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बगवाल : आस्था ने धराशायी किए कोविड नियम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 11:25 PM IST
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No Corona in Devidhura Bagawal
चंपावत जिले के देवीधुरा मां बाराही धाम में रविवार को बगवाल युद्ध में शामिल रणबांकुरे। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत (चंद्रशेखर जोशी)। कोरोना काल में ये दूसरी बगवाल थी। तीन अगस्त 2020 के बाद इस साल रविवार को हुई बगवाल भी सांकेतिक रूप से होनी थी। काफी हद तक बगवाल खेलने में संयम बरता भी गया लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कोविड नियमों पर भारी पड़ी। तयशुदा नियमों का कहीं कोई पालन नहीं हुआ। बगवाल खेलने वालों की जितनी संख्या तय की गई थी, उससे छह गुना से अधिक लोग जोश में आकर दुबचौड़ा खोलीखांण मैदान में कूद पड़े। प्रशासन और पुलिस बेबसी से इस नजारे को देखती रही।
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दस दिन पहले 12 अगस्त को देवीधुरा में प्रशासन और मंदिर समिति की बैठक में तय हुआ था कि चारों खामों के 11-11 प्रतिनिधियों सहित कुल 75 लोग बगवाल में शिरकत करेंगे, लेकिन 21 अगस्त को तहसील प्रशासन और समिति की बैठक में बगवाल खेलने वालों की संख्या बढ़ाकर 84 तक कर दी गई थी। रविवार को ज्यों-ज्यों बगवाल का समय करीब आता गया, बगवाली वीरों की संख्या बढ़कर 300 पार तक पहुंच गई। एसडीएम अनिल गर्ब्याल और सीओ अशोक कुमार सिंह के साथ ही मंदिर समिति ने भी नियमों का पालन करने की अपील की, लेकिन उनकी अपील बेअसर रही।
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ऐसे में सुरक्षित दूरी का पालन करना तो खैर आसान भी नहीं था, लेकिन सैनिटाइज करने की व्यवस्था भी बस कामचलाऊ थी। पुलिस की कोशिशों के बावजूद दर्शकों को भी नहीं रोका जा सका। दर्शक दीर्घा से ही सवा हजार से अधिक लोग बगवाल के गवाह बने। साल 2020 में बगवाल नहीं खेली जानी थी, सिर्फ मैदान की परिक्रमा और देवी का पूजन होना था, लेकिन आस्था के जुनून में पांच मिनट तक बगवाल हुई।
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देवीधुरा की बगवाल को कोविड नियमों का पालन करते हुए आयोजित करने की सख्त हिदायत दी गई थी। इसे लेकर आयोजन समिति ने सहमति भी जताई थी। प्रशासन ने व्यवस्था में लगे अधिकारियों को छोड़ किसी भी अधिकारी को बगवाल में नहीं जाने के निर्देश दिए गए थे। वहीं जन प्रतिनिधियों से भी बगवाल में नहीं जाने की अपील की गई थी। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं होने की बात सामने आने पर एसडीएम से रिपोर्ट तलब की जाएगी। - विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।
मंदिर समिति ने बगवाल के आयोजन के लिए कोविड नियमों का यथासंभव पालन किया है। प्रशासन को पूरा सहयोग दिया गया। साथ ही ध्वनि विस्तारक यंत्र से भी लगातार नियमों के पालन करने की अपील की गई। - खीम सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष, मंदिर समिति, चंपावत।
...लेकिन नहीं थे वीआईपी और अफसर
चंपावत। बगवाल में दर्शक तो खूब आए, लेकिन वीआईपी कोई नहीं था। पहली बार कोई बड़े नेता नहीं थे। भीमताल के विधायक राम सिंह कैडा की मौजूदगी बगवाल योद्धा के रूप में थी। पिछली बार पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल मौजूद थे, लेकिन इस बार उन्होंने भी कोविड नियमों का पालन किया।

कोरोना से पहले मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत, केंद्रीय राज्य मंत्री रहते अजय टम्टा, प्रदेश के मंत्री धन सिंह रावत, अरविंद पांडेय सहित कई दिग्गज नेता बगवाल के अतिथि के रूप में मौजूद रह चुके हैं। वैसे बगवाल से छह दिन पूर्व 16 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी देवीधुरा का दौरा कर चुके हैं।

देवीधुरा के खोलीखाड़ दुर्बाचौड़ मैदान में बगवाल की मंत्रणा करते बगवाली वीर।

देवीधुरा के खोलीखाड़ दुर्बाचौड़ मैदान में बगवाल की मंत्रणा करते बगवाली वीर।- फोटो : CHAMPAWAT

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