजनाओं, मनरेगा, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण समेत ग्रामीण विकास के कई कार्य ग्राम पंचायतें ही संचालित करतीं हैं।
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इन 11 ग्राम पंचायतों में बनने हैं नए पंचायतघर
सल्ली, नायल, हरम, बिचई, मंच, पुनेठी, ढकना बडौला, कठनौली, शक्तिपुरबुंगा, टनकपुर, मोहनपुर।
यहां हैं जीर्णशीर्ण 20 पंचायत घर
बस्टिया, अमकड़िया, चैकुनीबोरा, शील, छुलापै, सुंगरखाल, कजीना, भुम्वाड़ी, सुनडुंगरा, मौनकांडा, जौलाड़ी, डुंगरी, पिनाना, ककनई, बिरगुल, बाजरीकोट, नीड़ तल्ली, लड़ाबोरा, वालिक, चौड़ाकोट।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिले में 11 भवनहीन पंचायतों के लिए उपयुक्त स्थान पर निशुल्क जमीन की तलाश करने के निर्देश दिए गए लेकिन फिलहाल कोई भी पंचायत ऐसी भूमि का चयन नहीं कर सकी है। इस कारण बजट और निर्माण संबंधी आगे की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। निशुल्क जमीन न मिलने पर निदेशालय से मार्गदर्शन लिया जाएगा। जीर्णशीर्ण 20 पंचायत घरों के नवनिर्माण के लिए भी प्रस्ताव भेजे गए हैं। - रामपाल सिंह, डीपीआरओ, चंपावत।